भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए रजिस्ट्रेशन और केवाईसी प्रक्रिया को आसान बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसका उद्देश्य विदेशी निवेशकों को भारतीय शेयर बाजार में निवेश शुरू करने के लिए तेज, सरल और पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया उपलब्ध कराना है।
सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया के सालाना सम्मेलन में बताया कि दोनों नियामक इस दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं। कुछ देशों के विदेशी निवेशकों का रजिस्ट्रेशन पांच कार्यदिवस में पूरा करने का सफल परीक्षण भी किया गया है।
पांच कार्य-दिवस में रजिस्ट्रेशन का सफल परीक्षण
सेबी ने कस्टोडियन और डिपॉजिटरी की मदद से कुछ देशों के एफपीआई का रजिस्ट्रेशन पांच कार्यदिवस में पूरा करने का परीक्षण किया है। इसके साथ ही दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाया जा रहा है। अब विदेशी निवेशक हाथ से हस्ताक्षर किए गए दस्तावेजों की जगह डिजिटल हस्ताक्षर वाले दस्तावेज जमा कर सकते हैं।
पहले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के बाद अपोस्टिल या नोटरी से प्रमाणन कराना जरूरी होता था। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए एनएसडीएल की वेबसाइट में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा एफपीआई के लिए ‘इंडिया मार्केट एक्सेस’ पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां रजिस्ट्रेशन की शर्तें, जरूरी दस्तावेज और अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की जानकारी उपलब्ध है।
केवाईसी और दस्तावेज जमा करना होगा आसान
सेबी और आरबीआई विदेशी निवेशकों की केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी काम कर रहे हैं। आरबीआई ने विदेशी वाणिज्यिक बैंकों की संबंधित शाखाओं को दस्तावेज प्रमाणित करने की अनुमति दी है। इसके अलावा दस्तावेज अपलोड करने के लिए स्विफ्ट प्रणाली के इस्तेमाल की संभावना भी तलाश की जा रही है।
वहीं, सेबी एक्सचेंजों पर बॉन्ड सूचकांक शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। इस संबंध में आरबीआई ने दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार कर सुझाव मांगे हैं।
पोर्टफोलियो मैनेजमेंट की संपत्ति 9.2 लाख करोड़ रुपये
सेबी चेयरमैन के मुताबिक, अगस्त 2026 तक पोर्टफोलियो मैनेजरों के प्रबंधन वाली संपत्ति (AUM) करीब 9.2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई है। इसमें पीएफ और ईपीएफओ की संपत्तियां शामिल नहीं हैं। वित्त वर्ष 2015-16 के अंत में यह आंकड़ा 1.4 लाख करोड़ रुपये था। इस दौरान इसमें सालाना करीब 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
देश में पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजरों की संख्या 530 से अधिक हो गई है, जबकि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सेवाओं के ग्राहकों की संख्या करीब 2.2 लाख पहुंच गई है।
पीएमएस के नए ढांचे में मिलेंगे निवेश के विकल्प
सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) के लिए नया ढांचा तैयार किया है। इसका उद्देश्य निवेश के विकल्प बढ़ाना और नियमों के अनुपालन को आसान बनाना है।
इसमें ‘प्रिम’ व्यवस्था शामिल की गई है, जिसके तहत पोर्टफोलियो मैनेजर म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट योजनाओं में निवेश कर सकेंगे। इनमें एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF), इंडेक्स फंड और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) शामिल हैं। इसके लिए न्यूनतम निवेश राशि 25 लाख रुपये तय की गई है। नए ढांचे में स्वतंत्र फंड मैनेजरों की व्यवस्था भी शामिल है।
निवेशकों की जोखिम क्षमता समझना जरूरी
तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि सिर्फ न्यूनतम निवेश की पात्रता पूरी करने से यह तय नहीं होता कि कोई निवेश रणनीति ग्राहक के लिए उपयुक्त है। पोर्टफोलियो मैनेजरों को निवेशकों की जरूरत, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को समझना चाहिए।
उन्होंने निवेश के प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े पारदर्शी तरीके से पेश करने पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, रिटर्न के साथ निवेश में उठाए गए जोखिम, सही बेंचमार्क, पोर्टफोलियो में किसी एक शेयर या क्षेत्र पर निर्भरता और अधिकतम गिरावट की जानकारी भी निवेशकों को दी जानी चाहिए।