लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गोबर और गोमूत्र से बने उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश के सभी 75 जिलों में पंचगव्य उत्पादों के आउटलेट खोलने की योजना बनाई गई है। इन दुकानों के जरिए पारंपरिक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ गोपालकों, किसानों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
प्रस्तावित आउटलेट पर दूध, दही और घी जैसे उत्पादों के अलावा जैविक खाद, धूपबत्ती, अगरबत्ती, हवन सामग्री, दीये और गोबर से बने सजावटी सामान भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे गोवंश से प्राप्त संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने की उम्मीद है।
दूध-घी से लेकर हवन सामग्री तक मिलेगी
पंचगव्य उत्पादों में गाय से प्राप्त पांच प्रमुख पदार्थों दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर को पारंपरिक रूप से महत्व दिया जाता है। इनसे जुड़े विभिन्न उत्पाद धार्मिक उपयोग, जैविक खेती और घरेलू जरूरतों के लिए तैयार किए जाते हैं।
प्रस्तावित आउटलेट पर गोबर से बनी जैविक खाद, पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली हवन सामग्री, धूपबत्ती और अगरबत्ती जैसे उत्पादों को जगह मिल सकती है। इसके अलावा गोबर से तैयार दीये और सजावटी वस्तुएं भी ग्राहकों के लिए उपलब्ध हो सकती हैं।
त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान इन उत्पादों की मांग को देखते हुए ऐसे आउटलेट स्थानीय निर्माताओं के लिए बिक्री का एक अतिरिक्त माध्यम बन सकते हैं।
गोपालकों और ग्रामीण उद्यमियों को मिलेगा अवसर
इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य गोपालकों और ग्रामीण उद्यमियों को उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग गोबर से खाद, पूजा सामग्री और सजावटी सामान तैयार करते हैं, लेकिन उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए पर्याप्त बाजार नहीं मिल पाता।
जिला स्तर पर आउटलेट स्थापित होने से ऐसे उत्पादकों को अपने सामान की बिक्री के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार को बढ़ावा देने और स्वरोजगार की संभावनाएं विकसित करने में मदद मिल सकती है।
यदि उत्पादों की गुणवत्ता, उचित मूल्य और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होती है, तो ये आउटलेट ग्रामीण उत्पादों को व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जैविक खेती और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा
गोबर से तैयार जैविक खाद का इस्तेमाल खेती में किया जाता है। वहीं, गोबर आधारित अन्य उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकते हैं। ऐसे उत्पादों को संगठित बाजार मिलने से उनके उत्पादन, पैकेजिंग और बिक्री से जुड़े छोटे कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आउटलेट कब तक खुलते हैं, उत्पादों की उपलब्धता कैसी रहती है और उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए क्या व्यवस्था बनाई जाती है।
फिलहाल, उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में पंचगव्य उत्पादों के आउटलेट खोलने की योजना से ग्रामीण कारोबार और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अब नजर इसके क्रियान्वयन और बाजार में मिलने वाले परिणामों पर रहेगी।