इज़राइल ने हाल ही में तेहरान में स्थित ईरान की बसीज फोर्स के मुख्यालय पर एक बड़ा हमला किया है। यह वही फोर्स है जो ईरान में विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने और खुफिया निगरानी के लिए बदनाम रही है। जानकारों का मानना है कि इस हमले के पीछे इज़राइल की बड़ी रणनीति छिपी है – ईरान में सत्ता परिवर्तन।
बसीज फोर्स ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की सत्ता की सबसे बड़ी ढाल मानी जाती है। चाहे वह छात्र आंदोलन हों, महिलाओं के अधिकार की आवाज़ हो या फिर आर्थिक नीतियों के खिलाफ बगावत – हर जगह बसीज ने प्रदर्शनकारियों को दबाया है। यही वजह है कि खामेनेई के खिलाफ किसी भी तख़्तापलट की योजना से पहले इस फोर्स को कमजोर करना ज़रूरी माना जा रहा है।
इज़राइल पहले ही ईरान के कई सैन्य और IRGC ठिकानों पर हमले कर चुका है। लेकिन अब उसका फोकस देश के भीतर की ताकतों को तोड़ने पर है। अगर बसीज को पंगु बना दिया जाता है तो खामेनेई की हत्या कर सत्ता पलटने का रास्ता खुल सकता है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस पूरी योजना को अमेरिका की तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल चुका है।
खुद को ईरान का ‘क्राउन प्रिंस’ बताने वाले रेज़ा पहलवी ने भी जनता से खुले तौर पर अपील की है कि वह इस्लामिक शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरें। यह भी संकेत देता है कि विदेशों में बैठे विपक्षी गुट और पश्चिमी ताकतें अब निर्णायक कार्रवाई के मूड में हैं।
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हाल ही में खामेनेई की हत्या की संभावना को नकारने से इनकार किया। उनका कहना था कि इससे युद्ध खत्म होगा, बढ़ेगा नहीं। वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान ने सरेंडर नहीं किया तो वे जानते हैं कि खामेनेई कहां छिपे हैं।
साफ है, ईरान की सत्ता पर अब बाहरी हमलों के साथ-साथ अंदरूनी उथल-पुथल का भी खतरा मंडरा रहा है और बसीज पर हुआ ताज़ा हमला उसी तूफान की आहट हो सकता है।