बीमा सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में हालिया तेज गिरावट ने म्युचुअल फंड निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऑनलाइन इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूटर्स PB Fintech और Turtlemint के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसकी प्रमुख वजह भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की ओर से डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव माना जा रहा है।
PB Fintech में 36% तक गिरावट
IRDAI के प्रस्ताव के बाद PB Fintech के शेयर एक कारोबारी दिन में करीब 36 प्रतिशत तक टूट गए। यह कंपनी के शेयर में अब तक की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट बताई गई। Turtlemint के शेयर भी करीब 20 प्रतिशत तक नीचे आए।
24 और 25 सितंबर की गिरावट के बाद PB Fintech में म्युचुअल फंड्स की होल्डिंग की बाजार कीमत करीब 11,000 करोड़ रुपये घट गई। प्राइम डेटाबेस के अनुसार, अगस्त के अंत तक म्युचुअल फंड्स के पास कंपनी के करीब 15.15 करोड़ शेयर थे।
घबराकर निवेश बेचने से बचें
तेज गिरावट के बीच निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। मार्केट एक्सपर्ट अजीत गोस्वामी के अनुसार, केवल एक-दो दिन की गिरावट के आधार पर पूरे बीमा सेक्टर को लेकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
अविसा वेल्थ क्रिएटर्स के CIO और CFA आदित्य अग्रवाल के मुताबिक, मौजूदा निवेशकों को भी सिर्फ बाजार की गिरावट देखकर निवेश बेचने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। हालांकि, निवेश का फैसला व्यक्ति की जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि के अनुरूप होना चाहिए।
डिस्ट्रीब्यूटर्स पर ज्यादा असर संभव
IRDAI के प्रस्ताव का प्रभाव बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर एक जैसा नहीं होगा। कमीशन पर अधिक निर्भर डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमाई मॉडल पर सीधा दबाव पड़ सकता है। बीमा कंपनियों पर भी शुरुआती स्तर पर डिस्ट्रीब्यूशन और ग्राहक जोड़ने की लागत प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, IRDAI का प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है। कंसल्टेशन प्रक्रिया के बाद कमीशन की सीमा, खर्च की व्यवस्था और नियम लागू होने की समयसीमा में बदलाव संभव है। इसलिए मौजूदा शेयर बाजार प्रतिक्रिया को सेक्टर के दीर्घकालिक प्रदर्शन का अंतिम संकेत नहीं माना जा सकता।
बीमा बाजार में अभी बड़ा अवसर
भारतीय बीमा उद्योग का आकार लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में उद्योग ने करीब 11.93 लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम जुटाया। मार्च 2025 के अंत तक बीमा उद्योग का एसेट अंडर मैनेजमेंट करीब 74.4 लाख करोड़ रुपये था।
इसके बावजूद भारत में बीमा की पहुंच अभी सीमित है। वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा पैठ GDP के करीब 3.7 प्रतिशत पर रही। इससे हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और प्रोटेक्शन प्रोडक्ट्स में भविष्य की संभावनाएं बनी हुई हैं।
निवेशकों को कंपनी पर ध्यान देना होगा
विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशकों को पूरे बीमा सेक्टर को एक जैसा नहीं देखना चाहिए। लाइफ, हेल्थ और जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के कारोबार और मार्जिन अलग-अलग होते हैं। प्रीमियम बढ़ना हमेशा मुनाफे में बढ़ोतरी में नहीं बदलता। क्लेम, ग्राहक जोड़ने की लागत और प्रोडक्ट मिक्स भी कमाई पर असर डालते हैं।
ऐसे में बीमा शेयरों में हालिया गिरावट के बाद निवेशकों के लिए कंपनी के बिजनेस मॉडल, वैल्यूएशन, नियामकीय बदलाव और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। केवल शेयर की तेज गिरावट को खरीदारी का संकेत मानना उचित नहीं होगा।