कच्चे सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क घटाकर शून्य किए जाने के बाद अगले मार्केटिंग सीजन में इसके आयात में बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद है। इससे घरेलू बाजार में सूरजमुखी तेल की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों में नरमी आने की संभावना है। साथ ही, खाद्य तेलों के बाजार में सोयाबीन तेल की हिस्सेदारी पर भी इसका असर पड़ सकता है।
35 लाख टन तक पहुंच सकता है आयात
केंद्र सरकार ने कच्चे सूरजमुखी तेल पर मूल आयात शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 32.5 प्रतिशत से घटाकर 22.5 प्रतिशत किया गया है।
खाद्य तेल उद्योग संस्था सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, शुल्क में कटौती से 2026-27 के मार्केटिंग सीजन में सूरजमुखी तेल का आयात करीब 25 से 30 प्रतिशत बढ़कर लगभग 35 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है।
सोयाबीन तेल के आयात में कमी
क्रूड सूरजमुखी तेल पर शुल्क लगभग समाप्त होने से इसका आयात अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। घरेलू बाजार में कीमतें कम होने पर इसकी मांग बढ़ने की संभावना है। इसका सीधा असर सोयाबीन तेल पर पड़ सकता है।
उद्योग अनुमानों के मुताबिक, 2026-27 में सोयाबीन तेल का आयात करीब 10.7 प्रतिशत घटकर लगभग 50 लाख टन रह सकता है। उपभोक्ताओं को सूरजमुखी तेल अपेक्षाकृत आकर्षक कीमत पर उपलब्ध होने से दोनों तेलों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
पाम तेल का आयात रहेगा स्थिर
पाम तेल के आयात में अगले सीजन में बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। अनुमान है कि भारत करीब 80 लाख टन पाम तेल का आयात कर सकता है। हालांकि इंडोनेशिया में बायोडीजल की बढ़ती मांग और मौसम संबंधी जोखिमों के कारण वैश्विक स्तर पर पाम तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारत अपनी वनस्पति तेल की करीब दो-तिहाई जरूरत आयात से पूरी करता है। 2026-27 में कुल वनस्पति तेल आयात लगभग 1.65 से 1.70 करोड़ टन रहने का अनुमान है।
उपभोक्ताओं को मिल सकता है फायदा
सूरजमुखी तेल की उपलब्धता बढ़ने से घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव बन सकता है। सोयाबीन तेल की मांग घटने पर उसकी कीमतों में भी नरमी संभव है। ऐसे में उपभोक्ताओं को खाद्य तेल के रूप में अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
हालांकि आयात बढ़ने से घरेलू तिलहन किसानों पर दबाव की आशंका भी है। कमजोर मानसून और मौसम संबंधी जोखिमों से सोयाबीन, मूंगफली और अन्य तिलहन फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार के लिए उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर तेल उपलब्ध कराने के साथ किसानों के हितों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा।
सरकार के सामने संतुलन की चुनौती
आने वाले सीजन में सूरजमुखी तेल का बढ़ता आयात खाद्य तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। सरकार को वैश्विक कीमतों, घरेलू उत्पादन, आयात और मांग की लगातार निगरानी करते हुए ऐसी नीति बनानी होगी, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ घरेलू तिलहन क्षेत्र भी सुरक्षित रहे।