Infosys Buyback: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस अपने इतिहास के सबसे बड़े शेयर बायबैक कार्यक्रम के साथ सुर्खियों में है। कंपनी का 18,000 करोड़ रुपये का शेयर बायबैक गुरुवार, 20 नवंबर से निवेशकों के लिए खुल गया है और यह अवसर 26 नवंबर तक उपलब्ध रहेगा। निवेशकों को इसमें अपने शेयर टेंडर करने के लिए कुल पाँच ट्रेडिंग दिनों का समय दिया गया है।
कौन होंगे एलिजिबल शेयरहोल्डर?
इस बायबैक में वही निवेशक हिस्सा ले सकते हैं जिनके पास 14 नवंबर की रिकॉर्ड डेट तक इंफोसिस के शेयर उनके डिमैट अकाउंट में मौजूद थे। यानी अगर किसी निवेशक ने इस तारीख के बाद शेयर खरीदे हैं, तो वे इस ऑफर में हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
बायबैक ऑफर में क्या है?
कंपनी ने 5 रुपये फेस वैल्यू वाले 10 करोड़ तक पूरी तरह भुगतान किए जा चुके शेयर वापस खरीदने का निर्णय लिया है। इस बायबैक पर कुल 18 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे और शेयरों की खरीद टेंडर ऑफर के जरिए होगी। बायबैक की कीमत 1,800 रुपये प्रति शेयर तय की गई है, जिससे छोटे और बड़े दोनों निवेशकों को बेहतर वैल्यू मिलने की संभावना है। बायबैक विंडो 20 नवंबर से 26 नवंबर शाम 5 बजे तक खुली रहेगी और निवेशकों को भुगतान 3 दिसंबर तक कर दिया जाएगा।
किस तरह होगा शेयर चयन?
कंपनी ने अलग-अलग श्रेणियों के शेयरधारकों के लिए अलग एलिजिबिलिटी निर्धारित की है:
- छोटे निवेशक (Retail Investors): हर 11 शेयर पर 2 शेयर टेंडर करने की अनुमति
- अन्य सामान्य श्रेणी निवेशक: हर 706 शेयर पर 17 शेयर टेंडर करने की पात्रता।
इस प्रक्रिया को संभालने के लिए KFin Technologies Ltd. को रजिस्टार नियुक्त किया गया है, जबकि Kotak Investment Banking पूरे सौदे का प्रबंधन कर रही है। कंपनी ने साफ कहा है कि इस बायबैक से उसकी आय पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इसके लिए उपयोग होने वाला पैसा कंपनी की उपलब्ध कैश रिज़र्व से आएगा।
निवेशकों के लिए क्या है फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बायबैक छोटे निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण मुनाफे का अवसर है। बायबैक की कीमत बाजार कीमत से प्रीमियम पर होने के कारण रिटर्न की संभावना भी बेहतर रहती है। विशेष तौर पर कम टैक्स स्लैब वाले निवेशकों को इस बायबैक का लाभ जरूर लेना चाहिए, क्योंकि इससे मिलने वाली राशि अपेक्षाकृत अधिक रहेगी।
बड़े निवेशकों को क्या करना चाहिए?
हाई टैक्स स्लैब श्रेणी यानी 16 लाख रुपये से अधिक आय वाले निवेशकों के लिए स्थिति थोड़ी अलग हो सकती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस कैटेगरी में आने वाले निवेशकों के लिए सीधे बायबैक में हिस्सेदारी करने के बजाय खुले बाजार में शेयर बेचना ज्यादा टैक्स-फ्रेंडली साबित हो सकता है। क्योंकि नए टैक्स नियमों के तहत बायबैक के बदले मिलने वाली रकम को डिविडेंड आय माना जाएगा और उस पर व्यक्ति के टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
कैपिटल लॉस का फायदा भी मिलेगा
बायबैक के तहत कंपनी द्वारा खरीदे गए शेयरों की लागत शेयरधारकों के लिए कैपिटल लॉस मानी जाएगी, जिसे वे आगे अपनी अन्य कैपिटल गेन से एडजस्ट कर सकते हैं। यदि किसी निवेशक के पास इस वर्ष कैपिटल गेन कम है और पूरा घाटा सेट-ऑफ नहीं हो पाता, तो उसे अगले आठ वर्षों तक आगे कैरी किया जा सकता है और भविष्य के कैपिटल गेन के खिलाफ एडजस्ट किया जा सकता है।
रिटेल भागीदारी कम रहने की संभावना
एक्सिस सिक्योरिटीज का अनुमान है कि रिटेल निवेशकों की भागीदारी इस बार कुल मिलाकर थोड़ी कम रह सकती है, लेकिन फिर भी इसे छोटे निवेशकों के लिए एक बेहतर और लाभदायक अवसर बताया गया है।
इंफोसिस का यह बायबैक उन निवेशकों के लिए एक आकर्षक मौका है, जो कंपनी में लंबे समय से निवेशित हैं और अपने होल्डिंग पर सुरक्षित कमाई चाहते हैं। रिटेल निवेशकों के लिए यह बेहतरीन मौका माना जा रहा है, जबकि हाई टैक्स ब्रैकेट वाले निवेशकों को अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेकर निर्णय लेना चाहिए। आईटी सेक्टर की दिग्गज इंफोसिस से जुड़ा यह अपडेट निवेशकों और बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, और आने वाले कुछ दिनों में इसकी प्रतिक्रिया बाजार में साफ दिखाई दे सकती है।