डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में तमिलनाडु सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के मानव संसाधन प्रबंधन विभाग (Human Resource Management Department) ने 1 जून 2026 से अपने कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक और फेस-आईडी आधारित उपस्थिति प्रणाली को अनिवार्य करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों की समयपालन, उपस्थिति और कार्यस्थल अनुशासन को बेहतर बनाना है।
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक परिपत्र के अनुसार, विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अब कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कई स्तरों की सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें बायोमेट्रिक अटेंडेंस, फेस-आईडी सत्यापन और मैनुअल उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करना शामिल है। इसके अलावा कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान अपना आधिकारिक पहचान पत्र भी पहनना अनिवार्य होगा।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब विभाग के भीतर कुछ कर्मचारियों के समय पर कार्यालय नहीं पहुंचने और उपस्थिति संबंधी शिकायतें सामने आई थीं। सचिवालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों की लेटलतीफी को लेकर मिली शिकायतों के बाद सरकार ने उपस्थिति निगरानी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया।
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को सुबह 10 बजे से पहले कार्यालय पहुंचना होगा। इसके बाद उन्हें बायोमेट्रिक मशीन पर उपस्थिति दर्ज करनी होगी, फेस-आईडी के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी और साथ ही पारंपरिक मैनुअल रजिस्टर में भी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। यानी अब किसी एक माध्यम पर निर्भर रहने के बजाय सरकार ने बहु-स्तरीय सत्यापन मॉडल अपनाया है।
व्यापार और प्रबंधन विशेषज्ञ इस कदम को सरकारी कार्य संस्कृति में तकनीक के बढ़ते उपयोग का उदाहरण मान रहे हैं। उनका कहना है कि निजी क्षेत्र में पहले से ही डिजिटल उपस्थिति प्रबंधन प्रणाली का व्यापक उपयोग हो रहा है और अब सरकारी विभाग भी दक्षता बढ़ाने के लिए इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। फेस रिकग्निशन तकनीक कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है और प्रॉक्सी अटेंडेंस जैसी समस्याओं को कम कर सकती है।
हालांकि, यह व्यवस्था केवल मानव संसाधन प्रबंधन विभाग तक सीमित है। राज्य सरकार ने अभी इसे अन्य विभागों में लागू करने की कोई घोषणा नहीं की है। लेकिन प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य सरकारी विभागों में भी इसी प्रकार की डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू की जा सकती है।
भारत में डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें लगातार नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रही हैं। ई-गवर्नेंस, डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन और ऑनलाइन सेवा वितरण के बाद अब उपस्थिति प्रबंधन में भी तकनीकी समाधान तेजी से जगह बना रहे हैं। तमिलनाडु सरकार का यह कदम इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई प्रणाली की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कर्मचारियों की समयपालन और उपस्थिति में कितना सुधार ला पाती है। फिलहाल 1 जून से शुरू हो रही यह पहल प्रशासनिक सुधार और डिजिटल निगरानी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रयोग के रूप में देखी जा रही है, जिस पर अन्य राज्य सरकारों और विभागों की भी नजर रहेगी।