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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ऑटो/टेक > क्या बैकग्राउंड apps को बार-बार बंद करना सही आदत है? जानिए आपका फोन इससे कैसे स्लो हो जाता है
ऑटो/टेक

क्या बैकग्राउंड apps को बार-बार बंद करना सही आदत है? जानिए आपका फोन इससे कैसे स्लो हो जाता है

Last updated: 27/11/2025 3:59 PM
By
Industrial Empire
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क्या आप भी बिना सोचे-समझे समय-समय पर फोन निकालकर बैकग्राउंड में चल रही सभी apps को एक-एक करके बंद करते रहते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपके फोन को तेज़ बनाने के बजाय उल्टा उसे और ज्यादा स्लो करने का काम करती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि बैकग्राउंड ऐप्स को किल कर देने से फोन हल्का हो जाता है और उसकी परफॉर्मेंस बेहतर हो जाती है, लेकिन यह आधी जानकारी पर आधारित एक गलतफहमी है। असलियत यह है कि आज के आधुनिक स्मार्टफोन्स, चाहे वे एंड्रॉयड हों या iOS, इतने स्मार्ट हो चुके हैं कि वो खुद ही यह तय कर लेते हैं कि कौन सी ऐप्स बैकग्राउंड में चलती रहें और किन्हें अपने-आप बंद कर दिया जाए। यह स्मार्ट मैनेजमेंट आपके फोन को तेज रखने के लिए ही बनाया गया है, लेकिन जब आप इस प्रक्रिया में बार-बार दखल देते हैं, तो फोन पर उल्टा बोझ बढ़ जाता है।

जब आप किसी ऐप को पूरी तरह बंद नहीं करते और उससे सीधे किसी दूसरी ऐप पर चले जाते हैं, तो पहली ऐप बैकग्राउंड में रुकी रहती है। RAM में उसका डेटा मौजूद रहता है ताकि आप उसे दोबारा खोलें तो वह तुरंत लोड हो जाए। लेकिन कई लोग इसे गलत तरीके से समझते हैं और सोचते हैं कि जितनी कम ऐप्स बैकग्राउंड में होंगी, फोन उतना तेज चलेगा। हालांकि सच यह है कि रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली ऐप्स को बार-बार बंद करने से फोन को उन्हें फिर से स्टार्ट करना पड़ता है, और यही प्रक्रिया फोन की RAM और प्रोसेसर पर ज्यादा दबाव डालती है। यही वजह है कि कई बार आपको लगता है कि फोन खुल तो रहा है, लेकिन पहले जैसा फास्ट नहीं है।

उदाहरण के तौर पर, अगर आप इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब या किसी पेमेंट ऐप का दिन में कई बार इस्तेमाल करते हैं, तो इन्हें बैकग्राउंड में रहने देना ही बेहतर है। क्योंकि इन्हें हर बार बंद कर देने पर फोन को दोबारा स्क्रैच से पूरा डेटा लोड करना पड़ता है। यह प्रोसेस ज्यादा ऊर्जा लेती है, जिससे बैटरी भी जल्दी खत्म होती है और फोन की स्पीड भी प्रभावित होती है। वहीं दूसरी ओर, अगर ऐप बैकग्राउंड में पहले से मौजूद है, तो वह एक सेकंड में खुल जाती है और फोन की बैटरी पर भी कम लोड पड़ता है। यही कारण है कि स्मार्टफोन कंपनियां खुद सलाह देती हैं कि बार-बार ऐप्स को किल न करें।

लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बैकग्राउंड ऐप्स को कभी बंद नहीं करना चाहिए। आपका फोन बेस्ट परफॉर्मेंस तब देता है जब आप समझदारी से केवल उन्हीं ऐप्स को बंद करें जो लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने वाली हों। जैसे कि आपने किसी यात्रा के दौरान DigiYatri या किसी टिकट बुकिंग ऐप का इस्तेमाल किया। यात्रा खत्म हो जाने के बाद यह ऐप आपको आने वाले कई घंटों या दिनों में नहीं चाहिए होगी, इसलिए इसे बंद कर देना सही कदम है। इसी तरह, शॉपिंग ऐप्स, ऑफिशियल पोर्टल या बैंकिंग ऐप्स जिन्हें आप अक्सर इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन एक बार खोलने पर बैकग्राउंड में रह जाती हैं – उन्हें बंद करना बिल्कुल ठीक है।

लेकिन वही ऐप्स जिन्हें आप दिनभर में कई बार खोलते हैं, जैसे सोशल मीडिया, न्यूज, मैसेजिंग और वीडियो प्लेटफॉर्म, उन्हें बार-बार बंद करना आपके फोन के लिए नुकसानदायक है। क्योंकि रोजमर्रा की ऐप्स को बंद करने की आदत, फोन के हार्डवेयर पर बार-बार अतिरिक्त लोड डालती है और लंबे समय में फोन की स्पीड और बैटरी हेल्थ दोनों को प्रभावित करती है।

कई बार लोगों को लगता है कि बैकग्राउंड ऐप्स बंद करने से RAM खाली हो जाती है, लेकिन आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम RAM को वैसे भी खाली नहीं रहने देते। RAM का भरकर रहना कोई खराबी नहीं बल्कि आज के स्मार्टफोन्स का एक फीचर है, ताकि ऐप्स तेज़ी से चल सकें। फोन खुद ही जरूरत पड़ने पर RAM खाली कर लेता है। इसलिए ऐप्स को बार-बार बंद करके RAM खाली करने की कोशिश करना आज की टेक्नोलॉजी में ना तो जरूरी है और ना ही फायदेमंद।

इसलिए अगली बार जब आप आदतन बैकग्राउंड ऐप्स को किल करने लगें, तो याद रखें कि फोन को अपने-आप मैनेज करने देना ही बेहतर है। बस उन्हीं ऐप्स को बंद करें जिनका उपयोग आप लंबे समय तक नहीं करने वाले। यह तरीका न सिर्फ फोन की स्पीड को बेहतर रखेगा, बल्कि बैटरी लाइफ और प्रोसेसर पर पड़ने वाले लोड को भी काफी हद तक कम करेगा। स्मार्टफोन का स्मार्ट इस्तेमाल यही है कि आप सिस्टम की क्षमताओं पर भरोसा रखें और केवल वही काम करें जो वास्तव में जरूरी हो।

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