देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग का फायदा प्राइवेट हॉस्पिटल कंपनियों को मिल रहा है। इलाज के लिए मरीजों की बढ़ती संख्या और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए बड़ी अस्पताल कंपनियां अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं। कोई नए शहरों में अस्पताल खोल रहा है, तो कोई मौजूदा अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाने की तैयारी में है। इससे आने वाले वर्षों में हॉस्पिटल सेक्टर की कंपनियों की कमाई में अच्छी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। शेयर बाजार में भी इस सेक्टर की कुछ कंपनियां निवेशकों का ध्यान खींच रही हैं।
इसी बीच ब्रोकरेज फर्म चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग ने हॉस्पिटल सेक्टर की तीन कंपनियों नारायणा हेल्थ, रेनबो चिल्ड्रंस मेडिकेयर और आर्टेमिस मेडिकेयर के शेयरों पर खरीदारी की सलाह दी है। ब्रोकरेज ने तीनों शेयरों पर ‘बाय’ रेटिंग दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, नारायणा हेल्थ में करीब 36 फीसदी, रेनबो चिल्ड्रंस मेडिकेयर में 34 फीसदी और आर्टेमिस मेडिकेयर में करीब 23 फीसदी तेजी की संभावना है। कंपनियों के विस्तार, मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी और बेहतर परिचालन प्रदर्शन को इसके प्रमुख कारण माना गया है।
नारायणा हेल्थ में 36% तक रिटर्न का अनुमान
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग ने नारायणा हेल्थ के शेयर के लिए 2,500 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। रिपोर्ट में शेयर का भाव 1,837 रुपये बताया गया है। इस आधार पर इसमें करीब 36 फीसदी तेजी की संभावना जताई गई है।
कंपनी भारत के अलावा विदेशी बाजारों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। केमैन आइलैंड्स में बेहतर प्रदर्शन और ब्रिटेन के कारोबार में सुधार से कंपनी की कमाई को सहारा मिलने की उम्मीद है। सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 73 फीसदी बढ़कर 2,840 करोड़ रुपये पहुंच गया। एबिटा 37.6 फीसदी बढ़कर 550 करोड़ रुपये और एडजस्टेड नेट प्रॉफिट 16.6 फीसदी बढ़कर करीब 300 करोड़ रुपये रहा।
ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 से 2028-29 के बीच कंपनी का रेवेन्यू औसतन 22.3 फीसदी और एडजस्टेड नेट प्रॉफिट 29.5 फीसदी सालाना दर से बढ़ सकता है। हालांकि, ब्रिटेन के कारोबार को जोड़ने से फिलहाल मार्जिन पर दबाव बना हुआ है।
रेनबो चिल्ड्रंस मेडिकेयर में 34% तेजी की संभावना
बच्चों और महिलाओं के इलाज में विशेषज्ञता रखने वाली रेनबो चिल्ड्रंस मेडिकेयर पर भी ब्रोकरेज सकारात्मक है। फर्म ने इसकी रेटिंग ‘ऐड’ से बढ़ाकर ‘बाय’ कर दी है। शेयर का टारगेट प्राइस 1,650 रुपये रखा गया है, जबकि रिपोर्ट में इसका भाव 1,230 रुपये है। इस हिसाब से करीब 34 फीसदी तेजी की संभावना है।
कंपनी अगले कुछ वर्षों में अपनी अस्पताल क्षमता को लगभग दोगुना करने की योजना पर काम कर रही है। फिलहाल उसके पास करीब 2,600 बेड हैं, जिन्हें बढ़ाकर 5,000 से अधिक करने का लक्ष्य है। इंदौर, मुंबई, कोयंबटूर, गुरुग्राम, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में विस्तार की तैयारी है।
सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 23.2 फीसदी बढ़कर 548 करोड़ रुपये और एबिटा 14.2 फीसदी बढ़कर 170 करोड़ रुपये रहा। एडजस्टेड नेट प्रॉफिट में 9.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह करीब 82 करोड़ रुपये पहुंच गया। ब्रोकरेज को अगले चार वर्षों में रेवेन्यू और मुनाफे में मजबूत वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि, नए अस्पतालों को मुनाफे में आने में समय लग सकता है।
आर्टेमिस मेडिकेयर में 23% तेजी का अनुमान
आर्टेमिस मेडिकेयर के शेयर पर ब्रोकरेज ने ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर 350 रुपये कर दिया है। रिपोर्ट में शेयर का भाव 285 रुपये है। इसके मुताबिक, शेयर में करीब 23 फीसदी तेजी की संभावना है।
कंपनी अगले तीन से पांच वर्षों में अस्पतालों की क्षमता बढ़ाकर करीब 2,000 बेड करने की योजना बना रही है। गुरुग्राम अस्पताल में 200 नए बेड जोड़ने के अलावा दिल्ली के लाजपत नगर में 650 बेड वाला अस्पताल तैयार करने की योजना है। रायपुर में जुलाई 2026 में शुरू हुआ 300 बेड का अस्पताल भी कंपनी के विस्तार का हिस्सा है।
सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 13.2 फीसदी बढ़कर करीब 311 करोड़ रुपये रहा। एबिटा 8.3 फीसदी बढ़कर 55 करोड़ रुपये और एडजस्टेड नेट प्रॉफिट 3.5 फीसदी बढ़कर करीब 31 करोड़ रुपये रहा। कंपनी की कुल कमाई में विदेशी मरीजों की हिस्सेदारी लगभग 30 फीसदी है।
निवेश से पहले इन जोखिमों को भी समझें
हॉस्पिटल सेक्टर में कारोबार बढ़ने की संभावनाएं जरूर हैं, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। नए अस्पताल बनाने और बेड बढ़ाने पर भारी पूंजी खर्च होती है। नए अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने और उन्हें मुनाफे में आने में समय लग सकता है। इसके अलावा परिचालन लागत और मार्जिन पर दबाव भी कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।
नोट: ब्रोकरेज के टारगेट प्राइस और तेजी के अनुमान बाजार भाव के आधार पर बदल सकते हैं। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करें।