सितंबर 2026 में भारतीय वाहन उद्योग के लिए मांग का रुझान मजबूत रहा। कारों, दोपहिया, तिपहिया और व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, सबसे तेज वृद्धि इलेक्ट्रिक वाहनों में देखने को मिली। इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री करीब 89 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री लगभग 94 प्रतिशत बढ़ी। इसके बावजूद सभी कंपनियों को इस तेजी का समान फायदा नहीं मिला।
कुल वाहन बिक्री में 31.7% की बढ़ोतरी
चॉइस ब्रोकिंग की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में कुल खुदरा वाहन बिक्री पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 31.7 प्रतिशत बढ़ी। दोपहिया बिक्री में 33.1 प्रतिशत, यात्री वाहनों में 32.4 प्रतिशत और व्यावसायिक वाहनों में 38.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। तिपहिया और ट्रैक्टर बिक्री क्रमशः 22.2 प्रतिशत और 13.9 प्रतिशत बढ़ी।
कम बिक्री आधार, नए मॉडल, ग्राहकों के बेहतर भरोसे और अपेक्षाकृत नरम ब्याज दरों ने मांग को सहारा दिया। जीएसटी दरों में बदलाव से भी वाहन खरीद की लागत पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद बनी।
इलेक्ट्रिक दोपहिया में TVS और Bajaj की बढ़त
सितंबर में इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री 88.5 प्रतिशत बढ़ी और पंजीकरण करीब 2.07 लाख के रिकॉर्ड मासिक स्तर पर पहुंच गए। टीवीएस की इलेक्ट्रिक दोपहिया बिक्री 125.6 प्रतिशत बढ़ी। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 21.8 प्रतिशत से बढ़कर 26.1 प्रतिशत हो गई।
बजाज की इलेक्ट्रिक दोपहिया बिक्री में 138.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और उसकी हिस्सेदारी 18.5 प्रतिशत से बढ़कर 23.4 प्रतिशत हो गई। वहीं एथर और हीरो मोटोकॉर्प की बिक्री बढ़ने के बावजूद बाजार हिस्सेदारी में कमी आई।
ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री 2.9 प्रतिशत घट गई। उसकी बाजार हिस्सेदारी सितंबर 2025 के 12.6 प्रतिशत से घटकर 6.5 प्रतिशत रह गई। इससे इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज होने का संकेत मिलता है।
इलेक्ट्रिक कारों में Tata Motors आगे
इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री सितंबर में 93.8 प्रतिशत बढ़कर करीब 36,000 पंजीकरण के नए मासिक स्तर पर पहुंची। चॉइस के आंकड़ों में टाटा मोटर्स की बाजार हिस्सेदारी 39.7 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई। महिंद्रा की हिस्सेदारी भी मामूली बढ़ी।
दूसरी ओर, एमजी की हिस्सेदारी 25.9 प्रतिशत से घटकर 14.5 प्रतिशत रही। मारुति ने सितंबर में 1,095 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे और उसकी हिस्सेदारी करीब 3 प्रतिशत रही।
ट्रकों की मांग मजबूत, ग्रामीण बाजार चुनौती
व्यावसायिक वाहनों की मांग भी मजबूत रही। सितंबर में घरेलू थोक बिक्री सालाना आधार पर करीब 28 प्रतिशत बढ़ी। टाटा के भारी व्यावसायिक वाहनों और अशोक लेलैंड के घरेलू मध्यम एवं भारी ट्रकों की बिक्री में करीब 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इसके विपरीत, दोपहिया और ट्रैक्टर बाजार में आगे चुनौतियां बनी रह सकती हैं। पिछले साल का ऊंचा बिक्री आधार, ग्रामीण मांग, कमजोर मानसून और बढ़ती लागत इन क्षेत्रों पर दबाव डाल सकते हैं।
EV चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार
भारत में सार्वजनिक चार्जिंग केंद्रों की संख्या 2022 के 5,151 से बढ़कर 2026 के मध्य तक 52,718 हो गई। इसके बावजूद चार्जर की उपलब्धता, अलग-अलग नेटवर्क, चार्जिंग लागत और घर पर चार्जर लगाने जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
सितंबर के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ऑटो बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। अब सबसे अहम सवाल यह है कि त्योहारी सीजन में यह मांग कितनी टिकती है और कंपनियों की बिक्री वृद्धि मुनाफे में कितनी बदलती है।