चीन के तिआनजिन शहर में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की महत्वपूर्ण मुलाक़ात हुई। यह सम्मेलन दो दिनों तक चला, जिसमें 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा का मुख्य फोकस था — सुरक्षा चुनौतियां, वैश्विक वित्तीय ढांचा और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना।
भारत-रूस रिश्तों की गहराई
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और रूस के लंबे और भरोसेमंद संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कठिन समय में दोनों देश हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं। मोदी ने यह भी बताया कि भारत और रूस के बीच उच्च-स्तरीय वार्ताएं और नियमित संवाद इस साझेदारी की मजबूती को दर्शाते हैं। मोदी ने कहा कि 140 करोड़ भारतीय दिसंबर 2025 में होने वाले 23वें शिखर सम्मेलन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह बयान भारत-रूस रिश्तों की गहराई और दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को साफ तौर पर दर्शाता है।
पुतिन का ‘प्रिय मित्र’ संबोधन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करते हुए उन्हें अपना “प्रिय मित्र” कहा। उन्होंने भारत और रूस के रिश्तों को विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का उदाहरण बताया। पुतिन ने कहा कि आने वाले समय में यह साझेदारी और भी मजबूत और बहुआयामी होगी। पुतिन ने यह भी बताया कि 21 दिसंबर 2025 को भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हो जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि यह मुलाक़ात दोनों देशों के बीच नई संभावनाओं के दरवाजे खोलेगी।
यूक्रेन युद्ध पर शांति की अपील
द्विपक्षीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युद्ध का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और जल्द से जल्द इसका समाधान आवश्यक है। मोदी ने हाल में हुए शांति प्रयासों का स्वागत करते हुए सभी पक्षों से रचनात्मक रवैया अपनाने की अपील की। मोदी ने यह संदेश दिया कि स्थायी शांति और स्थिरता के लिए संवाद सबसे प्रभावी रास्ता है। भारत की इस पहल से साफ है कि वह क्षेत्रीय और वैश्विक शांति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
SCO में भारत की प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO के पूर्ण सत्र में भारत की ओर से अपना बयान दिया और भारत की नीति को तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित बताया:
- सुरक्षा
- कनेक्टिविटी
- अवसर
मोदी ने कहा कि किसी भी देश की विकास यात्रा के लिए सुरक्षा और स्थिरता सबसे अहम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद इन लक्ष्यों के सबसे बड़े अवरोधक हैं।
आतंकवाद पर मोदी का सख्त संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर सभी सदस्य देशों से सामूहिक और निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा “आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा है। इसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता और न ही इस पर कोई दोहरे मानदंड लागू होने चाहिए।” याद दिलाया कि भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहा है। उन्होंने हाल ही में पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद की भयावहता को खत्म करने के लिए साझा प्रयास ज़रूरी हैं।
भारत की वैश्विक भूमिका और सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहलों पर भी प्रकाश डाला। भारत ने अल-कायदा और उससे जुड़े आतंकी संगठनों के खिलाफ संयुक्त सूचना अभियान का नेतृत्व किया। आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ लगातार वैश्विक स्तर पर आवाज उठाई है।
SCO जैसे मंचों के जरिए भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बुलंद करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया और उज्बेकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी इस सम्मेलन में मौजूद रहे।
मुलाक़ात का महत्व
मोदी और पुतिन की यह मुलाक़ात केवल भारत-रूस रिश्तों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे एशियाई भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह मुलाक़ात दिखाती है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखते हुए भी प्रमुख वैश्विक ताकतों से संतुलित संबंध रखना चाहता है। भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखते हुए वैश्विक शांति, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक अवसरों पर भी स्पष्ट संदेश दिया है।
चीन में हुई मोदी-पुतिन की मुलाक़ात सिर्फ़ एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि भारत-रूस रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अवसर थी। यह बैठक एक तरफ जहां दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाती है, वहीं भारत की वैश्विक कूटनीति को भी नई दिशा देती है। भारत का संदेश साफ है — “सुरक्षा, शांति और विकास एक-दूसरे से जुड़े हैं, और स्थायी प्रगति के लिए मिलकर काम करना ही आगे बढ़ने का रास्ता है।”