भारत के टेलीकॉम सेक्टर में एक बार फिर दो दिग्गज कंपनियां आमने-सामने हैं। इस बार विवाद का केंद्र है 26GHz स्पेक्ट्रम बैंड, जिसे 5G और आने वाली नई टेक्नोलॉजी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां Reliance Jio और Bharti Airtel इस बैंड के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग राय रखती हैं।
26GHz बैंड हाई-फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम है, जिसे आमतौर पर मिलीमीटर वेव बैंड कहा जाता है। इसकी मदद से बेहद तेज इंटरनेट स्पीड, कम लेटेंसी और बड़े डेटा ट्रांसफर जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। यही वजह है कि 5G के विस्तार में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Jio की क्या मांग है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस जियो 26GHz बैंड के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा लचीले नियमों की मांग कर रही है। कंपनी चाहती है कि इस स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल सिर्फ मोबाइल नेटवर्क तक सीमित न रहे, बल्कि इसे फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) जैसी सेवाओं के लिए भी इस्तेमाल किया जा सके।
FWA टेक्नोलॉजी के जरिए बिना फाइबर के हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल घरों, ऑफिस और छोटे व्यवसायों को ब्रॉडबैंड जैसी सुविधा देने में किया जा सकता है।
जियो का मानना है कि भारत जैसे बड़े देश में जहां हर जगह फाइबर नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है, वहां 26GHz बैंड वायरलेस ब्रॉडबैंड के विस्तार में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
Airtel को क्यों है आपत्ति?
वहीं भारती एयरटेल का तर्क है कि 26GHz बैंड का इस्तेमाल अगर बड़े पैमाने पर फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए किया जाता है, तो इससे स्पेक्ट्रम का उपयोग करने का तरीका बदल जाएगा।
एयरटेल का मानना है कि इस बैंड को मुख्य रूप से मोबाइल 5G सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। कंपनी को चिंता है कि अगर कुछ कंपनियां इसे बड़े स्तर पर वायरलेस ब्रॉडबैंड के लिए इस्तेमाल करेंगी तो भविष्य में स्पेक्ट्रम की उपलब्धता और नेटवर्क प्लानिंग पर असर पड़ सकता है।
26GHz बैंड इतना खास क्यों है?
5G नेटवर्क में अलग-अलग फ्रीक्वेंसी बैंड का इस्तेमाल किया जाता है। लो बैंड ज्यादा कवरेज देता है, जबकि हाई बैंड ज्यादा स्पीड देने में सक्षम होता है।
26GHz बैंड की खासियत यह है कि इसमें बहुत ज्यादा डेटा क्षमता होती है। हालांकि इसकी रेंज कम होती है और इसे ज्यादा टावर या छोटे सेल नेटवर्क की जरूरत पड़ सकती है।
यही वजह है कि इसे शहरों, इंडस्ट्रियल एरिया, स्मार्ट सिटी और हाई-डेटा इस्तेमाल वाले क्षेत्रों के लिए उपयोगी माना जाता है।
टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
भारत में टेलीकॉम सेक्टर पहले से ही तेज प्रतिस्पर्धा का दौर देख रहा है। जियो ने अपनी एंट्री के बाद सस्ते डेटा और डिजिटल सेवाओं के जरिए बाजार में बड़ा बदलाव किया। वहीं एयरटेल लंबे समय से टेलीकॉम क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
दोनों कंपनियां 5G, ब्रॉडबैंड और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। ऐसे में स्पेक्ट्रम जैसे संसाधन को लेकर मतभेद होना स्वाभाविक है।
सरकार के लिए क्यों अहम है फैसला?
26GHz बैंड को लेकर सरकार के फैसले का असर आने वाले वर्षों में भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ सकता है। सरकार को यह तय करना होगा कि इस स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किस तरह किया जाए ताकि ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलें और टेलीकॉम कंपनियों के बीच संतुलन बना रहे।
भारत में इंटरनेट की मांग लगातार बढ़ रही है। ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल पेमेंट, क्लाउड सर्विस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के विस्तार के लिए मजबूत नेटवर्क जरूरी है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल 26GHz बैंड को लेकर जियो और एयरटेल के बीच मतभेद टेलीकॉम सेक्टर में नई बहस को जन्म दे रहा है। एक तरफ जियो इसे डिजिटल ब्रॉडबैंड विस्तार का जरिया मान रही है, वहीं एयरटेल इसके इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की बात कर रही है।
अब नजर सरकार के फैसले पर है, क्योंकि 26GHz स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल सिर्फ दो कंपनियों की रणनीति नहीं बल्कि भारत के भविष्य के डिजिटल नेटवर्क को भी प्रभावित करेगा।