देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को आर्थिक राहत दिलाने के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो ऐंड स्मॉल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेज (FISME) ने केंद्र सरकार से आगामी केंद्रीय बजट में विशेष प्रावधान करने की मांग की है। संगठन ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS 5.0) के तहत अतिरिक्त धनराशि आवंटित करने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य उन कारोबारियों को राहत दिलाना है, जिन्होंने योजना के तहत समय पर ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन गारंटी राशि समाप्त होने के कारण उन्हें इसका लाभ नहीं मिल सका।
क्या है ECLGS 5.0 योजना?
केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण कारोबारियों के सामने पैदा हुई नकदी की समस्या को दूर करने के लिए 5 मई 2026 को ECLGS 5.0 को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत बैंक पात्र कारोबारियों को अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराते हैं। यदि कोई कारोबारी निर्धारित समय पर ऋण चुकाने में असमर्थ रहता है, तो सरकार तय शर्तों के अनुसार बैंक को गारंटी प्रदान करती है। इससे बैंकों का जोखिम कम होता है और कारोबारियों के लिए कर्ज हासिल करना आसान बनता है।
योजना को 31 मार्च 2027 तक या 2.55 लाख करोड़ रुपये की गारंटी जारी होने तक चलाया जाना था। हालांकि, अगस्त 2026 में ही निर्धारित गारंटी आवंटन पूरा हो गया। इसके बाद नए ऋण आवेदनों को इस योजना के तहत सरकारी गारंटी मिलना बंद हो गया।
आवेदन करने के बाद भी नहीं मिला कर्ज
फिस्मे के मुताबिक, कई MSME इकाइयों ने योजना बंद होने से पहले जन समर्थ पोर्टल या सीधे बैंकों के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन किया था। इसके बावजूद उनके आवेदन लंबित रह गए। कुछ मामलों में बैंक ने ऋण मंजूर कर दिया, लेकिन सरकारी गारंटी कवरेज या ऋण राशि का वितरण अब तक पूरा नहीं हुआ।
संगठन का कहना है कि आवेदन करते समय कारोबारियों को इस बात की पर्याप्त जानकारी नहीं थी कि योजना के तहत उपलब्ध गारंटी राशि कितनी बची है। ऐसे में समय पर आवेदन करने के बावजूद कई छोटे कारोबारियों को आर्थिक सहायता से वंचित होना पड़ रहा है।
लंबित आवेदनों के लिए विशेष व्यवस्था का सुझाव
फिस्मे ने सरकार से मांग की है कि लंबित आवेदनों के निपटारे के लिए अतिरिक्त गारंटी राशि और जरूरी बजटीय प्रावधान किया जाए। संगठन ने सुझाव दिया है कि बैंक और जन समर्थ पोर्टल अपने रिकॉर्ड के आधार पर पात्र आवेदकों की पहचान करें और निर्धारित समयसीमा में उनकी प्रक्रिया पूरी करें।
इस विशेष व्यवस्था में योजना बंद होने से पहले जमा किए गए सभी पात्र आवेदनों को शामिल करने की मांग की गई है। इसमें वे मामले भी शामिल होंगे, जिनमें ऋण स्वीकृत हो चुका है, लेकिन गारंटी या रकम का वितरण बाकी है। हालांकि, सभी आवेदनों पर योजना की मौजूदा पात्रता शर्तें लागू रहेंगी।
कारोबार और रोजगार को मिलेगा सहारा
फिस्मे का मानना है कि अतिरिक्त गारंटी राशि मिलने से छोटे कारोबारियों को कच्चे माल की खरीद, कर्मचारियों के वेतन और उत्पादन से जुड़े रोजमर्रा के खर्च पूरे करने में मदद मिलेगी। इससे कारोबार की निरंतरता बनाए रखने और रोजगार बचाने में भी सहायता मिल सकती है।
संगठन की यह मांग ऐसे समय आई है, जब छोटे उद्योगों के लिए नकदी का प्रवाह और समय पर ऋण उपलब्ध होना कारोबार को बनाए रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। अब आगामी केंद्रीय बजट में सरकार इस प्रस्ताव पर क्या कदम उठाती है, इस पर MSME क्षेत्र की नजर रहेगी।