भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। घरेलू बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी ने शानदार बढ़त दर्ज की। सेंसेक्स 1,500 अंकों से ज्यादा उछलकर 74,300 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 23,000 के स्तर को पार कर कारोबार करता नजर आया। बाजार में तेजी के पीछे आईटी, ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी अहम वजह रही।
शेयर बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों का उत्साह बढ़ा। हालांकि, कारोबार के दौरान शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। बाजार की आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के नतीजों पर भी निर्भर करेगी।
IT, ऑटो और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी
गुरुवार को बाजार में आई तेजी में आईटी, ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों का प्रमुख योगदान रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 2.1 फीसदी तक चढ़ गया। वहीं, निफ्टी ऑटो और फाइनेंशियल इंडेक्स में लगभग 1.7 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई।
निफ्टी 50 में शामिल 50 कंपनियों में से 44 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे बाजार में खरीदारी का व्यापक रुझान दिखाई दिया।
शेयरों की बात करें तो भारती एयरटेल, टेक महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचसीएल टेक के शेयरों में 3 से 5 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली। ये शेयर निफ्टी के प्रमुख टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
इसके विपरीत, नेस्ले इंडिया के शेयरों में कंपनी के नतीजों के बाद 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट हुआ कि व्यापक बाजार में तेजी के बावजूद कुछ कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा।
कच्चे तेल की कीमतों पर निवेशकों की नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए अहम बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं ने तेल की आपूर्ति पर दबाव की आशंका बढ़ाई है।
सऊदी अरब पर हूती हमलों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास मालवाहक जहाज से जुड़ी घटनाओं के कारण क्षेत्र में तनाव को लेकर चिंता बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
हालांकि, गुरुवार के शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दिखाई दी। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। हालांकि, तेल की ऊंची कीमतें महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता बढ़ा सकती हैं।
निवेशकों की नजर अब वैश्विक बाजारों के संकेतों, कंपनियों के वित्तीय नतीजों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर रहेगी। बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी निवेश का फैसला अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर करें।