भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तेजी से उभरता हुआ सेक्टर है और सरकार इसे देश की अर्थव्यवस्था के नए ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करना चाहती है। इसी दिशा में अब केंद्र सरकार प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI स्कीम के अगले चरण को शुरू करने की तैयारी कर चुकी है। इस बात की पुष्टि खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के सचिव ए. पी. दास जोशी ने FICCI की 98वीं वार्षिक आम बैठक में की। उनके अनुसार, सरकार इस सेक्टर को मजबूत बनाने और बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के लिए लगातार नीतिगत फैसले ले रही है, ताकि भारत वैल्यू-एडेड फूड उत्पादों का वैश्विक हब बन सके।
जोशी ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सिर्फ फैक्ट्रियों या प्रोसेसिंग प्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने और समग्र आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मौजूदा PLI स्कीम ने इस सेक्टर में शानदार परिणाम दिए हैं – उत्पादन में वृद्धि हुई है, निर्यात बढ़ा है और कई कंपनियों ने नई लाइनें स्थापित की हैं। अब सरकार इस सफलता को और आगे ले जाना चाहती है। इसलिए नई PLI स्कीम ज्यादा कंपनियों को शामिल करेगी और उद्योग को नई तकनीक, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर सप्लाई चेन उपलब्ध कराएगी।
आने वाली स्कीम का फोकस उत्पादन बढ़ाने पर तो होगा ही, साथ ही हाई-टेक मशीनरी, प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी और ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड को अपनाने पर भी होगा। इसका सीधा फायदा भारत को अंतरराष्ट्रीय मार्केट में मिलेगा, जहां भारतीय खाद्य उत्पादों की ब्रांड वैल्यू और उपस्थिति दोनों बढ़ेंगी। इसके साथ ही, नई स्कीम रोजगार के नए अवसर खोलेगी और छोटे-बड़े सभी स्तरों की यूनिट्स को प्रोत्साहन देगी, जिससे पूरे उद्योग में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
सरकार इस समय किसान-उद्योग कनेक्शन को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। अक्सर देखा जाता है कि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पाता, वहीं दूसरी ओर फूड प्रोसेसिंग उद्योग को लगातार कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ता है। नई नीति का लक्ष्य दोनों के बीच एक ऐसी सप्लाई चेन बनाना है जो किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाए और उद्योग को उच्च गुणवत्ता वाला कच्चा माल लगातार उपलब्ध कराए। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण छलांग होगा, क्योंकि इससे गांवों में रोजगार और आय दोनों बढ़ेंगी।
सरकार उद्योग जगत से सुझाव भी मांग रही है, ताकि नई PLI स्कीम जमीन से जुड़ी जरूरतों के अनुरूप तैयार की जा सके। मंत्रालय चाहता है कि कंपनियां, यूनियन, स्टार्टअप्स और निवेशक अपनी राय साझा करें, ताकि नीति व्यावहारिक और वास्तविक जरूरतों के हिसाब से बनाई जा सके। उम्मीद है कि इस बार की स्कीम बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और इनोवेशन को बढ़ावा देगी।
PLI स्कीम क्या है?
दरअसल, PLI यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो उन कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन देती है जो भारत में विनिर्माण बढ़ाती हैं और निश्चित उत्पादन या बिक्री लक्ष्य पूरा करती हैं। 2020 में शुरू हुई इस योजना का मुख्य उद्देश्य विदेशी कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और भारत को एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है।
इस स्कीम की सबसे खास बात यह है कि यह सेक्टर-विशिष्ट है – इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, मोबाइल, टेक्सटाइल, ऑटो और फूड प्रोसेसिंग जैसे 14 क्षेत्रों में यह लागू है। कंपनियों को बढ़ती बिक्री पर 4–6 फीसदी तक का प्रत्यक्ष वित्तीय फायदा मिलता है, जिससे वे उत्पादन लागत कम कर पाती हैं और बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनती हैं। दूसरी ओर, सरकार चाहती है कि इससे रोजगार बढ़े, टेक्नोलॉजी आए और भारत का निर्यात मजबूत हो।
उपभोक्ताओं के लिए भी PLI स्कीम कई मायनों में फायदेमंद है। घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से बाजार में उत्पादों की विविधता बढ़ती है, प्रतिस्पर्धा से कीमतें कम होती हैं और क्वालिटी में सुधार आता है। खासकर फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में यह स्कीम उपभोक्ताओं को बेहतर, सुरक्षित और किफायती उत्पाद मुहैया कराने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। कुल मिलाकर, नई PLI स्कीम देश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को एक नई दिशा दे सकती है। यह न सिर्फ उद्योग और किसानों को मजबूत बनाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक बाजार में एक नए, सशक्त खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकती है।