Russia-Ukraine War: लगभग चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर शांति की उम्मीद जगी है। रूस ने गुरुवार, 29 जनवरी को बड़ा बयान देते हुए कहा कि उसने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का निमंत्रण भेजा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब अमेरिका की मध्यस्थता में युद्ध खत्म करने के प्रयास तेज़ हो चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
क्रेमलिन का बयान और न्योते पर सस्पेंस
रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स के मुताबिक, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोवम ने कहा कि मॉस्को ने जेलेंस्की को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, लेकिन अभी तक यूक्रेन की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल भी रूस की ओर से ऐसा ही न्योता दिया गया था, जिसे जेलेंस्की ने साफ़ तौर पर ठुकरा दिया था। उस समय जेलेंस्की ने कहा था कि वह उस देश की राजधानी नहीं जा सकते, जो रोज़ उनके देश पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। इसके उलट उन्होंने सुझाव दिया था कि अगर बातचीत करनी है, तो पुतिन खुद कीव आएं।
ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने की अफवाहें
यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब मॉस्को और कीव के बीच एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने को लेकर अफवाहें चल रही थीं। हालांकि, क्रेमलिन ने इन अटकलों पर कोई सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। इससे यह साफ है कि भले ही बातचीत की बात हो रही हो, लेकिन ज़मीनी हालात अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं।
अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता
पिछले वीकेंड अबू धाबी में अमेरिका की मध्यस्थता से रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता को दोबारा ज़िंदा करने की कोशिश हुई। हालांकि, इन बातचीतों में दोनों पक्षों के रुख में बड़े मतभेद सामने आए। अब इसी कड़ी में रविवार को बातचीत का एक और दौर प्रस्तावित है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि कोई ठोस रास्ता निकल सकता है। एक अज्ञात अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका की सक्रिय भूमिका के चलते पुतिन और जेलेंस्की की आमने-सामने की बैठक अब पहले से कहीं ज़्यादा करीब है।
क्षेत्रीय विवाद सबसे बड़ी बाधा
शांति वार्ता की राह में सबसे बड़ी रुकावट अब भी इलाकों को लेकर असहमति बनी हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे बातचीत का सबसे मुश्किल मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि किस क्षेत्र पर किसका नियंत्रण होगा, इस पर सहमति बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण है और यही वजह है कि समझौता अब तक अधूरा है।
ट्रंप का बड़ा दावा: एक हफ्ते का सीज़फायर
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक हफ्ते के लिए लड़ाई रोकने पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप के मुताबिक, यह फैसला यूक्रेन में पड़ रही कड़ाके की ठंड की वजह से लिया गया है। कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति पुतिन से कहा था कि इतनी ठंड में कीव और दूसरे शहरों पर हमले न किए जाएं। उन्होंने इस पर सहमति जताई और यह एक बहुत अच्छी बात है।
क्या शांति अब करीब है?
हालिया घटनाक्रम यह संकेत जरूर दे रहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशें गंभीर दौर में पहुंच चुकी हैं। मॉस्को का न्योता, अमेरिका की सक्रिय मध्यस्थता और संभावित अस्थायी सीज़फायर – ये सभी कदम शांति की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। हालांकि, ज़मीनी सच्चाई यह भी है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी, क्षेत्रीय विवाद और राजनीतिक शर्तें अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि युद्ध पूरी तरह थम जाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि लंबे समय बाद शांति की उम्मीद फिर से मजबूत होती दिख रही है।