अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलते हालात का फायदा भारतीय बॉन्ड बाजार को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट के चलते भारतीय सरकारी बॉन्ड में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। इस सप्ताह भारतीय बॉन्ड ने उभरते एशियाई बाजारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। विदेशी निवेशकों की बढ़ती खरीदारी और रुपये में मजबूती ने भी बाजार को सहारा दिया है।
दरअसल, अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों का माहौल बदला है। इससे डॉलर और रुपये के बीच दबाव कुछ कम हुआ है। साथ ही निवेशकों को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को ब्याज दरों में पहले के अनुमान के मुकाबले कम बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
शुक्रवार, 6 नवंबर को सुबह 11:40 बजे भारत के बेंचमार्क 6.94 फीसदी वाले 2036 में मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.1973 फीसदी पर थी। दिन के दौरान इसमें 2.5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई, लेकिन पूरे सप्ताह में यील्ड करीब 22 बेसिस पॉइंट गिर चुकी है। अप्रैल के बाद यह बॉन्ड बाजार का सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। बॉन्ड की यील्ड में गिरावट का सामान्य अर्थ है कि उसकी कीमत में बढ़ोतरी हुई है।
विदेशी निवेशकों ने बढ़ाई खरीदारी
भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। इस सप्ताह विदेशी निवेशकों ने करीब 5,200 करोड़ रुपये के बॉन्ड की शुद्ध खरीदारी की है। जुलाई के बाद किसी एक सप्ताह में यह उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है। वहीं, अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड में करीब 10 बेसिस पॉइंट की गिरावट ने भारतीय बॉन्ड को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाया है।
कच्चे तेल की कीमतों में 15 फीसदी गिरावट
कच्चे तेल की कीमतों में इस सप्ताह करीब 15 फीसदी की गिरावट आई है। अप्रैल 2020 के बाद यह सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट बताई जा रही है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। ऐसे में तेल सस्ता होने से आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। इस सप्ताह रुपया करीब 1 फीसदी मजबूत होकर 94.10 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।
RBI की दरों में बढ़ोतरी का अनुमान घटा
तेल की कीमतों में गिरावट से RBI की ओर से ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका भी कम हुई है। पहले बाजार में कुल 125 बेसिस पॉइंट तक दरें बढ़ने का अनुमान था, जो अब घटकर 50 से 75 बेसिस पॉइंट रह गया है।
इसका असर ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (OIS) बाजार में भी दिखाई दिया है। एक साल की OIS दर 32 बेसिस पॉइंट घटकर 6.40 फीसदी और दो साल की दर 34 बेसिस पॉइंट गिरकर 6.40 फीसदी पर आ गई। इससे साफ है कि बाजार में भविष्य की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बदली हैं। हालांकि, बॉन्ड बाजार में आगे की तेजी काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव में कमी पर निर्भर करेगी।