भारत की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री ने 2025 की दूसरी तिमाही में कुल 1.3 अरब डॉलर के 29 सौदों के साथ अपनी रणनीतिक रफ्तार बनाए रखी है। ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन सौदों में पब्लिक मार्केट एक्टिविटी भी शामिल है। यदि हम आईपीओ और क्यूआईपी को छोड़ दें, तो इंडस्ट्री ने 94.6 करोड़ डॉलर मूल्य के कुल 28 प्राइवेट सौदे किए हैं। हालांकि सौदों की संख्या ठीक रही, लेकिन तिमाही आधार पर कुल सौदे मूल्य में 36 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद यह आंकड़ा 2024 की दूसरी तिमाही से दोगुना है, जो यह दिखाता है कि ऑटो सेक्टर में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
ऑटोटेक का बढ़ा आकर्षण
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तिमाही में निवेश गतिविधियों का मुख्य आकर्षण ऑटोटेक और MAAS (Mobility-as-a-Service) सेगमेंट रहे। इन क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी-आधारित मोबिलिटी समाधान विकसित किए जा रहे हैं, जो बड़े स्तर पर स्केलेबल हैं और निवेशकों को लंबी अवधि के लिए आकर्षित कर रहे हैं। इसी वजह से इस तिमाही में औसत डील साइज भी बढ़कर 3.4 करोड़ डॉलर हो गया, जो पिछली तिमाही में 1.7 करोड़ डॉलर था।
EV सेगमेंट बना निवेश का बड़ा केंद्र
रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) को सेक्टर का सबसे बड़ा निवेशक आकर्षण बताया गया है। EV से जुड़े सौदे इस तिमाही में कुल डील वॉल्यूम का 34 प्रतिशत और कुल डील वैल्यू का 39 प्रतिशत हिस्सा रहे। यह संकेत करता है कि भारत में सस्टेनेबल मोबिलिटी की दिशा में बड़ा परिवर्तन आ रहा है। ग्लोबल ट्रेंड्स, सरकार की पॉलिसी और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन के चलते EV सेगमेंट में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है ऑटो सेक्टर
रिपोर्ट में ग्रांट थॉर्नटन भारत के ऑटोमोटिव प्रमुख साकेत मेहरा का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारतीय ऑटो इंडस्ट्री इस समय रणनीतिक बदलाव के एक अहम दौर में है। घरेलू नीतियों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्थितियों और हरित मोबिलिटी के बढ़ते प्रभाव के चलते यह सेक्टर खुद को नए सांचे में ढालने की कोशिश कर रहा है।
M&A गतिविधियों में सुस्ती, लेकिन ऑटो-टेक बना उम्मीद की किरण
जहां एक ओर निजी निवेश और टेक-आधारित क्षेत्रों में रफ्तार देखी गई, वहीं M&A यानी Mergers and Acquisitions गतिविधियों में कुछ सुस्ती दर्ज हुई। दूसरी तिमाही में केवल 8 M&A सौदे हुए, जिनका मूल्य 305 मिलियन डॉलर रहा। यह संख्या और मूल्य, दोनों ही पिछली तिमाही से घटे हैं – क्रमशः 11 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की गिरावट के साथ। हालांकि इस सुस्ती के बावजूद, ऑटो-टेक से जुड़ी इनोवेटिव कंपनियों और प्लेटफॉर्म-आधारित कंसोलिडेशन में निवेश ने सेक्टर की भविष्य की दिशा को लेकर आशाएं बढ़ाई हैं।
निजी इक्विटी निवेश स्थिर, लेकिन बड़े सौदों की कमी
पर्सनल इक्विटी (PE) इन्वेस्टमेंट के मोर्चे पर 2025 की दूसरी तिमाही स्थिर रही। इस दौरान कुल 20 डील्स हुए जिनका कुल मूल्य 641 मिलियन डॉलर रहा। डील की संख्या में मामूली 5 फीसदी की बढ़त हुई, लेकिन बड़े सौदों की कमी के कारण कुल मूल्य में 43 फीसदी की गिरावट आई।
टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी की ओर बढ़ता भारत का ऑटो सेक्टर
इस तिमाही की रिपोर्ट से साफ है कि भारत का ऑटो सेक्टर अब पारंपरिक ढांचे से निकलकर टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी की ओर तेजी से बढ़ रहा है। EV और ऑटोटेक के बढ़ते प्रभाव ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र निवेशकों के लिए एक अहम केंद्र बनेगा। भले ही कुछ क्षेत्रों में गिरावट रही हो, लेकिन इनोवेशन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण ने इंडस्ट्री को एक स्थिर और भविष्य-केंद्रित दिशा दी है।