लंबी अवधि के निवेश के लिए इक्विटी हमेशा बेहतर रिटर्न देने वाली परिसंपत्ति साबित हो, यह जरूरी नहीं है। लार्जकैप म्यूचुअल फंड इसका उदाहरण बनकर सामने आए हैं। सितंबर 2024 के बाद शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और हाल के महीनों में लार्जकैप शेयरों में आई गिरावट का असर इन फंडों के पांच साल के प्रदर्शन पर पड़ा है।
आंकड़ों के मुताबिक, ज्यादातर एक्टिव लार्जकैप म्यूचुअल फंड का पांच साल का सालाना रिटर्न 7.5 फीसदी से नीचे है। इनका औसत रिटर्न करीब 7.1 फीसदी सीएजीआर रहा है, जो बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी कम जोखिम वाली निवेश योजनाओं की ब्याज दर के आसपास है। वहीं, निफ्टी 50 और निफ्टी 100 जैसे इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंडों ने लगभग 6.5 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न दिया है।
एफपीआई की बिकवाली से लार्जकैप शेयरों पर दबाव
पिछले करीब दो वर्षों से भारतीय शेयर बाजार, खासकर लार्जकैप शेयरों पर दबाव बना हुआ है। इसकी प्रमुख वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली रही है। महंगे वैल्यूएशन, कंपनियों की अपेक्षाकृत कमजोर आय वृद्धि और दूसरे बाजारों में निवेश के बेहतर अवसरों के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पूंजी निकाली है।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। पिछले आठ हफ्तों में बिकवाली का दबाव और बढ़ा है।
स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों का रिटर्न ज्यादा
लार्जकैप फंडों के कमजोर प्रदर्शन का असर दूसरी कैटेगरी के मुकाबले उनके रिटर्न पर भी दिखाई दे रहा है। पांच साल के आंकड़ों के अनुसार, स्मॉलकैप फंडों का औसत सालाना रिटर्न 14.6 फीसदी और मिडकैप फंडों का 13.3 फीसदी रहा है। इसके मुकाबले लार्जकैप फंडों का औसत रिटर्न 7.1 फीसदी रहा।
रिटर्न में इस अंतर के कारण निवेशकों का रुझान मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों की तरफ बढ़ा है। अगस्त में स्मॉलकैप फंडों में करीब 8,000 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जुलाई और अगस्त के दौरान लार्जकैप फंडों से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी दर्ज की गई।
एसएमआईडी फंडों में बढ़ा निवेश
इलारा कैपिटल की अगस्त के फंड आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक, स्मॉल और मिडकैप यानी एसएमआईडी फंडों में अब कुल निवेश का करीब 50 से 55 फीसदी हिस्सा आ रहा है। यह स्थिति आखिरी बार 2024 में देखने को मिली थी।
रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू निवेशक इक्विटी में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ ज्यादा रिटर्न देने वाले शेयरों की ओर भी रुख कर रहे हैं। वहीं, कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने 29 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में कहा कि ऊंची तेल कीमतों और भारत की मैक्रो इकोनॉमी से जुड़े जोखिमों के कारण विदेशी निवेशकों की लार्जकैप शेयरों में दिलचस्पी कम हुई है। घरेलू निवेश में तेजी के पीछे रिटेल निवेशकों की पिछला रिटर्न देखकर निवेश करने की प्रवृत्ति भी एक वजह है।
पश्चिम एशिया युद्ध खत्म होने पर लौट सकती है तेजी
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में युद्ध का समाधान होने पर लार्जकैप शेयरों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज के मुताबिक, युद्ध खत्म होने से लार्जकैप शेयरों को लेकर निवेशकों की धारणा में बदलाव आ सकता है। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों में मौजूदा उत्साह के आगे भी बने रहने की गारंटी नहीं है।