8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in लॉन्च कर दी है और अब देशभर के हितधारकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं। आयोग ने MyGov पोर्टल पर 18 सवालों की एक संरचित प्रश्नावली जारी की है, जिसके जरिए वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े अहम मुद्दों पर राय ली जा रही है। सरकार का मकसद है कि अंतिम सिफारिशें ज़मीनी जरूरतों और मौजूदा आर्थिक हालात के अनुरूप तैयार हों।
कौन दे सकता है अपनी राय?
इस प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के लिए आयोग ने दायरा काफी बड़ा रखा है। केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी, न्यायिक अधिकारी, अदालतों के अधिकारी-कर्मचारी, नियामक निकायों के सदस्य, कर्मचारियों और पेंशनरों के संघ, शोधकर्ता, शिक्षाविद और आम नागरिक—सब MyGov पोर्टल पर जाकर अपनी राय दर्ज कर सकते हैं। इससे वेतन आयोग को अलग-अलग सेक्टर की व्यावहारिक चुनौतियों और अपेक्षाओं को समझने में मदद मिलेगी। आयोग का मानना है कि व्यापक सहभागिता से संतुलित और न्यायसंगत सिफारिशें तैयार होंगी।
कैसे मांगी जा रही है राय?
आयोग ने बताया है कि सुझाव केवल MyGov.in पर उपलब्ध 18 सवालों वाली प्रश्नावली के माध्यम से लिए जाएंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। कागजी फॉर्म, ईमेल या पीडीएफ के जरिए भेजी गई प्रतिक्रियाएं स्वीकार नहीं की जाएंगी। आयोग का कहना है कि डिजिटल माध्यम से एकरूप डेटा मिलेगा, जिससे विश्लेषण आसान और निष्पक्ष रहेगा। इसके साथ ही, प्रतिभागियों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और सभी जवाबों को सामूहिक रूप से विश्लेषित कर सार्वजनिक निष्कर्ष साझा किए जाएंगे।
क्या है आखिरी तारीख?
जो भी कर्मचारी, पेंशनधारक या आम नागरिक अपनी राय दर्ज करना चाहते हैं, उनके लिए समयसीमा तय कर दी गई है। 8वें वेतन आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिक्रियाएं जमा करने की अंतिम तारीख 16 मार्च 2026 है। इसके बाद मिले इनपुट्स को आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने में शामिल करेगा। इसलिए जिन लोगों के मन में वेतन, फिटमेंट फैक्टर या भत्तों को लेकर सुझाव हैं, वे समय रहते MyGov पोर्टल पर जाकर हिस्सा ले सकते हैं।
किन मुद्दों पर मांगी गई है राय?
प्रश्नावली में वेतन आयोग की दिशा तय करने वाले अहम सवाल शामिल हैं। इनमें विकास, महंगाई और वित्तीय संतुलन के बीच मार्गदर्शक सिद्धांत क्या होने चाहिए, वेतन संशोधन में फिटमेंट फैक्टर की भूमिका क्या हो, इंक्रीमेंट की संरचना कैसे तय की जाए और उच्च स्तर के सरकारी वेतन को किन मानकों से बेंचमार्क किया जाए—जैसे सवाल प्रमुख हैं। इसके अलावा बकाया भुगतान को लेकर भी राय मांगी गई है कि क्या 8वें वेतन आयोग के बकाए जनवरी 2026 से दिए जाने चाहिए। ये सवाल सीधे कर्मचारियों की जेब और भविष्य की आय संरचना से जुड़े हैं।
8वां वेतन आयोग कब बना?
8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा जनवरी 2025 में की गई थी। बाद में वित्त मंत्रालय ने 3 नवंबर 2025 की अधिसूचना के जरिए इसे औपचारिक रूप से अधिसूचित किया। उसी समय आयोग के लिए संदर्भ की शर्तें (Terms of Reference) भी मंजूर की गईं। आयोग को वेतन, पेंशन और भत्तों में संशोधन से जुड़ी सिफारिशों के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। राजधानी में आयोग का कार्यालय भी आवंटित किया जा चुका है, जिससे उसका कामकाज तेज़ी से आगे बढ़ सके।
कर्मचारियों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
वेतन आयोग की सिफारिशें आम तौर पर केंद्रीय सरकारी विभागों में वेतन संरचना, पेंशन भुगतान और भत्तों को प्रभावित करती हैं। इससे लाखों सरकारी-संबंधित परिवारों की आय, खर्च करने की क्षमता और उपभोग पैटर्न पर सीधा असर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वेतन में संतुलित बढ़ोतरी होती है, तो इससे बाजार में मांग बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। हालांकि सरकार के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होता है।
आगे के संकेत
आयोग द्वारा मांगी जा रही राय इस बात का संकेत है कि सरकार अंतिम फैसलों से पहले हितधारकों की आवाज़ सुनना चाहती है। आने वाले महीनों में इन इनपुट्स के आधार पर मसौदा तैयार होगा और फिर अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपी जाएंगी। कर्मचारियों के लिए यह मौका है कि वे अपनी ज़मीनी चुनौतियां और अपेक्षाएं सीधे नीति-निर्माण प्रक्रिया तक पहुंचाएं। अब देखना होगा कि 8वां वेतन आयोग इन सुझावों को कैसे संतुलित कर नई वेतन संरचना की दिशा तय करता है।