भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते आईटी सेक्टर निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरा। बीते चार महीनों में पहली बार आईटी शेयरों में इतनी तेज गिरावट देखने को मिली है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से हो रही प्रगति ने पारंपरिक आईटी सर्विस मॉडल को लेकर निवेशकों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी डर की वजह से पूरे हफ्ते आईटी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे और निवेशकों की बड़ी पूंजी साफ हो गई।
निवेशकों का भरोसा इसलिए भी डगमगाया क्योंकि एआई अब केवल भविष्य की तकनीक नहीं रहा, बल्कि बहुत तेजी से ऐसे काम करने लगा है, जिनके लिए पहले आईटी कंपनियों को लंबा समय और बड़ी टीमों की जरूरत पड़ती थी। इससे यह आशंका गहराने लगी है कि आने वाले समय में आईटी सर्विस कंपनियों का बिजनेस मॉडल बदल सकता है या उनकी मांग पर असर पड़ सकता है।
निफ्टी आईटी में हफ्ते भर में 6.4% की गिरावट
इस गिरावट की सबसे साफ तस्वीर निफ्टी आईटी इंडेक्स में दिखी। शुक्रवार को यह सूचकांक करीब 1.5 प्रतिशत टूट गया, जबकि पूरे हफ्ते में इसमें 6.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह प्रदर्शन पिछले चार महीनों में सबसे खराब माना जा रहा है। आईटी शेयरों में लगातार बिकवाली से निफ्टी आईटी इंडेक्स में शामिल कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 6.4 लाख करोड़ रुपये घट गया। यानी सिर्फ एक हफ्ते में निवेशकों की इतनी बड़ी रकम बाजार से साफ हो गई। इससे यह साफ हो गया कि निवेशक इस सेक्टर को लेकर फिलहाल काफी सतर्क और चिंतित नजर आ रहे हैं।
सभी बड़े आईटी शेयर लाल निशान में
इस हफ्ते निफ्टी आईटी इंडेक्स में शामिल लगभग सभी शेयर नुकसान में रहे। इनमें सबसे ज्यादा दबाव इन्फोसिस पर देखने को मिला, जिसके शेयर करीब 8.2 प्रतिशत टूट गए। टेक महिंद्रा में करीब 7.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टीसीएस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर भी कमजोर पड़े। आईटी शेयरों की इस सामूहिक गिरावट ने साफ संकेत दिया कि यह किसी एक कंपनी की समस्या नहीं, बल्कि पूरे सेक्टर से जुड़ी चिंता है। निवेशक पूरे आईटी उद्योग के भविष्य को लेकर सवाल कर रहे हैं, जिसका असर शेयरों की कीमतों पर दिख रहा है।
एआई की नई घोषणाओं से बढ़ी चिंता
आईटी शेयरों में गिरावट की एक बड़ी वजह एआई से जुड़ी हालिया घोषणाएं भी मानी जा रही हैं। खासतौर पर एंथ्रोपिक कंपनी द्वारा पेश किए गए नए एआई मॉडल और प्लग-इन को लेकर बाजार में चर्चा तेज हो गई। इन टूल्स की मदद से अब फाइनेंशियल रिसर्च, लीगल वर्क, सेल्स, मार्केटिंग और डेटा एनालिसिस जैसे काम बहुत तेजी से और कम समय में किए जा सकते हैं। निवेशकों को डर है कि अगर एआई इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा, तो आईटी सर्विस कंपनियों के पारंपरिक प्रोजेक्ट्स की मांग घट सकती है। यही वजह है कि एआई से जुड़ी हर नई घोषणा के बाद आईटी शेयरों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट ने बढ़ाई बेचैनी
इस हफ्ते आईटी सेक्टर में घबराहट तब और बढ़ गई, जब निफ्टी आईटी इंडेक्स एक दिन में करीब 5.9 प्रतिशत टूट गया। यह मार्च 2020 के बाद से एक दिन में आईटी शेयरों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इतनी तेज गिरावट ने निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं आईटी सेक्टर के अच्छे दिन वाकई खत्म तो नहीं हो रहे। पहले से ही वैश्विक स्तर पर आईटी सेवाओं की मांग धीमी है और अब एआई का डर इस दबाव को और बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आईटी सेक्टर की मौजूदा गिरावट के पीछे सिर्फ एआई का डर ही नहीं, बल्कि कमाई की धीमी रफ्तार भी बड़ी वजह है। इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी चोकालिंगम के मुताबिक, डॉलर के लिहाज से आईटी कंपनियों की ग्रोथ काफी सुस्त है। ऐसे में एआई द्वारा पारंपरिक बिजनेस मॉडल को चुनौती मिलने की आशंका ने निवेशकों का भरोसा और कमजोर कर दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा गिरावट कुछ हद तक जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया हो सकती है। उनके अनुसार भारतीय आईटी कंपनियां खुद भी एआई टूल्स को अपनाकर अपनी उत्पादकता बढ़ा रही हैं और लागत कम कर रही हैं। कई बड़ी कंपनियों को पहले ही एआई से जुड़े प्रोजेक्ट्स मिलने लगे हैं।
क्या आगे सुधर सकता है आईटी सेक्टर का मूड?
लंबी अवधि के नजरिए से देखें तो आईटी सेक्टर पूरी तरह कमजोर नहीं है। भले ही फिलहाल निवेशकों का भरोसा डगमगाया हो, लेकिन तकनीक का बदलता दौर आईटी कंपनियों के लिए नए मौके भी लेकर आ सकता है। अगर भारतीय आईटी कंपनियां एआई को खतरे के बजाय अवसर के रूप में अपनाती हैं, तो आने वाले समय में यह सेक्टर खुद को नए रूप में ढाल सकता है। फिलहाल बाजार में डर हावी है, लेकिन जैसे-जैसे एआई के साथ नए बिजनेस मॉडल सामने आएंगे, आईटी शेयरों में फिर से स्थिरता और भरोसा लौटने की उम्मीद की जा सकती है।