पिछले सत्र में भारी बिकवाली झेलने के बाद मंगलवार को चांदी की कीमतों में जोरदार रिकवरी देखने को मिली। भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भी चांदी ने स्थिरता दिखाई। साल के अंत में आई तेज रैली के बाद मुनाफावसूली के चलते चांदी की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि दीर्घकालिक रुझान अब भी मजबूत बना हुआ है।
भारतीय वायदा बाजार MCX पर चांदी की कीमतों में 4 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई और भाव करीब 2.36 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को मार्च डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट पहली बार 2.5 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार करते हुए 2,54,174 रुपये तक पहुंच गए थे। हालांकि यह तेजी ज्यादा देर नहीं टिक सकी और उसी सत्र में चांदी करीब 28,674 रुपये यानी 10.3 प्रतिशत टूटकर 2,25,500 रुपये प्रति किलो के निचले स्तर तक फिसल गई।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो चांदी मंगलवार को करीब 73 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती दिखी। इससे पहले सत्र में इसमें लगभग 9 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जो बीते पांच वर्षों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। वहीं सोने की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रही, हालांकि इसमें भी पिछले दो महीनों की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।
विशेषज्ञों के अनुसार कीमती धातुओं में यह दबाव तकनीकी संकेतों के कारण आया, जिससे यह संकेत मिला कि कीमतें बहुत तेजी से ऊपर गई थीं। इसके अलावा बाजार में कम लिक्विडिटी के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव और तेज हो गया। प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य कीमती धातुओं में भी दो अंकों की गिरावट देखी गई।
सिंगापुर में सुबह के कारोबार के दौरान स्पॉट चांदी करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 73.06 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले यह रिकॉर्ड 84.01 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू चुकी थी। वहीं सोना 4,343 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना रहा।
साल 2025 में चांदी ने वैश्विक कमोडिटी बाजारों में सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली धातुओं में अपनी जगह बनाई है। केंद्रीय बैंकों की खरीद, ETF में मजबूत निवेश और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तीन बार की गई कटौती ने चांदी की कीमतों को समर्थन दिया है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOSL) की रिपोर्ट के अनुसार, चांदी की यह तेजी किसी अल्पकालिक सट्टेबाजी का नतीजा नहीं है, बल्कि बाजार में आ रहे संरचनात्मक बदलावों से जुड़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चांदी का मौजूदा अपट्रेंड साइक्लिकल नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल है।
भारत में चांदी की कीमतें वैश्विक रुझानों के अनुरूप चलती हैं और MCX पर भाव आमतौर पर COMEX और रुपये-डॉलर विनिमय दर से प्रभावित होते हैं। फिलहाल भारत में चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट है और एक किलो चांदी करीब 2,33,480 रुपये पर कारोबार कर रही है। वहीं 10 ग्राम चांदी का भाव 2,334.80 रुपये है।
शहरों के हिसाब से देखें तो मुंबई में चांदी का भाव 233.76 रुपये प्रति ग्राम है। दिल्ली में यह 223.21 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रही है, जो मुंबई से करीब 10 रुपये सस्ती है। चेन्नई में चांदी 224.25 रुपये, हैदराबाद में 223.95 रुपये और अहमदाबाद में 223.89 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर है। कीमतों में यह अंतर स्थानीय कर, परिवहन लागत और मांग के कारण होता है।
MOSL के अनुसार, चांदी की तेजी की असली वजह बाजार में वास्तविक आपूर्ति की कमी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में चांदी की बढ़ती खपत से औद्योगिक मांग लगातार बनी हुई है। इसके अलावा अनिश्चित वैश्विक माहौल में निवेशक चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं।
ब्रोकरेज का मानना है कि निवेशकों को गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। COMEX पर 75 डॉलर का लक्ष्य हासिल हो चुका है और अब अगला लक्ष्य 77 डॉलर तय किया गया है, जो घरेलू बाजार में करीब 2.46 लाख रुपये प्रति किलो के बराबर है।