Subsidy News: मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब राज्य के किसानों को सिंचाई के लिए मिलने वाले 3 हार्स पॉवर और 5 हार्स पॉवर के एग्रीकल्चर कनेक्शनों पर बिजली बिल का केवल 10 फीसदी ही भुगतान करना होगा। बाकी 90 प्रतिशत राशि सरकार खुद वहन करेगी। यह कदम उन किसानों के लिए बड़ी राहत है जो बढ़ते बिजली खर्च के चलते सिंचाई का खर्च पूरा करने में कठिनाई महसूस कर रहे थे।
किसानों के खर्च में बड़ी कमी
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा और उनका उत्पादन लागत भी घटेगी। अब बिजली बिल की चिंता कम होने से किसान अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खेती सुधार, बीज, खाद और आधुनिक तकनीक पर खर्च कर सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम किसानों की आय बढ़ाने में बेहद प्रभावी साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री बोले – किसान खुशहाल तो प्रदेश खुशहाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार खेती को मजबूती देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि कई किसान बिजली बिल का भुगतान करने में सक्षम नहीं थे, जिसके चलते उनकी सिंचाई और उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही थी। नई व्यवस्था से इन किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है और कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
गेहूं और धान पर भी राहत, बढ़ा समर्थन
सरकार ने सिर्फ बिजली बिल ही नहीं, बल्कि समर्थन मूल्य और बोनस जैसी योजनाओं को भी मजबूत किया है। राज्य के किसानों से गेहूं 2,600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। साथ ही धान किसानों के लिए भी बोनस राशि का प्रावधान किया गया है। सरकार ने साफ कहा है कि आगे भी किसानों के हित को प्राथमिकता दी जाएगी और जरूरत के अनुसार योजनाओं में सुधार और विस्तार होता रहेगा।
भावान्तर योजना से मिल रहा फायदा
मध्यप्रदेश देश का वह एकमात्र राज्य है जो भावान्तर योजना के जरिए किसानों को फसल के असली मूल्य और बाजार में मिलने वाली असमानता के बीच आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष रूप से सोयाबीन किसानों को इस योजना से बड़ी राशि का लाभ दिया जा रहा है, जिससे उन्हें बाजार की अनिश्चितता का कम से कम असर झेलना पड़े।
27 नवंबर को दिया जाएगा मुआवजा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव 27 नवंबर को श्योपुर में ऐसे धान किसानों को राहत राशि का वितरण करेंगे जिनकी फसलों को नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने इसके लिए पहले सर्वेक्षण कर नुकसान की स्थिति का मूल्यांकन कराया था। इस पहल से सरकार योजनाएं बना रही है, साथ में किसानों को त्वरित राहत देने पर भी फोकस कर रही है।
खेती के साथ पशुपालन
डॉ. यादव ने यह भी कहा कि श्योपुर जिले में किसान खेती के साथ दुग्ध उत्पादन में भी शानदार योगदान दे रहे हैं। गाय पालन यहां की प्रमुख परंपरा और सम्मान का हिस्सा है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती मिल रही है और कई परिवारों को दोहरा आय स्रोत उपलब्ध हो रहा है।
पर्यटन से बढ़ रहा आर्थिक विकास
श्योपुर जिले का पालपुर कूनो राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों चर्चा में है। चीतों की बसाहट के बाद अब उनकी दूसरी और तीसरी पीढ़ी सामने आ रही है। इससे यहां पर्यटन को तेज गति मिली है और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में पर्यटन आधारित आर्थिक विकास और तेजी से बढ़ेगा।
बिजली सब्सिडी, भावान्तर योजना, समर्थन मूल्य, फसल मुआवजा, पशुपालन प्रोत्साहन और पर्यटन विकास – इन सभी योजनाओं से मध्यप्रदेश सरकार कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। सरकार किसानों की लागत कम करके और उनकी आय बढ़ाकर राज्य खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा चुकी है।