नई दिल्ली। गिग वर्क को लेकर चल रही बहस के बीच Zomato के संस्थापक और CEO दीपिंदर गोयल ने कंपनी के डिलीवरी पार्टनर मॉडल का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने कहा कि Zomato का गिग वर्क मॉडल न सिर्फ लचीला है, बल्कि यह भरोसेमंद आय, सुरक्षा और जरूरी सुविधाएं भी प्रदान करता है। गोयल ने एक विस्तृत बयान में डिलीवरी पार्टनरों की कमाई, काम के घंटे, 10 मिनट डिलीवरी को लेकर उठी चिंताओं और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर साफ़ आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी।
10.9% बढ़ी डिलीवरी पार्टनरों की कमाई
दीपिंदर गोयल के अनुसार, साल 2025 में Zomato के डिलीवरी पार्टनरों की औसत कमाई ₹102 प्रति घंटा रही, जो 2024 की तुलना में 10.9% ज्यादा है। यह आंकड़ा टिप्स को छोड़कर बताया गया है। अगर कोई पार्टनर रोजाना 10 घंटे और महीने में 26 दिन काम करता है, तो उसकी कुल मासिक कमाई लगभग ₹26,500 तक पहुंच सकती है। ईंधन और वाहन रखरखाव जैसे खर्च निकालने के बाद भी करीब ₹21,000 की नेट इनकम बचती है।
गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्राहकों द्वारा दी गई टिप्स का 100% हिस्सा डिलीवरी पार्टनर को ही मिलता है। 2025 में यह औसतन ₹2.6 प्रति घंटा रही। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े सिर्फ पीक ऑवर्स नहीं, बल्कि पूरे लॉग-इन समय को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, ताकि कमाई की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।
फुल टाइम नहीं, साइड इनकम का विकल्प
Zomato CEO ने कहा कि गिग वर्क को फुल टाइम नौकरी की तरह देखना सही नहीं है। 2025 में औसतन एक डिलीवरी पार्टनर साल में सिर्फ 38 दिन और हर दिन करीब 7 घंटे ही काम करता था। बहुत कम पार्टनर ऐसे हैं जो 250 दिन से ज्यादा काम करते हैं। उन्होंने बताया कि यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। पार्टनर अपनी सुविधा के हिसाब से दिन, समय और इलाके का चुनाव कर सकते हैं। इसी वजह से गिग वर्क लाखों लोगों के लिए साइड इनकम का भरोसेमंद जरिया बन चुका है।
10 मिनट डिलीवरी से सुरक्षा पर दबाव नहीं
10 मिनट डिलीवरी को लेकर यह आरोप लगाया जाता रहा है कि इससे डिलीवरी पार्टनरों पर तेज़ गाड़ी चलाने का दबाव पड़ता है। इस पर गोयल ने साफ कहा कि ऐप में कहीं भी कोई काउंटडाउन या टाइमर नहीं दिखाया जाता। उन्होंने बताया कि तेज़ डिलीवरी इसलिए संभव हो पाती है क्योंकि स्टोर और ग्राहक के बीच दूरी कम होती है। Blinkit के मामले में औसत डिलीवरी दूरी करीब 2 किलोमीटर रही, जिसे सामान्य ट्रैफिक में भी 8 मिनट में पूरा किया जा सकता है।
बीमा और सामाजिक सुरक्षा पर ₹100 करोड़ से ज्यादा खर्च
डिलीवरी पार्टनरों की सुरक्षा को लेकर Zomato और Blinkit ने 2025 में ₹100 करोड़ से अधिक का निवेश किया है। इस बीमा कवरेज में दुर्घटना बीमा, मेडिकल खर्च, वेतन हानि और मातृत्व लाभ जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अलावा कंपनी ने कई अन्य पहलें भी शुरू की हैं, जैसे –
- महिला डिलीवरी पार्टनरों को महीने में 2 पेड छुट्टियां
- 95,000 कर्मचारियों के लिए इनकम टैक्स फाइलिंग में सहायता
- 54,000 गिग वर्कर्स के लिए गिग-फ्रेंडली राष्ट्रीय पेंशन योजना
- दुर्घटना, वाहन खराबी या चोरी की स्थिति में SOS इमरजेंसी सपोर्ट
राजनीतिक विवाद पर भी दी प्रतिक्रिया
गिग वर्क को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत की एक पोस्ट साझा की। इसमें बताया गया कि भारत की गिग इकोनॉमी 7.7 मिलियन से बढ़कर 2030 तक 23.5 मिलियन नौकरियों तक पहुंच सकती है। यह बयान आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा की आलोचना के जवाब में आया है, जिन्होंने गिग वर्क को शोषणकारी बताया था। गोयल ने चेतावनी दी कि अगर गिग और क्विक-कॉमर्स सेक्टर को राजनीति का मुद्दा बनाया गया, तो इससे रोजगार के अवसरों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
रोजगार सृजन का बड़ा इंजन
दीपिंदर गोयल ने कहा कि भारत में गिग और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म आज देश के सबसे बड़े रोजगार सृजन के इंजनों में से एक हैं। अगर इनकी रफ्तार थमी, तो लाखों लोग फिर से असुरक्षित और अनौपचारिक नौकरियों की ओर धकेले जा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुधार और संवाद जरूरी हैं, लेकिन ऐसे मॉडल को कमजोर करना समाधान नहीं है, जो लाखों लोगों को आय और लचीलापन दे रहा है।