घर खरीदने के लिए होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ बैंक की ब्याज दर देखना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि हर महीने आपकी जेब से कितनी रकम जाएगी और पूरी अवधि में कितना ब्याज चुकाना पड़ सकता है। अगर आप 20 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लेते हैं, तो आपकी EMI बैंक द्वारा दी जाने वाली ब्याज दर पर निर्भर करेगी। ब्याज दर में थोड़ा अंतर भी लंबी अवधि में कुल भुगतान को काफी बदल सकता है।
HDFC बैंक की ब्याज दर से समझें गणित
होम लोन की लागत समझने के लिए HDFC बैंक की उदाहरण के तौर पर बताई गई 8 प्रतिशत से 13.45 प्रतिशत सालाना ब्याज दर की सीमा पर गणना की जा सकती है। ये दरें सभी ग्राहकों के लिए जरूरी नहीं कि लागू हों। वास्तविक ब्याज दर बैंक की मौजूदा नीति और ग्राहक की पात्रता के आधार पर तय होती है।
20 लाख रुपये के लोन और 20 साल यानी 240 महीनों की अवधि के आधार पर अनुमानित EMI इस प्रकार होगी।
20 लाख रुपये के लोन की अनुमानित EMI
सालाना ब्याज दर
मासिक EMI
कुल भुगतान
कुल ब्याज
8%
₹16,729
₹40.15 लाख
₹20.15 लाख
13.45%
₹24,076
₹57.78 लाख
₹37.78 लाख
गणना अनुमानित है। इसमें EMI को निकटतम रुपये तक दर्शाया गया है। प्रोसेसिंग फीस, बीमा और अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं।
इस उदाहरण में ब्याज दर 8 प्रतिशत होने पर हर महीने करीब 16,729 रुपये की किस्त बनेगी। वहीं, 13.45 प्रतिशत की दर पर EMI लगभग 24,076 रुपये हो जाएगी। यानी दोनों दरों के बीच मासिक किस्त में करीब 7,347 रुपये का अंतर है। पूरी 20 साल की अवधि में कुल ब्याज का अंतर लगभग 17.63 लाख रुपये बैठता है।
होम लोन की ब्याज दर किन बातों से तय होती है?
बैंक लोन मंजूर करते समय कई पहलुओं पर विचार करते हैं। इनमें आवेदक की आय, नौकरी या कारोबार की स्थिरता, क्रेडिट स्कोर, मौजूदा कर्ज और भुगतान क्षमता शामिल हैं। इसके अलावा लोन की रकम, अवधि और बैंक की नीतियां भी ब्याज दर को प्रभावित कर सकती हैं।
अच्छा क्रेडिट स्कोर और नियमित आय अनुकूल शर्तें पाने में मदद कर सकते हैं, हालांकि कम ब्याज दर मिलने की गारंटी नहीं होती।
लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
होम लोन चुनने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शर्तों की तुलना करें। यह भी समझें कि ब्याज दर स्थिर है या बदल सकती है। फ्लोटिंग रेट वाले लोन में दर बदलने पर EMI या लोन की अवधि प्रभावित हो सकती है।
साथ ही, घर की डाउन पेमेंट और दूसरे खर्चों के लिए अलग बजट रखें। ऐसी EMI चुनें जिसे चुकाने के बाद भी घरेलू जरूरतों, बचत और आपातकालीन खर्चों के लिए पर्याप्त रकम बची रहे। सही तुलना और बजट के आधार पर लिया गया फैसला लंबे समय में आर्थिक दबाव कम करने में मदद कर सकता है।