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The Industrial Empire - उद्योग, व्यापार और नवाचार की दुनिया | The World of Industry, Business & Innovation > एग्रीकल्चर > भारत ने 4 साल बाद फिर शुरू किया गेहूं निर्यात; ITC ने UAE भेजा 22,000 टन गेहूं
एग्रीकल्चर

भारत ने 4 साल बाद फिर शुरू किया गेहूं निर्यात; ITC ने UAE भेजा 22,000 टन गेहूं

Last updated: 05/05/2026 5:44 PM
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Industrial Empire
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गेहूं निर्यात
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करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भारत ने एक बार फिर गेहूं निर्यात शुरू कर दिया है। यह भारतीय कृषि और व्यापार क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, देश की प्रमुख कंपनी आईटीसी ने पश्चिमी भारत के कांडला पोर्ट से करीब 22,000 मीट्रिक टन गेहूं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Contents
2022 में क्यों लगा था गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध?2023 और 2024 में भी जारी रही रोक2026 में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीदसरकारी खरीद में भी आई तेजीआईटीसी ने भेजी पहली खेपकिसानों को होगा सीधा फायदामिडिल ईस्ट बाजार पर भारत की नजरवैश्विक बाजार में भारत की स्थिति होगी मजबूतक्या पूरी तरह खुल गया है निर्यात?आगे क्या उम्मीद?

इसके साथ ही भारत ने औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी वापसी दर्ज कराई है। लंबे समय से गेहूं निर्यात पर लगी रोक के बाद यह पहला बड़ा कदम है, जिससे साफ है कि सरकार अब घरेलू आपूर्ति को लेकर पहले से अधिक आश्वस्त नजर आ रही है।

2022 में क्यों लगा था गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध?

भारत सरकार ने साल 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय देश में भीषण गर्मी और हीटवेव के कारण गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान हुआ था। कई राज्यों में उत्पादन अनुमान से कम रहा, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया।

उत्पादन घटने के साथ-साथ सरकारी भंडार भी कम होने लगे। इसका असर बाजार में कीमतों पर दिखाई दिया और गेहूं के दाम तेजी से बढ़ने लगे। ऐसे में सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए निर्यात पर रोक लागू की ताकि देश में खाद्यान्न संकट न पैदा हो और कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।

2023 और 2024 में भी जारी रही रोक

सरकार ने केवल 2022 तक ही नहीं, बल्कि 2023 और 2024 में भी गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध जारी रखा। इसकी बड़ी वजह घरेलू महंगाई, कमजोर स्टॉक और बाजार में कीमतों को स्थिर रखना था। हालात इतने चुनौतीपूर्ण हो गए थे कि पहली बार यह चर्चा होने लगी थी कि भारत को 2017 के बाद पहली बार गेहूं आयात करना पड़ सकता है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ, लेकिन इससे साफ था कि देश की आपूर्ति स्थिति सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी।

2026 में रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद

अब स्थिति पहले से काफी बेहतर दिखाई दे रही है। इस साल भारत में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। बेहतर मौसम, अच्छी बुवाई और मजबूत फसल परिस्थितियों के कारण उत्पादन का अनुमान काफी सकारात्मक है। अच्छी फसल के चलते सरकार का भरोसा भी बढ़ा है। यही वजह है कि अब निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने का फैसला लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन अनुमान सही साबित होते हैं, तो भारत आने वाले समय में वैश्विक गेहूं बाजार में फिर मजबूत खिलाड़ी बन सकता है।

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सरकारी खरीद में भी आई तेजी

सेंट्रल फूडग्रेन्स प्रोक्योरमेंट पोर्टल के अनुसार, 1 मई 2026 तक 2026-27 रबी मार्केटिंग सीजन के लिए भारत सरकार की गेहूं खरीद 23.25 मिलियन टन तक पहुंच चुकी है। पंजाब और हरियाणा में गेहूं की भारी आवक ने खरीद के आंकड़ों को मजबूत किया है।

सरकार ने राष्ट्रीय खरीद लक्ष्य को भी 15 प्रतिशत बढ़ाकर 34.5 मिलियन टन कर दिया है। यह फैसला बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को राहत देने और सरकारी स्टॉक मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया। हालांकि मध्य प्रदेश में खरीद की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है, लेकिन कुल खरीद स्थिति सकारात्मक मानी जा रही है।

आईटीसी ने भेजी पहली खेप

भारत के निर्यात दोबारा शुरू होने का पहला बड़ा संकेत आईटीसी की खेप से मिला है। आईटीसी ने कांडला पोर्ट से 22,000 मीट्रिक टन गेहूं यूएई भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। यह खेप केवल एक कारोबारी सौदा नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की वापसी का संकेत है। यदि आने वाले महीनों में स्टॉक और उत्पादन की स्थिति मजबूत बनी रहती है, तो अन्य भारतीय कंपनियां भी गेहूं निर्यात में शामिल हो सकती हैं।

किसानों को होगा सीधा फायदा

गेहूं निर्यात शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिल सकता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलता है, तो मांग बढ़ती है और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। निर्यात से घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिससे किसानों की सौदेबाजी क्षमता मजबूत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात गतिविधि बढ़ने पर किसानों की आय में सुधार देखने को मिल सकता है।

मिडिल ईस्ट बाजार पर भारत की नजर

यूएई समेत मिडिल ईस्ट के कई देश खाद्यान्न आयात पर निर्भर हैं। भारतीय गेहूं वहां गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण पसंद किया जाता है। भौगोलिक निकटता के कारण शिपिंग लागत भी कम रहती है, जिससे भारतीय निर्यातकों को लाभ मिलता है। इसी वजह से यूएई भारत के लिए शुरुआती निर्यात गंतव्य माना जा रहा है। भविष्य में सऊदी अरब, ओमान और अन्य खाड़ी देशों में भी भारतीय गेहूं की मांग बढ़ सकती है।

वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति होगी मजबूत

भारत दुनिया के सबसे बड़े गेहूं उत्पादकों में शामिल है। लेकिन निर्यात प्रतिबंध के कारण पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक गेहूं व्यापार में भारत की भूमिका सीमित हो गई थी। अब निर्यात दोबारा शुरू होने से भारत अपनी वैश्विक उपस्थिति मजबूत कर सकता है। यह खासतौर पर ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक खाद्यान्न आपूर्ति भू-राजनीतिक तनाव और जलवायु जोखिमों से प्रभावित हो रही है।

क्या पूरी तरह खुल गया है निर्यात?

फिलहाल निर्यात दोबारा शुरू होने को चरणबद्ध तरीके से देखा जा रहा है। सरकार पूरी तरह बिना प्रतिबंध वाले निर्यात की ओर तुरंत बढ़ती नहीं दिख रही। घरेलू आपूर्ति, महंगाई और स्टॉक स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि बाजार की स्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो निर्यात गतिविधि धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है।

आगे क्या उम्मीद?

विशेषज्ञों के अनुसार, आईटीसी की पहली खेप केवल शुरुआत है।M यदि इस साल फसल और सरकारी भंडार अनुमान के मुताबिक मजबूत रहते हैं, तो आने वाले महीनों में और भारतीय कंपनियां गेहूं निर्यात के लिए आगे आ सकती हैं। इससे भारत की कृषि निर्यात प्रोफाइल मजबूत होगी और किसानों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

करीब चार साल बाद भारत का गेहूं निर्यात फिर शुरू होना एक बड़ा आर्थिक और कृषि संकेत है। आईटीसी की 22,000 टन गेहूं की पहली खेप भारत की वैश्विक बाजार में वापसी का प्रतीक मानी जा रही है। अच्छी फसल, मजबूत सरकारी खरीद और बेहतर स्टॉक स्थिति ने सरकार को निर्यात प्रतिबंधों में ढील देने का भरोसा दिया है। यदि आने वाले समय में उत्पादन और आपूर्ति मजबूत रहती है, तो भारत फिर वैश्विक गेहूं व्यापार में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे किसानों को बेहतर दाम, निर्यातकों को नए अवसर और भारत को अंतरराष्ट्रीय कृषि व्यापार में मजबूत स्थिति मिल सकती है।

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