The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Wednesday, Feb 11, 2026
Facebook X-twitter Youtube Linkedin
  • About Us
  • Contact Us
Subscribe
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Font ResizerAa
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & InnovationThe Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Search
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
    • रिन्यूएबल एनर्जी
    • नॉन रिन्यूएबल एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2026 The Industrial Empire. All Rights Reserved.
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एग्रीकल्चर > Chukandar farming: इस सब्जी से किसानों की कमाई में होगी बढ़ोतरी, बन सकते हैं लखपति
एग्रीकल्चर

Chukandar farming: इस सब्जी से किसानों की कमाई में होगी बढ़ोतरी, बन सकते हैं लखपति

Shashank Pathak
Last updated: 05/02/2026 1:28 PM
By
Shashank Pathak
ByShashank Pathak
Follow:
Share
Chukandar farming से खेत में तैयार चुकंदर की फसल
SHARE

Chukandar farming: खेती अब सिर्फ परंपरागत फसलों तक सीमित नहीं रही। बदलते समय के साथ किसान भी ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें लागत कम हो और मुनाफा ज्यादा मिले। ऐसी ही एक हाई प्रोफिटेबल खेती है चुकंदर यानी बीटरूट की खेती। हेल्थ और फिटनेस का ट्रेंड बढ़ने के साथ बीटरूट की मांग तेजी से बढ़ी है। जूस सेंटर, जिम जाने वाले युवा, हेल्थ ड्रिंक बनाने वाली कंपनियां और अस्पताल तक बीटरूट की डिमांड बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि चुकंदर की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का मजबूत जरिया बन रही है।

क्यों फायदेमंद है चुकंदर की खेती?
चुकंदर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम लागत में तैयार होने वाली फसल है और 2 से 3 महीने में तैयार होकर बाजार में बिकने लायक हो जाती है। दूसरी ओर, धान-गेहूं जैसी फसलों में समय भी ज्यादा लगता है और मुनाफा भी सीमित रहता है। चुकंदर की खेती साल के कई हिस्सों में की जा सकती है, जिससे किसान एक ही साल में दो से तीन बार फसल लेकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। हेल्थ बेनिफिट्स की वजह से इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है, इसलिए बिक्री को लेकर ज्यादा चिंता नहीं रहती।

कमाई कैसे बढ़ा सकते हैं किसान?
अगर किसान चुकंदर की खेती सही तरीके से करें, तो कमाई कई गुना बढ़ सकती है। इसके लिए सबसे पहले सही समय पर बुवाई करना जरूरी है। अच्छी किस्म के बीज चुनने से पैदावार और क्वालिटी दोनों बेहतर मिलती हैं। इसके अलावा, सिर्फ मंडी पर निर्भर रहने की बजाय जूस सेंटर, होटल, रेस्टोरेंट और हेल्थ ड्रिंक बनाने वालों से सीधे संपर्क करना फायदेमंद साबित हो सकता है। ताजा और साफ-सुथरी पैकिंग के साथ अगर चुकंदर बेचा जाए, तो बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।

खर्च और कमाई का पूरा गणित
अगर किसान 1 एकड़ में चुकंदर की खेती करता है, तो औसतन 15 से 20 हजार रुपये तक का खर्च आता है। इसमें बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी का खर्च शामिल होता है। सही देखभाल और मौसम अनुकूल रहने पर एक एकड़ से 80 से 100 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है। अगर औसत बाजार भाव 20 रुपये प्रति किलो माना जाए, तो कुल बिक्री से 1.60 लाख से 2 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है। खर्च निकालने के बाद किसान को करीब 1 से 1.50 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है। हालांकि यह आंकड़े इलाके, मौसम और बाजार के भाव के हिसाब से थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकते हैं, लेकिन फिर भी यह खेती परंपरागत फसलों के मुकाबले कहीं ज्यादा फायदे का सौदा है।

कब और कैसे करें बुवाई?
मैदानी इलाकों में चुकंदर की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान बोई गई फसल से अच्छी पैदावार मिलती है। चुकंदर के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। खेत की अच्छी तरह जुताई करके बीज बोना चाहिए, ताकि जड़ें मजबूत बनें। सही दूरी पर बुवाई करने और संतुलित मात्रा में खाद देने से चुकंदर का वजन और क्वालिटी दोनों बेहतर होती है। समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण भी जरूरी है, ताकि फसल को पूरा पोषण मिल सके।

कितने दिन में तैयार होती है फसल?
चुकंदर की फसल बुवाई के करीब 55 से 85 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। कुछ उन्नत किस्में तो 45–50 दिनों में ही बाजार तक पहुंचने लायक हो जाती हैं। दिसंबर से फरवरी के बीच चुकंदर की कीमत अच्छी मिलती है, इसलिए किसान अगर सही टाइमिंग के साथ फसल बाजार में लाएं, तो उन्हें बेहतर मुनाफा मिल सकता है।

सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का फायदा
चुकंदर की खेती पर केंद्र सरकार की ओर से कोई अलग से सीधी सब्सिडी नहीं मिलती, लेकिन कई राज्य सरकारें बीज, खाद और दूसरे जरूरी आदानों पर वित्तीय सहायता देती हैं। बिहार समेत कुछ राज्यों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) और राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM) के तहत किसानों को मदद मिल सकती है। किसान अपने जिले के कृषि विभाग या बागवानी अधिकारी से संपर्क कर यह जानकारी ले सकते हैं कि उनके राज्य में कौन-कौन सी योजनाएं लागू हैं और आवेदन की प्रक्रिया क्या है।

हेल्थ इंडस्ट्री में बढ़ती डिमांड
चुकंदर को आमतौर पर खून बढ़ाने वाली सब्जी के रूप में जाना जाता है। आयरन की कमी हो या शरीर में कमजोरी महसूस हो, तो डॉक्टर भी बीटरूट खाने की सलाह देते हैं। यही वजह है कि जूस सेंटर, जिम जाने वाले युवा, हेल्थ कॉन्शियस लोग और अस्पतालों में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। फिटनेस ट्रेंड बढ़ने के साथ बीटरूट जूस और हेल्थ ड्रिंक्स की खपत भी बढ़ रही है।

किसानों के लिए भरोसेमंद कमाई का विकल्प
आज के समय में चुकंदर की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रही है। कम लागत, जल्दी तैयार होने वाली फसल और मजबूत बाजार मांग इसे लखपति बनने का मौका देती है। अगर किसान सही तकनीक, सही समय और सही मार्केटिंग अपनाएं, तो चुकंदर की खेती उनके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

TAGGED:Agribusiness IndiaAgricultureBeetroot farmingChukandar farmingIndustrial Empireचुकंदर की खेती
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article ChatGPT और AI की वजह से शेयर बाजार में गिरावट, टेक कंपनियों की वैल्यू में भारी नुकसान ChatGPT के बाद ‘AI का डर’: दो दिन में टेक कंपनियों के उड़े अरबों डॉलर, बाजार में मची हलचल
Next Article RBI ब्याज दर नीति बैठक के बाद होम लोन और कार लोन EMI पर असर की खबर जो सोच रहे थे लोन सस्ता होगा, उनके लिए बुरी खबर! RBI नहीं घटाएगा रेट
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Might Also Like

फैक्ट्री में इस्तेमाल हो रही अत्याधुनिक मशीनें, ऑटोमेशन, AI, 3D प्रिंटिंग और ग्रीन टेक्नोलॉजी के साथ इंडस्ट्रियल इनोवेशन
ऑटो/टेक

फ़ैक्टरी नवाचार: ऐसी मशीनें जो आपने पहले कभी नहीं देखी होंगी

By
Industrial empire correspondent
भारतीय आईटी पेशेवरों को H-1B वीजा शुल्क में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है, छोटी और बड़ी आईटी कंपनियां फोकस में हैं
आईटी

H-1B वीजा फीस में ऐतिहासिक बढ़ोतरी: छोटी IT कंपनियों के लिए चुनौती, बड़े खिलाड़ियों के लिए अवसर

By
Industrial Empire
ईरान से व्यापार पर अमेरिका के 25% अतिरिक्त टैरिफ का भारत की अर्थव्यवस्था और निर्यात पर प्रभाव
ट्रेंडिंग खबरें

ईरान से व्यापार पर अमेरिका का 25% अतिरिक्त Tariff प्रस्ताव, भारत पर बढ़ेगा दबाव?

By
Industrial Empire
एग्रीकल्चर

थोक महंगाई जून में निगेटिव: सब्ज़ी, प्याज़, आलू के दाम गिरे, किसानों के लिए चेतावनी का संकेत!

By
Industrial Empire
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation
Facebook X-twitter Youtube Linkedin

Quick links

  • About Us
  • Contact Us
Categories
  • होम
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • बाज़ार
  • ऑटो/टेक
  • बैंकिंग
  • आईटी
  • टेलिकॉम
  • एनर्जी
  • एग्रीकल्चर
  • फार्मा
  • फर्श से अर्श तक
  • अन्य

Policies

  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions

Copyright © 2025 The Industial Empire. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?