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India-US Trade Deal: जयशंकर-रुबियो बैठक में व्यापार, दुर्लभ खनिज और ऊर्जा पर बड़ा फैसला

Last updated: 05/02/2026 11:56 AM
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Industrial Empire
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India-US Trade Deal बैठक में जयशंकर और मार्को रुबियो की मुलाकात
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और रणनीतिक साझेदारी पर जयशंकर-रुबियो की अहम बैठक |
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India-US Trade Deal: वॉशिंगटन डीसी में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई अहम मुलाकात ने भारत-अमेरिका रिश्तों को नई गति दे दी है। इस बैठक में दोनों देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित व्यापार समझौते का स्वागत किया और इसे द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी के लिए एक बड़ा कदम बताया। बातचीत का फोकस सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, दुर्लभ खनिजों और उभरती तकनीकों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

व्यापार समझौते पर सहमति, नए अवसरों की उम्मीद
बैठक के बाद सामने आए बयानों से साफ है कि दोनों देश व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, जयशंकर और रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसर खोलेगा। खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-बिजनेस और हाई-टेक सेक्टर में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी गईं। दोनों पक्षों ने शुरुआती स्तर पर संयुक्त बैठकों और कार्यसमूहों के गठन पर सहमति जताई, ताकि समझौतों को जमीन पर उतारा जा सके।

दुर्लभ खनिजों पर रणनीतिक साझेदारी
इस मुलाकात का एक अहम पहलू दुर्लभ खनिजों को लेकर सहयोग रहा। दोनों देशों ने दुर्लभ खनिजों की खोज, खनन और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया। जयशंकर गुरुवार को होने वाली पहली मंत्री-स्तरीय दुर्लभ खनिज बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका दौरे पर हैं। इन खनिजों का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और रक्षा उपकरणों में होता है, ऐसे में भारत-अमेरिका साझेदारी वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

क्वाड और हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर साझा नजरिया
जयशंकर और रुबियो ने क्वाड मंच के जरिए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं ने माना कि एक समृद्ध और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र दोनों देशों के हितों के लिए जरूरी है। समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर आपसी तालमेल बढ़ाने पर सहमति बनी। यह संकेत भी मिला कि आने वाले महीनों में क्वाड के तहत सहयोगी पहलें और तेज होंगी।

कृषि और औद्योगिक वस्तुओं पर टैरिफ में राहत
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के बयान ने इस समझौते को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। उनके मुताबिक, भारत अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों की एक बड़ी श्रृंखला पर टैरिफ घटाकर शून्य प्रतिशत कर सकता है। इसमें फल-सब्जियां जैसे कृषि उत्पाद भी शामिल हैं। इसे अमेरिका ने बड़ी जीत बताया है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने साफ किया है कि इस समझौते में किसानों और डेयरी उद्योग के हितों की पूरी तरह सुरक्षा की गई है। भारत ने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी तरह के समझौते से इनकार किया है, ताकि घरेलू उत्पादकों पर नकारात्मक असर न पड़े।

टैरिफ और व्यापार घाटे पर अमेरिका का रुख
ग्रीर ने यह भी कहा कि अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा काफी अधिक है, इसलिए कुछ उत्पादों पर 18 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजना बनाई गई है। इस बयान से साफ है कि समझौते के बावजूद कुछ मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहेगी। भारत की ओर से संकेत दिया गया है कि वह अपने रणनीतिक और कृषि हितों से समझौता नहीं करेगा, लेकिन व्यापार संतुलन सुधारने के लिए व्यावहारिक रास्ते तलाशे जाएंगे।

ऊर्जा सुरक्षा पर नया समीकरण
ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच अहम सहमति बनी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट के अनुसार, भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका व संभवत: वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारत की भूमिका और मजबूत हो सकती है। साथ ही, ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, रक्षा, दुर्लभ खनिज और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। यह मुलाकात दिखाती है कि भारत और अमेरिका सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी बनकर आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में इन समझौतों का असर निवेश, सप्लाई चेन और रोजगार पर भी देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है यह बैठक भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

TAGGED:FeaturedIndia US RelationsIndia-US Trade DealIndustrial EmpireRare Earthजयशंकर-रुबियो बैठक
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