नई दिल्ली। जीएसटी (GST) बचत उत्सव शुरू होते ही बाज़ारों में रौनक लौट आई है। कारों की बिक्री ने नए रिकॉर्ड बनाए, वहीं 2.5 लाख रुपये तक के महंगे टीवी का स्टॉक भी खत्म हो गया। कंपनियों के लिए यह खुशखबरी है, लेकिन दूसरी तरफ उपभोक्ताओं की शिकायतें भी लगातार बढ़ रही हैं। नेशनल कंज़्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पर अब तक करीब 3 हजार शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।
GST पर ग्राहकों की शिकायतें
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की सेक्रेटरी निधि खरे ने बताया कि रोज़ाना मंत्रालय के पास जीएसटी से जुड़ी नई शिकायतें आ रही हैं। इनमें सबसे ज़्यादा शिकायतें इस बात की हैं कि कंपनियां जीएसटी में कमी का पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं दे रही हैं। मंत्रालय इन शिकायतों की जांच कर रहा है और ज़रूरी मामलों को सीबीआईसी (Central Board of Indirect Taxes and Customs) को आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है।
उपभोक्ताओं की नज़र में बड़ा मुद्दा
ग्राहक मानते हैं कि जीएसटी कटौती का फायदा उन्हें कम कीमतों के रूप में मिलना चाहिए। लेकिन कई रिटेलर्स और ऑनलाइन कंपनियां पुरानी कीमतों पर ही प्रोडक्ट बेच रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा है। यही वजह है कि शिकायतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
ऑनलाइन शॉपिंग में ‘डार्क पैटर्न्स’ का खेल
निधि खरे ने यह भी माना कि ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर डार्क पैटर्न्स का इस्तेमाल बढ़ गया है। यानी ऐसी तकनीकें जिनसे उपभोक्ताओं को गुमराह किया जाता है – जैसे डिस्काउंट का झांसा, फर्जी ऑफर्स या छिपी हुई शर्तें। मंत्रालय इन मामलों पर भी कड़ी नज़र रखे हुए है।
एआई करेगा जांच आसान
शिकायतों की बड़ी संख्या को देखते हुए मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेना शुरू कर दिया है। एआई की मदद से यह जांची जाएगी कि कहां कंपनियां गलत विज्ञापन, भ्रामक ऑफर या अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के जरिए उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रही हैं। मंत्रालय का मानना है कि यह तकनीक तेज़ और सटीक जांच में मदद करेगी।
कंपनियों को राहत, पर जिम्मेदारी भी
जीएसटी कटौती से कंपनियों को बिक्री में जबरदस्त उछाल मिला है। ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में इसका सबसे बड़ा असर दिख रहा है। कार शोरूम्स पर ग्राहकों की भीड़ है और महंगे टीवी भी हाथों-हाथ बिक रहे हैं। लेकिन मंत्रालय ने साफ कहा है कि कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वे टैक्स कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचाएं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी।
उपभोक्ताओं की उम्मीदें
ग्राहक चाहते हैं कि सरकारी राहत योजनाओं का सीधा असर उनकी जेब पर दिखे। वे उम्मीद कर रहे हैं कि जीएसटी कटौती का असर न सिर्फ लक्ज़री प्रोडक्ट्स पर बल्कि रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ों पर भी देखने को मिले। शिकायतें बढ़ने से साफ है कि उपभोक्ता अब अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रहे हैं और कंपनियों पर नज़र रखे हुए हैं।
आगे की राह
सरकार ने संकेत दिया है कि वह उपभोक्ता हितों से जुड़े हर मामले पर सख्त रुख अपनाएगी। मंत्रालय और सीबीआईसी मिलकर कंपनियों की जांच करेंगे और दोषी पाए जाने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी। साथ ही एआई आधारित सिस्टम आने वाले समय में ई-कॉमर्स सेक्टर में पारदर्शिता लाने का काम करेगा।
ग्राहक नहीं करेंगे समझौता
जीएसटी बचत उत्सव ने एक तरफ बाज़ार में रौनक ला दी है और कंपनियों की बिक्री को बढ़ावा दिया है, वहीं दूसरी ओर उपभोक्ताओं की शिकायतों ने यह साफ कर दिया है कि ग्राहक अब कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं। सरकार और मंत्रालय की निगरानी के बीच कंपनियों को अब संतुलन बनाना होगा-बेहतर बिक्री और ईमानदार व्यापार के बीच।
GST में क्या बदला
सरकार ने जीएसटी के ढांचे को सरल बनाते हुए 22 सितंबर 2025 से एक नई व्यवस्था लागू की है, जिसमें अब केवल दो ही मुख्य स्लैब रहेंगे—5% और 18%। पहले मौजूद 12% और 28% वाले स्लैब को खत्म कर दिया गया है और इनसे जुड़ी वस्तुओं को 5% या 18% के दायरे में ला दिया गया है। वहीं, तंबाकू, पान मसाला और सुपर लग्जरी जैसी वस्तुओं पर अब 40% का विशेष उच्च दर टैक्स लगाया जाएगा।
इसके अलावा सरकार ने जीवन बीमा प्रीमियम, स्वास्थ्य बीमा, कई तरह की दवाइयां और शिक्षा से जुड़ी चीज़ों को पूरी तरह जीएसटी मुक्त कर दिया है। इन बदलावों का सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा क्योंकि रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुएं सस्ती होंगी और टैक्स का बोझ हल्का होगा। साथ ही, कारोबारियों के लिए भी यह व्यवस्था आसान साबित होगी क्योंकि अब कर ढांचा अधिक पारदर्शी और सरल हो गया है। इससे छोटे कारोबारों को प्रोत्साहन मिलेगा, खपत बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।