lemongrass Farming: बदलते समय में खेती करना आसान नहीं रहा। पारंपरिक फसलों में लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि मुनाफा सीमित होता जा रहा है। ऐसे में छोटे और सीमांत किसान अब ऐसी खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिसमें कम खर्च में ज्यादा आमदनी हो सके। इसी जरूरत को पूरा कर रही है लेमनग्रास की खेती, जो आज कई किसानों की किस्मत बदल रही है।
क्या है lemongrass और क्यों है खास?
lemongrass एक सुगंधित औषधीय पौधा है, जिससे निकाला जाने वाला तेल बाजार में काफी महंगे दामों पर बिकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बंजर और कम उपजाऊ जमीन पर भी आसानी से उगाई जा सकती है। साथ ही इसे बहुत ज्यादा पानी या देखभाल की जरूरत नहीं होती।
तेल की जबरदस्त मांग, किसानों को सीधा फायदा
lemongrass से निकलने वाले तेल का इस्तेमाल साबुन, परफ्यूम, कॉस्मेटिक्स और हर्बल उत्पादों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। बाजार में इस तेल की कीमत करीब 1,000 रुपये प्रति लीटर तक मिल रही है। यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती।
छत्तीसगढ़ में बदली खेती की तस्वीर
छत्तीसगढ़ सरकार औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा दे रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला, जो अधिकतर वनों से घिरा हुआ है, वहां छोटे किसानों के पास सीमित खेती योग्य जमीन है। पहले ये किसान मजदूरी या पलायन के लिए मजबूर थे, लेकिन अब लेमनग्रास की खेती ने उन्हें अपने गांव में ही रोजगार दे दिया है।
क्लस्टर मॉडल से किसानों को मिला सहारा
कृषि विभाग और बोर्ड द्वारा क्लस्टर मॉडल अपनाया गया, जिसके तहत किसानों को समूह में जोड़ा गया। खेती शुरू होने से पहले ही तेल खरीदने वाली कंपनियों से किसानों का अनुबंध कराया गया। इन कंपनियों ने बोरवेल, खेत की तैयारी, पौधारोपण और फेंसिंग जैसे कामों के लिए अग्रिम आर्थिक सहायता भी दी।
230 एकड़ में हो रही खेती, 123 किसान जुड़े
आज जिले के चार क्लस्टर—खरड़ी, पंडरी, अमारू और हरड़ी—में 123 किसान करीब 230 एकड़ भूमि पर लेमनग्रास की खेती कर रहे हैं। किसानों को lemongrass की स्लिप्स मुफ्त में दी गईं और तेल निकालने के लिए डिस्टिलेशन यूनिट भी स्थापित की गईं। भविष्य में हर 50 किसानों पर एक यूनिट लगाने की योजना है।
कम लागत, कई साल की कमाई
लेमनग्रास की फसल केवल चार महीने में पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है। पहली कटाई में करीब 4 लीटर तेल निकलता है, जिससे लगभग 4,000 रुपये की आय होती है। दूसरी कटाई में 8 लीटर तेल मिलता है, जिससे 8,000 रुपये की कमाई होती है। इस तरह एक साल में करीब 12,000 रुपये की आय होती है, जो अगले पांच वर्षों तक जारी रहती है।
छोटे किसान भी बन रहे आत्मनिर्भर
बहरी-जोरकी गांव के किसान अगहन सिंह के पास केवल एक-तिहाई एकड़ जमीन थी। सीमित जमीन के कारण उनकी आमदनी बहुत कम थी। सरकारी सहायता और मार्गदर्शन से उन्होंने लेमनग्रास की खेती शुरू की और आज वे नियमित आय कमा रहे हैं।
खेती का भविष्य बन रही lemongrass
lemongrass की खेती यह साबित कर रही है कि सही फसल और सही योजना से छोटे किसान भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं। कम लागत, लगातार आय और सरकारी सहयोग ने इसे किसानों के लिए