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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एग्रीकल्चर > ऊधम सिंह नगर में बारिश और ओलावृष्टि से धान की फसल बर्बाद, किसानों पर 7 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ
एग्रीकल्चर

ऊधम सिंह नगर में बारिश और ओलावृष्टि से धान की फसल बर्बाद, किसानों पर 7 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ

Last updated: 11/10/2026 5:49 PM
By
Manu Tiwari
ByManu Tiwari
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ऊधम सिंह नगर में आंधी और बारिश से खेतों में गिरी धान की फसल
बारिश और ओलावृष्टि से 6,950 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित, किसानों ने मुआवजे की मांग की।
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ऊधम सिंह नगर: उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में धान की फसल गिरने से न केवल पैदावार प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि कटाई और मड़ाई का खर्च भी कई गुना बढ़ सकता है। तहसील प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में करीब 6,950 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित हुई है। इनमें 19 गांव ऐसे हैं, जहां फसल को शत-प्रतिशत नुकसान होने की बात सामने आई है।

प्राकृतिक आपदा से परेशान किसानों ने सरकार से वास्तविक नुकसान का निष्पक्ष सर्वे कराने, उचित मुआवजा देने और कटाई-मड़ाई के लिए विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

धान की कटाई का खर्च दोगुने से ज्यादा होने की आशंका

तराई क्षेत्र में किसान सामान्य तौर पर धान की कटाई के लिए कंबाइन और हार्वेस्टर मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। इन मशीनों से एक हेक्टेयर में कटाई का खर्च करीब 7,000 से 8,000 रुपये आता है। लेकिन बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में फसल जमीन पर बिछ गई है। ऐसे में मशीनों से कटाई करना मुश्किल हो गया है।

किसानों को अब मजदूरों की मदद से फसल कटवानी पड़ सकती है। अनुमान के मुताबिक, एक हेक्टेयर में धान की कटाई के लिए करीब 25 मजदूरों की जरूरत होगी। इस पर लगभग 12,500 रुपये खर्च होंगे। इसके बाद थ्रेसर से मड़ाई कराने में करीब 5,000 रुपये अतिरिक्त लग सकते हैं।

इस तरह कटाई और मड़ाई की कुल लागत लगभग 17,500 रुपये प्रति हेक्टेयर पहुंचने का अनुमान है। सामान्य मशीन से कटाई की तुलना में किसानों को करीब 9,000 से 10,000 रुपये अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

किसानों पर सात करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ

प्रभावित क्षेत्र में बढ़ी हुई कटाई लागत के कारण किसानों पर सामूहिक रूप से करीब सात करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने का अनुमान है। इसके अलावा, खेतों में पानी भरने और फसल के जमीन पर गिरने से कटाई में देरी हो सकती है।

समय पर कटाई नहीं होने से धान की गुणवत्ता और पैदावार पर भी असर पड़ने की आशंका है। वहीं, मजदूरों की कमी किसानों की परेशानी और बढ़ा सकती है। ऐसे में किसानों को एक ओर फसल से कम आमदनी मिलने का डर है, तो दूसरी ओर कटाई-मड़ाई पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

किसानों ने सरकार से मांगा मुआवजा

किसान जोरावर सिंह भुल्लर ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। सरकार को वास्तविक क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा देना चाहिए। साथ ही, कटाई-मड़ाई के बढ़े खर्च के लिए विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।

किसान सतवंत सिंह पड्डा ने प्रभावित किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। वहीं, किसान राणा इंदरपाल सिंह के अनुसार, कटाई में देरी से धान की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए किसानों को तत्काल राहत मिलनी चाहिए।

किसानों ने प्रशासन से गांव-गांव जाकर निष्पक्ष सर्वे कराने की अपील की है, ताकि कोई भी प्रभावित किसान सहायता से वंचित न रहे। अब किसानों की निगाहें सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

TAGGED:agriculture newsFarmer ProtestFarmers CompensationindustrialempirePaddy Crop DamageRain DamageUdham Singh NagarUttarakhand News
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