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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > ट्रेंडिंग खबरें > India–US Trade Deal: टैरिफ कटौती से खुलेगा कारोबार का नया रास्ता
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India–US Trade Deal: टैरिफ कटौती से खुलेगा कारोबार का नया रास्ता

Last updated: 05/02/2026 5:35 PM
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Industrial empire correspondent
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India–US Trade Deal पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की खबर, पीयूष गोयल टैरिफ कटौती और द्विपक्षीय व्यापार पर चर्चा करते हुए
पीयूष गोयल, वाणिज्य और उद्योगमंत्री (फ़ाइल फोटो)
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India–US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील अब अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली किस्त लगभग तैयार है और अगले कुछ दिनों में दोनों देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है। इसके बाद कार्यकारी आदेश लागू होते ही भारतीय उत्पादों पर लगने वाले अमेरिकी टैरिफ में बड़ी कटौती प्रभावी हो जाएगी। यह कदम भारत के निर्यातकों के लिए राहत लेकर आएगा और दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई गति देगा।

25% से 18% तक टैरिफ घटने की तैयारी
पीयूष गोयल ने बताया कि मौजूदा सहमति के अनुसार, अमेरिका भारतीय सामानों पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर सकता है। पिछले एक साल से दोनों देशों की टीमें लगातार बातचीत में जुटी थीं, ताकि ऐसा समझौता तैयार हो सके जो संतुलित भी हो और दोनों पक्षों के हितों को सुरक्षित रखे। टैरिफ में यह कटौती खासतौर पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा और ऑर्डर बढ़ने की उम्मीद है।

संवेदनशील सेक्टरों को बचाते हुए बनी सहमति
सरकार ने साफ किया है कि ट्रेड डील में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। कृषि, डेयरी और छोटे उद्योगों जैसे सेक्टरों को विशेष सुरक्षा दी गई है, ताकि घरेलू उत्पादकों पर नकारात्मक असर न पड़े। पीयूष गोयल ने कहा कि बातचीत का मकसद सिर्फ टैरिफ घटाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा ढांचा तैयार करना था जिससे लंबे समय तक व्यापार बढ़े और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। इस संतुलन के साथ हुई सहमति से भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत जगह मिल सकती है।

मार्च तक औपचारिक समझौते का लक्ष्य
पहली किस्त के बाद दोनों देश एक अधिक व्यापक और औपचारिक ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं। सरकार का लक्ष्य है कि मार्च के मध्य तक इस बड़े समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए। माना जा रहा है कि इस समझौते में सेवाओं के व्यापार, निवेश सुरक्षा, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सप्लाई चेन सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। इससे सिर्फ निर्यात-आयात ही नहीं, बल्कि स्टार्टअप्स, आईटी सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को भी फायदा मिल सकता है।

GCC देशों के साथ भी फ्री ट्रेड डील की रफ्तार तेज
अमेरिका के साथ डील के अलावा, भारत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। लगभग दो दशकों से अटकी बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। पीयूष गोयल के अनुसार, ‘नियमों की शर्तों’ पर हस्ताक्षर कर दिए गए हैं और आगे की प्रक्रिया तेज की जा रही है। फिलहाल भारत और GCC देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 179 अरब डॉलर का है। पूर्ण FTA लागू होने के बाद ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोकेमिकल्स और निवेश जैसे क्षेत्रों में नए मौके बनेंगे।

ऊर्जा नीति और भू-राजनीतिक संतुलन का पहलू
भारत-अमेरिका ट्रेड डील की चर्चा के साथ ऊर्जा नीति को लेकर भी बयानबाजी हुई है। हालांकि भारत ने हमेशा यह साफ किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों पर फैसले राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर करता है। अमेरिका के साथ ऊर्जा आयात बढ़ने से सप्लाई के नए विकल्प खुल सकते हैं, जिससे भारत को वैश्विक अस्थिरता के दौर में भी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह समझौता आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी, दोनों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

भारतीय निर्यातकों और अर्थव्यवस्था को क्या फायदा
टैरिफ में कटौती से भारतीय उत्पाद अमेरिका में सस्ते होंगे, जिससे मांग बढ़ने की संभावना है। इसका सीधा असर फैक्ट्रियों के ऑर्डर, उत्पादन और रोजगार पर पड़ेगा। खाद्य प्रसंस्करण, फार्मा और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टरों में निर्यात बढ़ने से भारत की विदेशी मुद्रा आय भी मजबूत होगी। यह ट्रेड डील भारत-अमेरिका संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में दोनों अर्थव्यवस्थाओं को और करीब ला सकती है।

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Shashank Pathak
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