उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए कई अहम फैसले किए हैं। राज्य पशुधन मिशन के तहत अच्छी नस्ल की गाय खरीदने पर 50 फीसदी तक सब्सिडी देने और गरीब परिवारों को मुर्गी पालन के लिए 100 चूजे मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, प्रदेश की प्रमुख नदियों में चलने वाली नावों और स्टीमरों का पंजीकरण अनिवार्य करने का फैसला भी लिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य पशुधन मिशन सहित विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का उद्देश्य पशुपालकों को आर्थिक सहायता देने, ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ाने और जल परिवहन को सुरक्षित बनाना है।
दो गाय खरीदने पर 80 हजार रुपये तक अनुदान
राज्य पशुधन मिशन के तहत साहीवाल, देसी और हरियाणवी जैसी उन्नत नस्लों की गायों को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना के अनुसार, एक गाय खरीदने पर 40 हजार रुपये और दो गाय खरीदने पर अधिकतम 80 हजार रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह के मुताबिक, सब्सिडी का लाभ अधिकतम दो गायों की खरीद पर मिलेगा।
सरकार गायों की नस्ल सुधारने के साथ बकरी, भेड़, सूअर और मुर्गी पालन को भी प्रोत्साहित करेगी। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुर्गी पालन शुरू करने के लिए 100-100 चूजे मुफ्त दिए जाएंगे। इससे ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार का अवसर मिल सकता है।
गाय के बीमा प्रीमियम पर भी राहत
पशुपालकों को आर्थिक जोखिम से बचाने के लिए बीमा प्रीमियम में भी सहायता देने का प्रावधान है। योजना के तहत पशुपालक को बीमा प्रीमियम का केवल 15 फीसदी भुगतान करना होगा, जबकि शेष 85 फीसदी राशि सरकार वहन करेगी। इससे पशुओं की बीमारी या अन्य नुकसान की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है।
पंचायत मतदाता बनने के लिए छह महीने का निवास
मंत्रिपरिषद ने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन को भी मंजूरी दी है। इसके तहत गांव की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए सामान्य निवास की न्यूनतम अवधि छह महीने निर्धारित की गई है।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के ऐसे व्यक्ति का नाम पंचायत मतदाता सूची में दर्ज किया जा सकेगा, जो संबंधित गांव में सामान्य तौर पर कम से कम छह महीने से रह रहा हो। पहले अधिनियम में निवास की कोई न्यूनतम अवधि निर्धारित नहीं थी।
11 प्रमुख नदियों में नावों का पंजीकरण जरूरी
प्रदेश में जल परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए गंगा, यमुना, सरयू और घाघरा समेत 11 प्रमुख नदियों में चलने वाली इंजन चालित नावों, हाथ से चलने वाली नावों और स्टीमरों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली को मंजूरी दी है। इसके तहत इनलैंड वाटर अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष परिवहन मंत्री होंगे। यात्रियों को नहीं ले जाने वाली नावों के लिए पंजीकरण शुल्क 50 रुपये निर्धारित किया गया है।
सरकार के इन फैसलों से पशुपालन, ग्रामीण स्वरोजगार और जल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और संबंधित विभाग के दिशा-निर्देशों की जानकारी लेना जरूरी होगा।