केरल में कभी विदेशी फल के रूप में पहचाना जाने वाला रामबूटान (Rambutan) अब किसानों की कमाई का नया जरिया बन रहा है। रबर की खेती में बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव से परेशान किसान अब रामबूटान और ड्रैगन फ्रूट जैसे फलों की खेती अपना रहे हैं। केरल के 65 वर्षीय किसान एमसी साजू ने रामबूटान की खेती से सफलता की नई कहानी लिखी है। वह 6 एकड़ जमीन पर इस फल की खेती करते हैं और सालाना करीब 50 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।
एर्नाकुलम जिले के कूथट्टुकुलम के रहने वाले साजू का मानना है कि रामबूटान आने वाले समय में केरल की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल हो सकता है। इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है और दूसरे राज्यों के बाजारों में भी इसके खरीदार बढ़ रहे हैं।
रबर की खेती से फलों की खेती की ओर रुख
साजू के मुताबिक, 1960 और 1970 के दशक में केरल के किसान मुख्य रूप से धान और काली मिर्च की खेती करते थे। इसके बाद 1980 के दशक में रबर की खेती का चलन बढ़ा। हालांकि, समय के साथ इस खेती की चुनौतियां भी बढ़ने लगीं।
जमीन की बढ़ती कीमतों, रबर के भाव में उतार-चढ़ाव और मजदूरों की कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में युवा पढ़ाई और रोजगार के लिए विदेश चले गए। इससे गांवों में बुजुर्ग किसानों के लिए खेत और बागान संभालना मुश्किल होने लगा। ऐसे में किसानों ने वैकल्पिक फसलों की तलाश शुरू की और रामबूटान एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा।
तीसरे साल से मिलने लगते हैं फल
रामबूटान की खेती की खासियत यह है कि इसके पेड़ों से तीसरे साल से ही फल मिलने शुरू हो जाते हैं। साजू के अनुसार, एक पेड़ से तीसरे साल करीब 30 किलो, चौथे साल 50 किलो और पांचवें साल 70 किलो तक फल मिल सकते हैं। वहीं, 14वें साल तक एक पेड़ से करीब 300 किलो उत्पादन की क्षमता हो सकती है। उनके मुताबिक, एक एकड़ जमीन में 40 फीट की दूरी पर करीब 40 पेड़ लगाए जा सकते हैं। किसान चाहें तो 20 फीट की दूरी पर पौधे लगाकर सघन खेती भी कर सकते हैं।
एक पेड़ से 30 हजार रुपये की कमाई
साजू बताते हैं कि यदि रामबूटान का बाजार भाव 100 रुपये प्रति किलो भी मिले, तो एक परिपक्व पेड़ से करीब 30 हजार रुपये तक की कमाई संभव है। उन्होंने अपनी फसल 140 से 150 रुपये प्रति किलो तक बेची है। उनका दावा है कि रामबूटान की खेती से पारंपरिक रबर की खेती के मुकाबले कई गुना अधिक आमदनी हासिल की जा सकती है। हालांकि, वास्तविक मुनाफा पेड़ों की उम्र, उत्पादन, बाजार भाव और खेती की लागत पर निर्भर करता है।
1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है कारोबार
साजू के अनुमान के मुताबिक, केरल में करीब 25 हजार एकड़ जमीन पर रामबूटान के लगभग 3 करोड़ पेड़ लगाए जा चुके हैं। इस सीजन में करीब एक लाख टन उत्पादन और लगभग 1,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। उनका कहना है कि रामबूटान की मांग करीब 17 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है। केरल के अलावा उत्तर भारत के बाजारों में भी इस फल की लोकप्रियता बढ़ रही है।
किसानों के लिए नया अवसर
साजू का मानना है कि खेती में सफलता के लिए केवल अच्छी फसल चुनना काफी नहीं है। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, बाजार की मांग और उत्पादन लागत को भी समझना चाहिए। रामबूटान की बढ़ती लोकप्रियता यह दिखाती है कि पारंपरिक खेती के साथ नए फलों की खेती भी किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर खोल सकती है।