नेस्ले इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की आय और मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद शेयर बाजार में नेस्ले इंडिया के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान शेयर 7 फीसदी से ज्यादा टूटकर 1,259 रुपये तक पहुंच गया। बाजार में इस गिरावट के पीछे खाद्य महंगाई और चीनी जैसी प्रमुख कच्ची सामग्रियों की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताएं बताई जा रही हैं।
नेस्ले इंडिया की आय और मुनाफे में कितनी बढ़ोतरी?
सितंबर तिमाही में नेस्ले इंडिया की कुल आय बढ़कर 6,808 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 5,649 करोड़ रुपये की आय दर्ज की थी। इस तरह कंपनी की आय में सालाना आधार पर करीब 20.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) 753.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,026.7 करोड़ रुपये पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 36 फीसदी से अधिक की वृद्धि है।
मजबूत वित्तीय नतीजों के बावजूद शेयरों में बिकवाली ने निवेशकों का ध्यान खींचा। खबर लिखे जाने तक शेयर करीब 5 फीसदी की गिरावट के साथ 1,317 रुपये पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान इसमें इससे भी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
मजबूत नतीजों के बाद भी क्यों गिरे शेयर?
कंपनी के अच्छे नतीजों के बावजूद शेयर में गिरावट की एक प्रमुख वजह खाद्य महंगाई को लेकर चिंता है। चीनी जैसी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से एफएमसीजी कंपनियों की उत्पादन लागत पर दबाव पड़ सकता है। इससे आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मीठे स्नैक्स और बिस्कुट जैसे उत्पादों पर अधिक निर्भर कंपनियों को बढ़ती चीनी कीमतों का ज्यादा सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, नेस्ले का उत्पाद पोर्टफोलियो विविध है, जिससे कंपनी को लागत में उतार-चढ़ाव का सामना करने में कुछ मदद मिल सकती है।
कंपनी ने कारोबार को लेकर क्या कहा?
नेस्ले इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनीष तिवारी के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कंपनी के सभी उत्पाद समूहों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई। कंपनी की बिक्री में दोहरे अंकों की मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ का योगदान रहा।
उन्होंने बताया कि कंपनी ने ब्रांड और मार्केटिंग पर निवेश बढ़ाने के साथ परिचालन दक्षता सुधारने पर भी ध्यान दिया। विज्ञापन एवं मार्केटिंग खर्च में 46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि EBITDA मार्जिन 23.8 फीसदी रहा।
कंपनी ने ई-कॉमर्स और पारंपरिक खुदरा कारोबार में भी मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण बाजारों में मांग से कारोबार को समर्थन मिला।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
आने वाले समय में निवेशकों की नजर खाद्य महंगाई, कच्चे माल की लागत, कंपनी के मार्जिन और बिक्री की रफ्तार पर रहेगी। मजबूत तिमाही नतीजे कंपनी के कारोबार की सकारात्मक तस्वीर दिखाते हैं, लेकिन बढ़ती लागत भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए निवेशकों के लिए केवल मुनाफे में बढ़ोतरी के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी की लागत, मूल्यांकन और आगे की कारोबारी संभावनाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।