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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > नॉन रिन्यूएबल एनर्जी > Crude oil 100 डॉलर पार: IOC, BPCL और HPCL पर बढ़ा दबाव, UBS ने घटाई रेटिंग
नॉन रिन्यूएबल एनर्जी

Crude oil 100 डॉलर पार: IOC, BPCL और HPCL पर बढ़ा दबाव, UBS ने घटाई रेटिंग

Last updated: 09/03/2026 3:48 PM
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Industrial empire correspondent
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Crude oil price crosses 100 dollars impacting IOC BPCL and HPCL oil marketing company stocks
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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। हालात ऐसे हैं कि Brent Crude Oil की कीमत 40 महीनों में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इस तेजी का सीधा असर भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों यानी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ता दिखाई दे रहा है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म UBS ने इसी पृष्ठभूमि में भारत की प्रमुख कंपनियों Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum को लेकर अपनी रेटिंग में बदलाव किया है।

IOC और BPCL को ‘न्यूट्रल’, HPCL को ‘सेल’ रेटिंग
UBS ने अपनी ताजा रिपोर्ट में Indian Oil Corporation (IOC) और Bharat Petroleum (BPCL) की रेटिंग को ‘न्यूट्रल’ कर दिया है। वहीं Hindustan Petroleum (HPCL) के लिए ‘सेल’ यानी बेचने की सलाह दी गई है। ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा हालात में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और रिफाइनिंग मार्जिन में उतार-चढ़ाव इन कंपनियों की कमाई पर दबाव डाल सकते हैं। UBS के अनुसार हालिया परिस्थितियां 2022 के तेल संकट की याद दिलाती हैं, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था और तेल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ा था।

भारत में कीमतें तुरंत नहीं बढ़ा पातीं कंपनियां
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव करना हमेशा संभव नहीं होता। सरकारी नीतियों और बाजार की परिस्थितियों के कारण तेल कंपनियों को कई बार लागत बढ़ने के बावजूद कीमतें स्थिर रखनी पड़ती हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है।

इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी कंपनियों के लिए परेशानी बढ़ा रही है। वर्तमान में रुपया लगभग 92 प्रति डॉलर के स्तर पर है, जबकि 2022 में यह करीब 79 के आसपास था। कमजोर रुपया आयातित कच्चे तेल को और महंगा बना देता है।

मुनाफे के अनुमान में बड़ी कटौती
UBS ने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन के अनुमान में बड़ी कटौती की है। रिपोर्ट के अनुसार मार्केटिंग मार्जिन के अनुमान में करीब 43 से 45 प्रतिशत और 22 से 26 प्रतिशत तक कमी की गई है। हालांकि इसी अवधि में ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) के अनुमान को बढ़ाया गया है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनियों को ज्यादा फायदा नहीं होगा, क्योंकि इन कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा ईंधन की मार्केटिंग से आता है। इसी वजह से UBS ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कंपनियों के अनुमानित शुद्ध लाभ में भी कटौती की है। रिपोर्ट के अनुसार IOC के मुनाफे में 19 प्रतिशत, BPCL में 15 प्रतिशत और HPCL में 46 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान लगाया गया है।

शेयर बाजार में भी दिखा असर
ब्रोकरेज की इस रिपोर्ट के बाद शेयर बाजार में भी इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। BSE Oil & Gas Index इंट्राडे कारोबार में करीब 3 प्रतिशत तक गिर गया। वहीं IOC, BPCL और HPCL के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई और कुछ समय के लिए इनमें लगभग 8 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इस दौरान व्यापक बाजार भी दबाव में रहा और BSE Sensex लगभग 2.8 प्रतिशत तक नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।

ब्रेंट क्रूड में तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत में पिछले एक महीने के दौरान भारी तेजी देखी गई है। करीब एक महीने पहले इसकी कीमत लगभग 68 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर करीब 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। यानी एक महीने में लगभग 71 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और संभावित सप्लाई बाधाओं की वजह से आया है।

आगे क्या रह सकता है तेल का रुख
UBS की ग्लोबल ऑयल टीम का मानना है कि अगर तेल की आपूर्ति में बाधा कुछ हफ्तों तक जारी रहती है, तो बाजार में जोखिम प्रीमियम बना रह सकता है। अगर संघर्ष लंबा चलता है या ऊर्जा ढांचे पर हमले होते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर से ऊपर स्थिर रह सकती हैं और कुछ समय के लिए 100 डॉलर से भी ज्यादा जा सकती हैं।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर
भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें मई 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है। UBS का अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत करीब 85 डॉलर प्रति बैरल और डॉलर-रुपया दर 92 के आसपास रहती है, तो तेल कंपनियों का संयुक्त मार्केटिंग मार्जिन लगभग 4 से 5 रुपये प्रति लीटर रह सकता है। जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह मार्जिन करीब 13 से 14 रुपये प्रति लीटर था।

घटाए गए टारगेट प्राइस
– कमाई में अनिश्चितता को देखते हुए UBS ने इन कंपनियों के टारगेट प्राइस भी घटा दिए हैं।
– Indian Oil Corporation का टारगेट प्राइस 190 रुपये से घटाकर 175 रुपये कर दिया गया है।
– Bharat Petroleum का टारगेट प्राइस 425 रुपये से घटाकर 365 रुपये कर दिया गया है।
– Hindustan Petroleum का टारगेट प्राइस 540 रुपये से घटाकर 340 रुपये कर दिया गया है।

हलचल पर नजर
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारत की तेल विपणन कंपनियों के सामने चुनौतीपूर्ण स्थिति बनती दिख रही है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में इन कंपनियों की कमाई और शेयर प्रदर्शन पर दबाव बना रह सकता है।

TAGGED:BPCLcrude oilCrude Oil PricesHPCLIndustrial EmpireIOC
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