RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की फरवरी की बैठक के नतीजों ने बाजार और आम लोगों दोनों का ध्यान खींचा है। 4 से 6 फरवरी के बीच हुई बैठक के बाद आरबीआई ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। यह चालू वित्त वर्ष की आखिरी द्विमासिक मौद्रिक नीति बैठक थी। इस फैसले के साथ ही आरबीआई ने यह संकेत दिया कि फिलहाल ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की जल्दबाजी नहीं होगी और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दी जाएगी।
पॉलिसी स्टांस ‘न्यूट्रल’ बरकरार, क्या मिलते हैं संकेत?
मौद्रिक नीति समिति ने अपना रुख यानी पॉलिसी स्टांस ‘न्यूट्रल’ पर बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि आरबीआई आगे चलकर हालात के मुताबिक फैसला लेगा। न तो अभी ब्याज दरों में तेज कटौती का संकेत दिया गया है और न ही बढ़ोतरी का। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौजूदा समय में भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू मांग मजबूत है और महंगाई काबू में नजर आ रही है। ऐसे में फिलहाल संतुलित नीति अपनाना जरूरी है।
FY26 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़ा
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 7.3% से बढ़ाकर 7.4% कर दिया है। इसके अलावा 2026-27 की पहली तिमाही के लिए ग्रोथ अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 6.9% और दूसरी तिमाही के लिए 6.8% से बढ़ाकर 7% किया गया है। आरबीआई का मानना है कि घरेलू खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रिकवरी से अर्थव्यवस्था को सपोर्ट मिलेगा। हालांकि गवर्नर ने यह भी बताया कि नई जीडीपी सीरीज आने के कारण पूरे साल का विस्तृत अनुमान फिलहाल जारी नहीं किया गया है।
महंगाई पर नजर, RBI का क्या आकलन?
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई दर का अनुमान 2.1% रखा है। वहीं अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई 4% और दूसरी तिमाही में 4.2% रहने का अनुमान दिया गया है। गवर्नर ने कहा कि महंगाई फिलहाल अनुमानित दायरे में है और सप्लाई साइड से दबाव सीमित बना हुआ है। खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर बना रह सकता है, लेकिन समग्र तौर पर महंगाई पर नियंत्रण की उम्मीद जताई गई है। यही वजह है कि आरबीआई ने अभी रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया।
फरवरी 2025 से अब तक 125 बेसिस पॉइंट की कटौती
पिछले एक साल में आरबीआई ने ब्याज दरों में अच्छी-खासी राहत दी है। फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती हो चुकी है। दिसंबर की बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई थी, जिससे रेपो रेट 5.50% से घटकर 5.25% हो गया था। इससे पहले फरवरी से जून के बीच लगातार तीन बार दरें घटाकर रेपो रेट 6.5% से 5.5% तक लाई गई थी। लंबे समय तक दरें स्थिर रखने के बाद की गई इन कटौतियों का मकसद ग्रोथ को सपोर्ट देना था।
रेपो रेट क्या है और आम लोगों पर इसका असर
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटती है, तो बैंकों के लिए कर्ज सस्ता होता है और वे आम लोगों को भी कम ब्याज पर लोन दे सकते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI कम हो सकती है। दूसरी ओर, जब रेपो रेट घटती है तो फिक्स्ड डिपॉजिट और सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज भी घट सकता है। मौजूदा फैसले से लोन लेने वालों को तत्काल कोई नई राहत नहीं मिलेगी, लेकिन पहले की गई कटौतियों का असर धीरे-धीरे EMI में दिखाई दे सकता है।
निवेशक और आम लोगों की उम्मीद
आरबीआई के फैसले से यह साफ है कि फिलहाल आर्थिक स्थिरता पर फोकस रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रोथ में बड़ी गिरावट या महंगाई में अचानक उछाल नहीं आता, तो अगली कुछ बैठकों में रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम है। इसका मतलब यह है कि लोन सस्ते होने की उम्मीद रखने वालों को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं निवेशकों के लिए यह संकेत है कि बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है और लंबी अवधि में भारत की ग्रोथ कहानी मजबूत बनी हुई है।