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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ट्रेंडिंग खबरें > Russia Oil Trade: रूस से तेल खरीद में भारत हुआ पीछे, तुर्किये बना दूसरा सबसे बड़ा खरीदार
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Russia Oil Trade: रूस से तेल खरीद में भारत हुआ पीछे, तुर्किये बना दूसरा सबसे बड़ा खरीदार

Last updated: 14/01/2026 3:54 PM
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Industrial Empire
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Russia Oil Trade में बदलाव, दिसंबर 2025 में भारत तीसरे स्थान पर, तुर्किये दूसरे नंबर पर
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Russia Oil Trade: दिसंबर 2025 में रूस से कच्चे तेल और अन्य जीवाश्म ईंधन की खरीद के मामले में भारत को झटका लगा है। लंबे समय तक रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार रहने वाला भारत अब तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उसकी जगह तुर्किये ने ले ली है। यह जानकारी यूरोप की प्रतिष्ठित रिसर्च संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर महीने में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात महीने-दर-महीने आधार पर 29 प्रतिशत घट गया, जो 60 डॉलर प्रति बैरल की प्राइस कैप लागू होने के बाद का अब तक का सबसे निचला स्तर है।

अमेरिकी प्रतिबंधों का सीधा असर
भारत की तेल खरीद में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंध माने जा रहे हैं। अमेरिका ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर प्रतिबंध लगाए हैं। ये दोनों कंपनियां भारत को रूस से आने वाले कुल कच्चे तेल की लगभग 60 प्रतिशत आपूर्ति करती थीं। इन प्रतिबंधों के बाद भारतीय तेल रिफाइनरियों ने सतर्क रुख अपनाया और रूस से तेल खरीद में कटौती शुरू कर दी। इसका असर दिसंबर के आंकड़ों में साफ दिखाई देता है।

रिलायंस और सरकारी रिफाइनरियों ने घटाया आयात
CREA की रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने दिसंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात 49 प्रतिशत तक घटा दिया। वहीं, सरकारी तेल रिफाइनरियों ने भी अपने आयात में 15 प्रतिशत की कमी की। दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से कुल 2.3 अरब यूरो का जीवाश्म ईंधन खरीदा। इसमें से 1.8 अरब यूरो का हिस्सा कच्चे तेल का रहा, 424 मिलियन यूरो का आयात कोयला और पेट्रोलियम उत्पादों का था, जबकि अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद 82 मिलियन यूरो रही।

रूस के तेल निर्यात में चीन अब भी नंबर वन
रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी अब भी सबसे अधिक बनी हुई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, चीन रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात का करीब 47 प्रतिशत खरीद रहा है, जबकि भारत की हिस्सेदारी लगभग 38 प्रतिशत है। वहीं तुर्किये और यूरोपीय संघ दोनों की भागीदारी 6-6 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई है। भले ही भारत दूसरे स्थान से खिसककर तीसरे नंबर पर आ गया हो, लेकिन रूस के लिए वह आज भी एक बड़ा और रणनीतिक रूप से अहम तेल खरीदार बना हुआ है।

तुर्किये बना रूस का दूसरा सबसे बड़ा ईंधन खरीदार
दिसंबर में तुर्किये रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने के मामले में दूसरे सबसे बड़े देश के रूप में उभरकर सामने आया। इस दौरान तुर्किये ने रूस से कुल 2.6 अरब यूरो का ईंधन आयात किया, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल से बने उत्पादों का रहा। कुल आयात का लगभग 44 प्रतिशत, यानी करीब 1.1 अरब यूरो, पेट्रोलियम उत्पादों पर खर्च हुआ, जबकि 989 मिलियन यूरो की खरीद पाइपलाइन गैस के रूप में की गई। अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तुर्किये ने रूस से आयात में तेजी दिखाई, जिसका असर यह हुआ कि इस रैंकिंग में भारत पीछे छूट गया।

रूस की कुल कमाई में गिरावट, लेकिन LNG से राहत
CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर में रूस की रोजाना जीवाश्म ईंधन से होने वाली कमाई 2 प्रतिशत घटकर 500 मिलियन यूरो प्रतिदिन रह गई। कच्चे तेल से होने वाली कमाई में 12 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 198 मिलियन यूरो प्रतिदिन पर आ गई। हालांकि, एलएनजी (LNG) के मोर्चे पर रूस को राहत मिली। दिसंबर में एलएनजी से रूस की कमाई 13 प्रतिशत बढ़ी।

यूरोप में LNG की बढ़ती मांग
दिसंबर महीने में यूरोप के कुछ देशों ने रूस से एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का आयात बढ़ाया। फ्रांस ने अपने एलएनजी आयात में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी की, जबकि स्पेन ने इसमें 27 प्रतिशत का इजाफा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही रूस का जीवाश्म ईंधन निर्यात अभी भी कुछ चुनिंदा देशों पर काफी हद तक निर्भर बना हुआ है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव के संकेत अब साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं।

TAGGED:Crude Oil Import IndiaFeaturedIndia Russia OilIndustrial EmpireRussia Oil TradeTurkey Russia Energy Deal
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