New Crop Varieties: नए साल की शुरुआत देश के करोड़ों किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आई है। केंद्र सरकार ने खेती को ज्यादा लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 25 प्रमुख फसलों की 184 नई उन्नत किस्में जारी की हैं, जो किसानों की पैदावार बढ़ाने के साथ-साथ बदलते मौसम और जलवायु संकट से निपटने में भी मदद करेंगी। इन किस्मों का अनावरण केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली के पूसा स्थित ICAR परिसर में किया।
ICAR की बड़ी पहल, किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
कृषि मंत्री ने बताया कि ये सभी किस्में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई हैं। इन उन्नत किस्मों की खासियत यह है कि ये ज्यादा पैदावार देने वाली, रोग-कीट प्रतिरोधी और जलवायु के अनुकूल हैं। इससे किसानों को उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने और बेहतर दाम पाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ नई किस्में जारी करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि ये बीज जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचें।
भारत बना दुनिया का नंबर-1 चावल उत्पादक
इस मौके पर कृषि मंत्री ने एक और बड़ी उपलब्धि की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ दिया है।
- भारत का चावल उत्पादन: 150.18 मिलियन टन
- चीन का चावल उत्पादन: 145.28 मिलियन टन
मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों की जीत नहीं है, बल्कि यह भारत की मजबूत खाद्य सुरक्षा और किसानों की मेहनत का प्रमाण है। अब भारत दुनिया को चावल उपलब्ध कराने वाला प्रमुख देश बन चुका है।
“बीज खेती की आत्मा है”: कृषि मंत्री
शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “बीज खेती की आत्मा है। अगर बीज अच्छा है, तो फसल और किसान-दोनों का भविष्य सुरक्षित है।” उन्होंने बताया कि पिछले 10–11 वर्षों में 3200 से ज्यादा नई फसल किस्में विकसित की गई हैं। सरकार का प्रयास है कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज सही कीमत पर मिलें, ताकि उनकी आय बढ़ सके।
इन नई किस्मों में क्या है खास?
जारी की गई नई फसल किस्मों को खास तौर पर भविष्य की खेती को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इनमें शामिल हैं—
– बायो-फोर्टिफाइड अनाज, जिनमें पोषण ज्यादा है
– सूखा, गर्मी और खारापन सहन करने की क्षमता
– कीट और बीमारियों से बेहतर सुरक्षा
– जल्दी पकने वाली और ज्यादा पैदावार देने वाली किस्में
ये सभी गुण किसानों को जलवायु परिवर्तन के दौर में बड़ी राहत देने वाले हैं।
सबसे ज्यादा अनाज फसलों की किस्में
184 नई किस्मों में सबसे ज्यादा हिस्सा अनाज फसलों का है। कुल 122 किस्में अनाज की हैं – इनमें धान की 60 और मक्का की 50 किस्में शामिल हैं। ज्वार, बाजरा, रागी और अन्य मिलेट्स की भी नई किस्में, दालों में अरहर, मूंग और उड़द की 6 नई किस्में हैं। यह कदम मोटे अनाज और दालों को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति को भी दर्शाता है।
तिलहन, कपास और चारा फसलों पर भी फोकस
सरकार ने सिर्फ अनाज तक खुद को सीमित नहीं रखा है।
– तिलहन फसलों की 13 नई किस्में (सरसों, कुसुम, तिल, मूंगफली, अरंडी)
– चारा फसलों की 11 किस्में, जिससे पशुपालकों को फायदा होगा
– गन्ने की 6 और कपास की 24 किस्में
– जूट और तंबाकू की भी 1-1 नई किस्म
इससे खेती के साथ-साथ पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों के लिए क्यों है यह कदम अहम?
इन नई उन्नत किस्मों का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ेगा। फसल उत्पादन बढ़ेगा, कीटनाशकों पर खर्च कम होगा, फसल की गुणवत्ता सुधरेगी, बाजार में बेहतर दाम मिलेंगे और किसानों की कुल आय में इजाफा होगा ।
खेती का भविष्य मजबूत करने की कोशिश
25 फसलों की 184 नई उन्नत किस्मों का जारी होना भारतीय कृषि के लिए एक बड़ा कदम है। यह किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगा, साथ ही देश की खाद्य सुरक्षा और पोषण जरूरतों को भी मजबूत बनाएगा। नए साल में यह पहल किसानों के लिए वास्तविक तोहफा साबित हो सकती है, जो खेती को ज्यादा टिकाऊ और मुनाफे का सौदा बनाएगी।