भारत में डिजिटल कम्युनिकेशन को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से दूरसंचार विभाग (DoT) ने OTT मैसेजिंग ऐप्स के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। नए निर्देशों के तहत अब वॉट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल, अरट्टई, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट और जोश जैसे सभी प्रमुख संचार ऐप्स को अपने यूजर्स की पहचान को उसी SIM कार्ड से स्थायी रूप से जोड़ना होगा, जिससे अकाउंट पहली बार रजिस्टर किया गया था। इस नियम का सीधा मतलब है कि कोई भी यूजर तब तक ऐप इस्तेमाल नहीं कर सकेगा, जब तक उसी फोन में वही मूल सिम कार्ड मौजूद न हो। DoT की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा 28 नवंबर को भेजे गए पत्र में इस बात को साफ तौर पर लिखा गया है।
सरकार ने यह निर्देश इसलिए जारी किए हैं ताकि टेलीकॉम पहचान, नेटवर्क और डिवाइस के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। हाल के वर्षों में फर्जी सिम, क्लोन डिवाइस और स्पैम कॉल/मैसेज से जुड़े मामले बढ़े हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि किसी भी डिजिटल कम्युनिकेशन ऐप का इस्तेमाल केवल उस यूजर तक सीमित रहे, जिसकी पहचान मोबाइल नंबर से जुड़ी है। इससे साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी, लेकिन इसका असर यूजर्स और उद्योग—दोनों पर काफी व्यापक होने वाला है।
नए नियमों का एक बड़ा हिस्सा “कंपैनियन डिवाइस” यानी लैपटॉप, टैबलेट या iPad पर ऐप इस्तेमाल करने से संबंधित है। आज बड़ी संख्या में लोग लैपटॉप पर वॉट्सऐप वेब या टेलीग्राम वेब का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब नियम यह है कि ऐसी किसी भी सहायक डिवाइस पर अकाउंट हर छह घंटे बाद अपने आप लॉगआउट हो जाएगा। दोबारा लॉगइन करने के लिए यूजर को QR कोड स्कैन करना होगा। यह प्रक्रिया बार-बार दोहरानी पड़ेगी। कंपनियों का कहना है कि यह बदलाव उनकी दैनिक कार्यशैली पर सीधा असर डालेगा, क्योंकि कई ऑफिसों में मोबाइल फोन फ्लोर पर ले जाने की अनुमति नहीं होती और कर्मचारी केवल लैपटॉप से ही चैट या डॉक्यूमेंट ट्रांसफर करते हैं।
हालांकि सख्ती का उद्देश्य सुरक्षा है, लेकिन उद्योग जगत इससे खुश नहीं है। कई कंपनियों का कहना है कि इतने बड़े बदलाव को बिना सार्वजनिक परामर्श लिए लागू कर दिया गया। उनके अनुसार यह कदम हाल ही में संशोधित साइबर सुरक्षा नियमों पर आधारित जरूर है, लेकिन इसका प्रभाव समझने के लिए और चर्चा की जरूरत थी। एक प्रमुख इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव के मुताबिक, “इन नियमों से OTT ऐप्स के सक्रिय यूजर्स की संख्या में बड़ी गिरावट आ सकती है, क्योंकि लोग हर बार सत्यापन और सिम चेकिंग की झंझट नहीं उठाना चाहेंगे।”
इस निर्देश का प्रभाव विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों पर भी पड़ेगा। कई लोग यात्रा के दौरान अपने भारतीय नंबर की सिम को सुरक्षित रखकर विदेशी ई-सिम का उपयोग करते हैं। नए नियम लागू होने के बाद अगर भारतीय सिम डिवाइस में नहीं होगी, तो वॉट्सऐप जैसे ऐप काम करना बंद कर देंगे। इसका मतलब है कि लंबे समय के यात्रियों, NRIs या विदेश में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ी असुविधा पैदा हो सकती है।
ग्रामीण इलाकों पर इसका असर और गंभीर बताया जा रहा है। भारत के गांवों में बहुत से लोग डेटा एक ऑपरेटर की सिम से चलाते हैं और अकाउंट दूसरे ऑपरेटर के नंबर से बनाते हैं। यह व्यवस्था उनके लिए किफायती होती है। नए नियम उनकी रोजमर्रा की डिजिटल सुविधा में बाधा डालेंगे। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में डेटा खर्च और नेटवर्क अस्थिरता पहले ही बड़ी समस्या है, और नए निर्देश यूजर्स के लिए चीजें और मुश्किल बना देंगे।
DoT ने सभी टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफायर यूजर एंटिटी (TIUEs) से 120 दिनों में अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा है। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में भारत में सभी प्रमुख मैसेजिंग ऐप्स की कार्यप्रणाली बदलने वाली है। सुरक्षा मजबूत होगी, लेकिन डिजिटल आदतों, बिज़नेस कामकाज और यूजर अनुभव में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। अब यह देखना होगा कि कंपनियां इन नियमों को कैसे लागू करती हैं और उपयोगकर्ताओं के लिए संतुलित समाधान कैसे निकालती हैं।