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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > टेलिकॉम > Startups को बड़ी राहत: विदेशी सिम पर TRAI का फैसला बदलेगा एक्सपोर्ट गेम
टेलिकॉम

Startups को बड़ी राहत: विदेशी सिम पर TRAI का फैसला बदलेगा एक्सपोर्ट गेम

Last updated: 31/12/2025 3:40 PM
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Industrial Empire
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TRAI के फैसले से स्टार्टअप्स को विदेशी सिम इस्तेमाल में राहत, IoT और M2M डिवाइस एक्सपोर्ट को बढ़ावा
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भारत के टेक Startups और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने विदेशी सिम कार्ड के इस्तेमाल को लेकर ऐसी सिफारिशें दी हैं, जो भारत में बनने वाले स्मार्ट डिवाइसेस के निर्यात को कहीं ज्यादा आसान बना देंगी। खासतौर पर IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) और M2M (मशीन-टू-मशीन) डिवाइसेस बनाने वाली कंपनियों के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है।

अब तक भारतीय कंपनियों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि विदेशों में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड को भारत में बने डिवाइस में कैसे लगाया जाए, क्योंकि इसके लिए कोई साफ और सरल नियम मौजूद नहीं थे। TRAI की नई सिफारिशों ने इसी उलझन को खत्म करने की कोशिश की है।

क्या है TRAI की नई सिफारिशों का मकसद?
TRAI का साफ मानना है कि अगर भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी हब बनना है, तो नियमों को उद्योग के अनुकूल बनाना होगा। आज स्मार्ट मीटर, कनेक्टेड कार, इंडस्ट्रियल सेंसर, हेल्थ डिवाइसेस और एग्रीटेक प्रोडक्ट्स जैसे स्मार्ट उपकरणों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है। इन डिवाइसेस में उस देश के नेटवर्क के अनुसार सिम या eSIM की जरूरत होती है, जहां इन्हें इस्तेमाल किया जाना है।

TRAI ने इसी जरूरत को समझते हुए विदेशी सिम कार्ड के उपयोग को एक तय दायरे में अनुमति देने की सिफारिश की है, ताकि भारतीय कंपनियां बिना किसी कानूनी डर के अपने प्रोडक्ट्स को ग्लोबल मार्केट के लिए तैयार कर सकें।

‘इंटरनेशनल M2M सिम सर्विस ऑथराइजेशन’ क्या है?
TRAI ने सुझाव दिया है कि विदेशी सिम और eSIM की बिक्री और उपयोग के लिए एक नया और आसान सिस्टम शुरू किया जाए, जिसे “इंटरनेशनल M2M सिम सर्विस ऑथराइजेशन” कहा जाएगा। यह एक तरह का लाइट-टच रेगुलेटरी फ्रेमवर्क होगा, यानी इसमें ज्यादा कागजी कार्रवाई या जटिल शर्तें नहीं होंगी।

इस ऑथराइजेशन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। आवेदन करने के बाद डिजिटल रूप से साइन किया हुआ ऑथराइजेशन अपने आप जनरेट हो जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि इसके लिए न तो कोई एंट्री फीस होगी, न बैंक गारंटी और न ही सालाना लाइसेंस शुल्क। कंपनियों को सिर्फ 5,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस देनी होगी।

भारत में टेस्टिंग को लेकर भी राहत
निर्यात से पहले किसी भी डिवाइस की टेस्टिंग सबसे जरूरी चरण होता है। अब तक विदेशी सिम कार्ड के साथ भारत में टेस्टिंग करना एक बड़ी चुनौती थी। TRAI ने इस समस्या का भी समाधान सुझाया है।

नई सिफारिशों के अनुसार, विदेशी सिम कार्ड को केवल टेस्टिंग के उद्देश्य से भारत में अधिकतम छह महीने तक एक्टिव रखने की अनुमति दी जा सकती है। इससे कंपनियां यह जांच सकेंगी कि उनके डिवाइसेस विदेशी नेटवर्क पर सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। यह कदम स्टार्टअप्स के लिए खास तौर पर फायदेमंद साबित होगा, जिनके पास बड़े स्तर पर टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होता।

‘मेक इन इंडिया’ और एक्सपोर्ट को मिलेगा बूस्ट
TRAI की ये सिफारिशें सीधे तौर पर “मेक इन इंडिया” अभियान को मजबूत करती हैं। जब भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी सिम कार्ड को अपने प्रोडक्ट्स में एम्बेड करना आसान होगा, तो वे इंटरनेशनल ग्राहकों की जरूरतों के हिसाब से डिवाइसेस डिजाइन कर सकेंगी।

इससे न सिर्फ एक्सपोर्ट बढ़ेगा, बल्कि भारत की छवि एक भरोसेमंद टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्टार्टअप्स की लागत घटेगी, टाइम-टू-मार्केट कम होगा और भारतीय प्रोडक्ट्स वैश्विक प्रतिस्पर्धा में ज्यादा सक्षम बनेंगे।

भविष्य की तकनीक के लिए मजबूत नींव
IoT और M2M टेक्नोलॉजी आने वाले समय में ऊर्जा, परिवहन, कृषि, हेल्थकेयर और स्मार्ट सिटी जैसे क्षेत्रों की रीढ़ बनने वाली हैं। TRAI की सिफारिशें न सिर्फ व्यापार को आसान बनाती हैं, बल्कि सुरक्षा और रेगुलेशन का भी संतुलन बनाए रखती हैं। यह फैसला भारतीय स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों के लिए एक नई उड़ान की तरह है। अब वे बिना किसी कानूनी उलझन के दुनिया भर के बाजारों के लिए स्मार्ट, कनेक्टेड और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप प्रोडक्ट्स तैयार कर सकेंगी।

TAGGED:Digital IndiaIndustrial EmpireMake in Indiaइंडियन टेक इंडस्ट्रीटेक स्टार्टअपमेक इन इंडिया
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