पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड के ‘100% होल व्हीट ब्रेड’ के प्रचार को भ्रामक मानते हुए कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। नियामक ने कंपनी को संबंधित विज्ञापन सभी माध्यमों से हटाने और आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है।
यह कार्रवाई उन खाद्य कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो अपने उत्पादों को स्वास्थ्यवर्धक बताने के लिए विज्ञापनों में बड़े-बड़े दावे करती हैं। मामले में प्राधिकरण ने इस बात पर जोर दिया कि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक सामग्री के बारे में स्पष्ट और सही जानकारी मिलनी चाहिए।
ब्रेड में गेहूं के आटे की मात्रा पर उठा सवाल
प्राधिकरण की जांच के अनुसार, ब्रिटानिया अपने एक ब्रेड उत्पाद का प्रचार ‘100% होल व्हीट’ के रूप में कर रही थी। हालांकि, उत्पाद के पैकेट पर दी गई सामग्री की जानकारी में गेहूं के आटे की मात्रा 62 प्रतिशत बताई गई थी। शेष हिस्से में राइस ब्रान और अन्य सामग्री शामिल थी।
सीसीपीए ने माना कि उत्पाद के नाम और विज्ञापन में 100 प्रतिशत का इस्तेमाल उपभोक्ताओं के मन में यह धारणा पैदा कर सकता है कि ब्रेड पूरी तरह गेहूं से बनी है। इस तरह का दावा उत्पाद की वास्तविक संरचना से मेल नहीं खाता, इसलिए इसे भ्रामक विज्ञापन माना गया।
कंपनी की दलील क्यों नहीं मानी गई?
जांच के दौरान कंपनी ने स्वीकार किया कि संबंधित ब्रेड में गेहूं के आटे की मात्रा 62 प्रतिशत थी। कंपनी की ओर से दलील दी गई कि विज्ञापन में 100 प्रतिशत शब्द का इस्तेमाल उत्पाद की पौष्टिकता को दर्शाने के उद्देश्य से किया गया था।
हालांकि, प्राधिकरण ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। नियामक के अनुसार, जब किसी उत्पाद के प्रचार में सटीक संख्यात्मक दावा किया जाता है, तो उपभोक्ता उसे वास्तविक तथ्य के रूप में समझ सकते हैं। इसलिए विज्ञापन की भाषा ऐसी होनी चाहिए, जो उत्पाद की विशेषताओं को लेकर गलत धारणा न बनाए।
उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई
सीसीपीए ने इस मामले में खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 तथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों को ध्यान में रखा। प्राधिकरण ने विज्ञापन को भ्रामक और अनुचित व्यापार व्यवहार से जुड़ा मामला माना।
आदेश के तहत कंपनी को संबंधित विज्ञापन हटाने, एक लाख रुपये का जुर्माना भरने और 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
खाद्य कंपनियों के लिए क्या है संदेश?
यह मामला उपभोक्ताओं के लिए भी एक अहम सीख देता है। किसी खाद्य उत्पाद पर लिखे बड़े दावों के साथ उसकी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना जरूरी है। वहीं, कंपनियों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि उत्पादों का प्रचार करते समय दावों की सटीकता और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। उपभोक्ताओं का भरोसा तभी कायम रह सकता है, जब विज्ञापन में दिखाई गई जानकारी वास्तविक उत्पाद से मेल खाए।