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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ट्रेंडिंग खबरें > जीएसटी परिषद का बड़ा फैसला: 2-स्लैब संरचना को मंजूरी, जानिए क्या सस्ता और क्या होगा महंगा
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जीएसटी परिषद का बड़ा फैसला: 2-स्लैब संरचना को मंजूरी, जानिए क्या सस्ता और क्या होगा महंगा

Last updated: 04/09/2025 6:42 PM
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Industrial Empire
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जीएसटी परिषद की नई दो-स्लैब टैक्स संरचना – 5% और 18% जीएसटी रेट, सस्ते और महंगे होने वाली वस्तुएं 2025
56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में शामिल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व अन्य
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जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में देश के टैक्स सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया गया है। बुधवार को हुई 10.5 घंटे की मैराथन बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि अब जीएसटी की चार स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) को घटाकर सिर्फ दो स्लैब – 5% और 18% कर दिया गया है। इसके अलावा, कुछ चुनिंदा लग्जरी और हानिकारक उत्पादों के लिए 40% की विशेष जीएसटी स्लैब भी लागू की गई है।

नई दरें 22 सितंबर से लागू होंगी, यानी नवरात्रि के साथ ही यह नया टैक्स स्ट्रक्चर शुरू हो जाएगा। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से आम उपभोक्ताओं को सीधा फायदा होगा, कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान होगा और अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आएगी।

जीएसटी दर में बदलाव, टैक्स स्ट्रक्चर को बनाएगा आसान

वित्त मंत्री सीतारमण के मुताबिक, इस कदम का मकसद टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी बनाना है जो उपभोक्ताओं के हित में हो। अब लोगों को अलग-अलग उत्पादों पर कई दरों की उलझन नहीं रहेगी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस सुधार की सराहना करते हुए कहा कि यह फैसला किसानों, एमएसएमई, छोटे व्यापारियों, मध्यम वर्ग और आम नागरिकों के जीवन में सीधा सकारात्मक बदलाव लाएगा।

क्या होगा सस्ता?
इस बार जीएसटी परिषद ने कई रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स घटाकर लोगों की जेब को राहत देने का प्रयास किया है।

  1. बीमा पॉलिसियां
    व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर अब जीएसटी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। पहले इन पर 18 फीसदी टैक्स लगता था।
  2. रसोई और डेयरी उत्पाद
    पनीर, पराठा, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, छेना जैसी चीजों को अब जीएसटी से छूट मिल गई है। मक्खन, घी, गाढ़ा दूध, सूखे मेवे, जैम, आइसक्रीम, बिस्कुट, कॉर्न फ्लेक्स जैसी वस्तुओं पर अब सिर्फ 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगी, जबकि पहले इन पर 12-18% टैक्स था।
  3. कृषि उपकरण और खाद
    सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, अमोनिया जैसे उर्वरकों पर टैक्स घटाकर 5% कर दिया गया है। ट्रैक्टर, कृषि मशीनें और मिट्टी तैयार करने वाली मशीनों पर भी अब सिर्फ 5% तक ही जीएसटी लगेगी।
  4. वाहन और ऑटो सेक्टर
    छोटी कारें (पेट्रोल इंजन <1200cc और डीज़ल इंजन <1500cc) पर अब 18 फीसदी जीएसटी लगेगी, पहले यह 28 प्रतिशत था। वहीं 350cc तक की मोटरसाइकिलों पर भी अब टैक्स घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले की तरह ही 5 प्रतिशत जीएसटी जारी रहेगा।
  5. रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं
    शैम्पू, टूथपेस्ट, साबुन, हेयर ऑयल, फेस पाउडर, बर्तन, दूध की बोतलें, साइकिल, छाते, बांस के फर्नीचर जैसी वस्तुओं पर भी जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
  6. निर्माण और रियल एस्टेट
    सीमेंट पर टैक्स 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ऑटो कम्पोनेंट्स पर भी अब केवल 18 प्रतिशत ही जीएसटी लगेगी।

क्या होगा महंगा?
सरकार ने जहां आम जनता के लिए राहत दी है, वहीं कुछ लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं को 40 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में डालकर महंगा कर दिया गया है।

  1. कार्बोनेटेड और एनर्जी ड्रिंक्स
    शीतल पेय, कोला, फ्लेवर्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक्स और कैफीनयुक्त पेय पर पहले जहां 28 प्रतिशत टैक्स लगता था, अब इसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है।
  2. लग्जरी गाड़ियां और हाई-एंड बाइक
    1200cc से अधिक पेट्रोल कारें, 1500cc से अधिक डीज़ल कारें, 4,000mm से लंबी गाड़ियां और 350cc से बड़ी मोटरसाइकिलें अब महंगी हो जाएंगी। इनके साथ रेसिंग कारें, नौकाएं और प्राइवेट जेट्स भी 40 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में आएंगे।
  3. मीठे पेय और फ्लेवर्ड वाटर
    अतिरिक्त चीनी या मीठे पदार्थ वाले फ्लेवर वाटर पर अब 40 प्रतिशत टैक्स लागू होगा।
  4. तंबाकू उत्पाद
    पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, चबाने वाला तंबाकू और बीड़ी पर अभी 28 प्रतिशत जीएसटी और सेस जारी रहेगा। लेकिन जल्द ही इन पर भी 40 प्रतिशत जीएसटी लागू होगा।

उपभोक्ताओं के लिए बड़ा फायदा
सरकार का कहना है कि इस सुधार से 80 प्रतिशत से ज्यादा दैनिक उपभोग की वस्तुएं सस्ती हो जाएंगी। नई दो-स्लैब संरचना से व्यापारियों के लिए अनुपालन आसान होगा और टैक्स चोरी की संभावना भी कम होगी। 22 सितंबर से लागू होने जा रही यह नई व्यवस्था त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं की जेब को राहत देने के साथ-साथ उद्योगों को भी नई रफ्तार देने की उम्मीद जगाती है।

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