लखनऊ। भारत में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चौथा CSIR-स्टार्टअप कॉन्क्लेव आज लखनऊ के CSIR-एनबीआरआई, के.एन. कौल ब्लॉक में शुरू हुआ। यह दो दिवसीय कार्यक्रम चार प्रमुख CSIR प्रयोगशालाओं – CSIR-एनबीआरआई, CSIR-सीडीआरआई, CSIR-आईआईटीआर और CSIR-सीमैप के सहयोग से आयोजित किया गया। कॉन्क्लेव में पैनल चर्चा, टेक्नोलॉजी शो और स्टार्टअप सेशन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कॉन्क्लेव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया” और आत्मनिर्भर भारत@2047 के विज़न को साकार करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। इसमें देशभर से 50 से अधिक CSIR समर्थित स्टार्टअप्स अपने नवाचार और तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही, 200 से अधिक किसान सीधे वैज्ञानिकों और उद्यमियों के साथ संवाद कर उत्पादकता, आय और ग्रामीण विकास से जुड़ी तकनीकों के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
उद्घाटन और मुख्य आयोजन
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने किया। उन्होंने स्टार्टअप प्रदर्शनी पवेलियन का निरीक्षण किया और CSIR स्टार्टअप संस्थापकों से उनके नवाचारों पर चर्चा की। श्री पाठक ने विश्वास जताया कि ऐसे मंच उत्तर प्रदेश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगे और किसानों, युवाओं और उद्यमियों को विकसित भारत 2047 में योगदान देने के लिए सशक्त बनाएंगे।उद्घाटन के दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सीएसआईआर की मदद से प्रदेश में 200 से अधिक नए स्टार्टअप शुरू हुए हैं।
उद्घाटन दिवस की शुरुआत पंजीकरण से हुई, जिसके बाद लोटस ऑडिटोरियम में किसानों के लिए दो कार्यशालाएं आयोजित की गईं:
फ्लोरीकल्चर मिशन – CSIR-एनबीआरआई की टीम द्वारा संचालित, जिसमें उन्नत पुष्पकृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और फसलोपरांत तकनीक पर मार्गदर्शन दिया गया।
अरोमा मिशन – CSIR-सीमैप और CSIR-एनबीआरआई के विशेषज्ञों ने सुगंधित फसलों (पुदीना, लेमनग्रास, पामारोसा, वेटीवर) पर जानकारी दी, जिसमें आवश्यक तेल निष्कर्षण और उद्यमिता के अवसरों को उजागर किया गया।
उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि राज्य में पुष्पकृषि और सुगंधित फसलों में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने किसानों को विविधिकरण, अंतरफसल खेती और मूल्य संवर्धन अपनाने की सलाह दी।
अपर मुख्य सचिव बाबूलाल मीणा ने मूल्य संवर्धित उत्पादों जैसे शहद के निर्यात की संभावना पर जोर दिया और किसानों को MIDH योजना का लाभ उठाने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने गुणवत्ता, GI टैग्स और कोल्ड चेन जैसी प्रणालियों की अहमियत पर प्रकाश डाला।
स्टार्टअप्स का प्रदर्शन और पुरस्कार
CSIR-स्टार्टअप्स को उनके नवाचार और सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। प्रमुख प्रदर्शन और पुरस्कार:
– डॉ. देवेंद्र कुमार पटेल – नैनोकॉम्पोज़िट आधारित जल शोधक, PFAS हटाने के लिए।
– डॉ. प्रभांशु त्रिपाठी – एप्टामर-आधारित बायोसेंसर, आंत माइक्रोबायोटा अध्ययन हेतु।
– टेरा सेंसस – सटीक कृषि के लिए सेंसर एरे सिस्टम।
– ICAR-CISH और छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय – रेडी-टू-फ्रूट मशरूम किट्स।
ये तकनीकें CSIR प्रदर्शनी पवेलियन में मुख्य आकर्षण बनीं।
मुख्य सत्र और संबोधन
दोपहर में उद्घाटन का दूसरा चरण हुआ, जिसमें CSIR निदेशकगण और उपमुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी पवेलियन का भ्रमण किया। मुख्य सत्र का आरंभ दीप प्रज्वलन और स्वागत भाषणों से हुआ। जिसमें डॉ. ए.के. शासनी (CSIR-एनबीआरआई) – पौध विज्ञान, संरक्षण और अनुसंधान योगदान पर, डॉ. पी.के. त्रिवेदी (CSIR-सीमैप) – औषधीय और सुगंधित पौधों पर अनुसंधान के ऊपर, डॉ. राधा रंगराजन (CSIR-सीडीआरआई) – लैब से मार्केट तक नवाचार यात्रा के बारे में, डॉ. एन. कलैसेल्वी (CSIR महानिदेशक) – वैज्ञानिक नवाचारों को व्यावसायिक तकनीकों में बदलने की क्षमता पर जोर देने पर बात रखी। वहीं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि किसान और स्टार्टअप्स विकसित भारत के निर्माण में अहम हैं। उन्होंने “वोकल फॉर लोकल” और कृषि में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
महत्वपूर्ण समझौते (MoUs)
चार प्रमुख MoUs पर हस्ताक्षर किए गए, जो अनुसंधान, उद्यमिता और सामाजिक उपयोग को गति देंगे:
CSIR-आईआईटीआर, लखनऊ × पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर – पर्यावरण और जैव प्रौद्योगिकी।
CSIR-सीडीआरआई × केनिसएआई टेक्नोलॉजी – AI आधारित औषधि विकास।
CSIR-सीडीआरआई × वीजन लैब्स – सटीक कैंसर अनुसंधान।
CSIR-आईआईटीआर × स्मार्टक्यूआर टेक्नोलॉजीज – पेटेंट और तकनीकी व्यावसायीकरण।