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BYJU’s संकट और गहराया: फाउंडर रवींद्रन पर 1 अरब डॉलर का जुर्माना

Last updated: 23/11/2025 2:28 PM
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Industrial Empire
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अमेरिका की एक अदालत ने BYJU’S के संस्थापक बायजू रवींद्रन पर 1.16 अरब डॉलर (करीब 9,800 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना लगाया है। यह आदेश डेलावेयर की बैंकरप्सी कोर्ट ने BYJUs अल्फा और अमेरिकी कंपनी GLAS ट्रस्ट की याचिका पर दिया। अदालत ने कहा कि रवींद्रन यह रकम दोनों कंपनियों को वापस चुकाएं, क्योंकि उन्होंने न तो कोर्ट में पेशी दी और न ही मांगे गए दस्तावेज जमा किए।

Contents
बार-बार अनुपस्थित रहने पर कोर्ट नाराजआदेश के खिलाफ अपील करेंगे रवींद्रन

BYJUs अल्फा, BYJU’S की अमेरिकी सब्सिडियरी है, जिसे 2021 में वैश्विक बैंकों और निवेशकों से 1.2 अरब डॉलर का कर्ज जुटाने के लिए बनाया गया था। इस राशि में से 2022 में करीब 53.3 करोड़ डॉलर मियामी की फंड कंपनी कैमशाफ्ट कैपिटल को ट्रांसफर कर दिए गए। इस ट्रांजेक्शन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया, क्योंकि दावा किया गया कि यह राशि कर्जदाताओं से छुपाने की नीयत से ट्रांसफर की गई थी। बाद में यूके की OCI लिमिटेड के जरिए इस लेनदेन का मामला उजागर हुआ। कोर्ट में दायर फाइलों में कहा गया कि रवींद्रन इस रकम का एक बड़ा हिस्सा सिंगापुर स्थित अपनी एक कंपनी में भेजना चाहते थे।

इसके बाद BYJU’S से जुड़ी अन्य कंपनियों के जरिए निवेश की संरचना में और बदलाव किए गए। कोर्ट के जज ब्रैंडन शेनन ने इन सभी गतिविधियों के लिए बायजू रवींद्रन को जिम्मेदार ठहराया। अदालत के अनुसार, 2022 में पहली बार 53.3 करोड़ डॉलर और 2023 में दूसरी बार 54.06 करोड़ डॉलर का ट्रांसफर हुआ, यानी कुल 1.16 अरब डॉलर की रकम भेजी गई।

बार-बार अनुपस्थित रहने पर कोर्ट नाराज

कर्जदाताओं की ओर से कई बार उन्हें कोर्ट में पेश होने और दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए गए, लेकिन रवींद्रन अनुपस्थित रहे। इसके बाद कर्जदाताओं ने 11 अगस्त को डिफॉल्ट जजमेंट की मांग की और आखिरकार 20 नवंबर को कोर्ट ने एकतरफा फैसला देते हुए रवींद्रन को पूरी रकम चुकाने का आदेश दे दिया। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि BYJUs अल्फा के फंड का कब और कैसे उपयोग हुआ, इसकी पूरी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।

आदेश के खिलाफ अपील करेंगे रवींद्रन

रवींद्रन की तरफ से वकील मैकनट ने कहा कि यह एक डिफॉल्ट जजमेंट है, यानी अदालत ने उनका पक्ष सुने बिना फैसला सुना दिया। उन्होंने कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ अपील करेंगे, क्योंकि अदालत ने कई महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान नहीं दिया। उनका दावा है कि लोन की रकम का इस्तेमाल रवींद्रन या किसी फाउंडर के निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड (TLPL) के हित में किया गया था। TLPL पहले BYJU’S की पैरेंट कंपनी थी, हालांकि अब इसका नियंत्रण GLAS ट्रस्ट के पास है।

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