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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > आईटी > ChatGPT के बाद ‘AI का डर’: दो दिन में टेक कंपनियों के उड़े अरबों डॉलर, बाजार में मची हलचल
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ChatGPT के बाद ‘AI का डर’: दो दिन में टेक कंपनियों के उड़े अरबों डॉलर, बाजार में मची हलचल

Last updated: 05/02/2026 12:22 PM
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Industrial Empire
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ChatGPT और AI की वजह से शेयर बाजार में गिरावट, टेक कंपनियों की वैल्यू में भारी नुकसान
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जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अब तक शेयर बाजार का भविष्य और ग्रोथ इंजन माना जा रहा था, वही अब निवेशकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है। ChatGPT के आने के बाद पिछले कुछ सालों में AI को लेकर बाजार में कई बार उत्साह और गिरावट देखी गई, लेकिन इस बार की गिरावट ने सभी को चौंका दिया। सिर्फ दो दिनों में टेक सेक्टर की बड़ी कंपनियों से अरबों डॉलर की मार्केट वैल्यू साफ हो गई। शेयर बाजार के साथ-साथ कर्ज बाजार में भी दबाव बढ़ गया, जिससे निवेशकों के बीच डर का माहौल बन गया है।

दो दिन में उड़ गई अरबों डॉलर की वैल्यू
इस हफ्ते सिलिकॉन वैली की बड़ी और मझोली कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। सॉफ्टवेयर सेक्टर इस गिरावट का सबसे बड़ा शिकार बना। एक ETF जो सॉफ्टवेयर कंपनियों को ट्रैक करता है, उसकी वैल्यू सिर्फ एक हफ्ते में करीब 1 ट्रिलियन डॉलर तक घट गई। निवेशकों को लगने लगा कि जिस सेक्टर को सबसे सुरक्षित और तेजी से बढ़ने वाला माना जा रहा था, वही अब सबसे ज्यादा जोखिम में है।

यह गिरावट किसी बड़े घोटाले या आर्थिक संकट की वजह से नहीं हुई, बल्कि इसकी जड़ में खुद AI ही है। निवेशकों को डर है कि AI टेक कंपनियों के मौजूदा बिजनेस मॉडल को कमजोर कर सकता है और उनकी कमाई पर असर डाल सकता है।

बिजनेस मॉडल पर संकट का डर
इस बार बाजार में घबराहट किसी बुलबुले के फूटने से नहीं आई है। असली चिंता यह है कि AI कंपनियों के पूरे काम करने के तरीके को बदल सकता है। निवेशकों को लग रहा है कि जिस बदलाव की चर्चा सालों से हो रही थी, वह अब हकीकत बनने के करीब है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले दो सालों से कहा जा रहा था कि AI इंडस्ट्री को पूरी तरह बदल देगा। अब जब इसके असर जमीन पर दिखने लगे हैं, तो बाजार ने बहुत तेज प्रतिक्रिया दी है। निवेशक डर रहे हैं कि कहीं AI खुद सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए सबसे बड़ा खतरा न बन जाए।

एक छोटा ऐलान और बाजार में भूचाल
इस पूरे तूफान की शुरुआत एक छोटे से ऐलान से हुई। AI स्टार्टअप Anthropic ने कानूनी कामों जैसे कॉन्ट्रैक्ट जांचने के लिए एक नया AI टूल लॉन्च किया। यह खबर सामान्य लग सकती थी, लेकिन इससे पहले कंपनी के AI कोडिंग टूल्स ने सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव किया था। यही वजह है कि निवेशकों को लगा कि अब AI सिर्फ कोडिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लीगल, सेल्स, मार्केटिंग और फाइनेंस जैसे सेक्टर्स में भी तेजी से घुसपैठ करेगा। इससे पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों के बिजनेस पर सीधा असर पड़ सकता है।

AI से फायदा उठाने वाली कंपनियों में भी कमजोरी
निवेशकों की चिंता तब और बढ़ गई जब AI से सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाली कंपनियों में भी कमजोरी दिखने लगी। Alphabet ने संकेत दिया कि AI पर उसका खर्च उम्मीद से ज्यादा बढ़ रहा है। वहीं Arm Holdings की कमाई का अनुमान बाजार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। इन संकेतों से बाजार को लगा कि AI भले ही भविष्य की टेक्नोलॉजी हो, लेकिन फिलहाल यह कंपनियों के लिए मुनाफे से ज्यादा खर्च बढ़ाने वाली साबित हो रही है। नतीजतन, निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और बिकवाली का दौर तेज हो गया।

बिकवाली ने बढ़ाया डर, डर ने बढ़ाई बिकवाली
शुरुआत में गिरावट सिर्फ सॉफ्टवेयर शेयरों तक सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे यह डर पूरे टेक सेक्टर में फैल गया। शेयर गिरते गए, निवेशकों का भरोसा डगमगाता गया और बिकवाली और तेज हो गई। यह असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। भारत की आईटी कंपनियों जैसे TCS और Infosys के शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। इसके अलावा, जिन बैंकों और निवेशकों ने टेक कंपनियों को कर्ज दिया था, वहां भी चिंता बढ़ गई है।

अभी नुकसान कम, लेकिन डर ज्यादा
दिलचस्प बात यह है कि अभी तक कई बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों को AI की वजह से सीधा नुकसान नहीं हुआ है। उनकी कमाई और ग्राहक आधार अभी मजबूत बना हुआ है। इसके बावजूद बाजार बेचैन है। कंपनियां सालों से अपने AI टूल्स बना रही हैं, लेकिन उनकी कमाई उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी है। इससे निवेशकों को लग रहा है कि AI पर बड़ा दांव लगाने से पहले अब ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है।

अब तय होगा AI के दौर का असली विजेता
अब सवाल यह नहीं है कि AI आएगा या नहीं, बल्कि यह है कि कौन सी कंपनियां AI के साथ खुद को ढाल पाएंगी और कौन पीछे छूट जाएंगी। आने वाला समय टेक इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले एक साल में यह साफ हो जाएगा कि AI के इस दौर में असली विजेता कौन होंगे और किन कंपनियों को अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करना पड़ेगा। निवेशकों के लिए यह दौर चुनौती भरा जरूर है, लेकिन यहीं से भविष्य की नई टेक लीडरशिप भी तय होगी।

TAGGED:AIAI का डरChatGPTIndustrial Empirestock marketStock market crashTech Stocks
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