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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एग्रीकल्चर > Summer crop sowing 2026: ग्रीष्मकालीन खेती में सुस्ती, लेकिन दलहन ने दिखाई ताकत, क्या कह रहे हैं ताज़ा आंकड़े?
एग्रीकल्चर

Summer crop sowing 2026: ग्रीष्मकालीन खेती में सुस्ती, लेकिन दलहन ने दिखाई ताकत, क्या कह रहे हैं ताज़ा आंकड़े?

Last updated: 24/03/2026 5:55 PM
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Industrial empire correspondent
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Summer crop sowing 2026 India with farmers in field and pulse crops cultivation
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Summer crop sowing 2026: साल 2026 में ग्रीष्मकालीन फसलों की बोआई को लेकर आई ताज़ा रिपोर्ट किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए मिलेजुले संकेत दे रही है। एक तरफ जहां कुल बोआई क्षेत्र में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी तरफ दलहन फसलों ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। यह बदलाव खेती के पैटर्न और किसानों की प्राथमिकताओं में हो रहे परिवर्तन की ओर इशारा करता है।

कुल बोआई में आई गिरावट
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 20 मार्च 2026 तक देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की कुल बोआई 42.68 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 43.69 लाख हेक्टेयर था। यानी इस साल अब तक करीब 2.33% की गिरावट देखी गई है।

हालांकि, अगर इसे बड़े परिप्रेक्ष्य में देखें, तो यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही। 2025 में ग्रीष्मकालीन फसलों का कुल रकबा 83.92 लाख हेक्टेयर था, जबकि सामान्य रकबा 75.37 लाख हेक्टेयर है। इसका मतलब है कि अब तक सामान्य क्षेत्र के आधे से ज्यादा हिस्से में बोआई पूरी हो चुकी है। फिर भी शुरुआती सुस्ती यह संकेत देती है कि इस साल मौसम, लागत या बाजार की अनिश्चितता का असर किसानों के फैसलों पर पड़ा है।

दलहन फसलों ने दिखाई मजबूती
जहां कुल बोआई में गिरावट देखने को मिल रही है, वहीं दलहन फसलों ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया है। इस साल 20 मार्च तक दलहन फसलों की बोआई 4.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल के 3.47 लाख हेक्टेयर के मुकाबले लगभग 17.89% ज्यादा है। इसमें सबसे ज्यादा योगदान मूंग और उड़द का रहा है।

मूंग का रकबा करीब 18% बढ़कर 2.57 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि उड़द का रकबा 11.50% बढ़कर 1.28 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। यह साफ संकेत है कि किसान अब दलहन फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि इनमें लागत कम और मुनाफा अपेक्षाकृत बेहतर होता है।

चावल और मोटे अनाज का घटा रकबा
दूसरी ओर, चावल और मोटे अनाज (श्रीअन्न) की बोआई में गिरावट चिंता का विषय बन रही है। इस साल ग्रीष्मकालीन चावल का रकबा 2.77% घटकर 27.86 लाख हेक्टेयर रह गया है। वहीं मोटे अनाजों का रकबा भी काफी घटा है और यह करीब 6.04 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया है। यह बदलाव इस बात का संकेत देता है कि किसान उन फसलों से दूरी बना रहे हैं, जिनमें या तो लागत ज्यादा है या बाजार में कीमतों की अनिश्चितता बनी रहती है।

तिलहन फसलों की स्थिति मिली-जुली
तिलहन फसलों की बात करें तो इस क्षेत्र में स्थिति थोड़ी संतुलित नजर आती है। इस साल 20 मार्च तक 4.73 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बोआई हुई है, जो पिछले साल के 4.69 लाख हेक्टेयर से थोड़ी ज्यादा है। हालांकि, इसके अंदर भी अलग-अलग फसलों का प्रदर्शन अलग रहा है। मूंगफली का रकबा लगभग स्थिर बना हुआ है, जबकि तिल की खेती में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि तिलहन फसलों में भी किसान चयनात्मक तरीके से निवेश कर रहे हैं।

क्यों बदल रहा है खेती का ट्रेंड?
विशेषज्ञों के मुताबिक, खेती के इस बदलते ट्रेंड के पीछे कई कारण हैं। बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता, बाजार में उतार-चढ़ाव और सरकारी नीतियां किसानों के फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। दलहन फसलों की ओर झुकाव का एक बड़ा कारण यह भी है कि इनकी मांग लगातार बनी रहती है और सरकार भी इनके उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, दलहन मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करती हैं, जिससे किसानों को लंबे समय में फायदा मिलता है।

संतुलन की ओर बढ़ रही खेती
2026 की ग्रीष्मकालीन खेती एक बदलाव के दौर से गुजर रही है। जहां एक ओर पारंपरिक फसलों का रकबा थोड़ा घट रहा है, वहीं दलहन जैसी फसलें नई उम्मीद बनकर उभर रही हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ट्रेंड कितना स्थायी रहता है और सरकार किस तरह किसानों को संतुलित और लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। फिलहाल, यह कहा जा सकता है कि भारतीय खेती धीरे-धीरे स्मार्ट और रणनीतिक दिशा में आगे बढ़ रही है।

TAGGED:AgricultureDalhan cropsIndustrial EmpireMoongSummer crop sowing 2026
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