नई दिल्ली: जिंदगी में मुश्किलें कभी-कभी इंसान को ऐसे रास्ते पर ले जाती हैं, जहां से सफलता की नई कहानी लिखी जाती है। एस प्रभाकर कामथ की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। भारतीय वायुसेना में जाने का सपना देखने वाले कामथ ने माता-पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कारोबार शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने रेनकोट और पटाखे बेचे, लेकिन बाद में आइसक्रीम के कारोबार में अपनी पहचान बनाई। साल 1975 में मंगलुरु के एक छोटे से पार्लर से शुरू हुआ आइडियल आइसक्रीम का सफर आज बड़े बिजनेस में बदल चुका है। वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी ने 153.2 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया।
एयरफोर्स का सपना छोड़ शुरू किया कारोबार
एस प्रभाकर कामथ का सपना भारतीय वायुसेना में शामिल होने का था। हालांकि, 20 साल की उम्र में माता-पिता की मौत के बाद परिवार और भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। ऐसे में उन्हें अपना सपना छोड़कर कमाई का रास्ता तलाशना पड़ा।
शुरुआत में उन्होंने सिलाई के काम में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और रेनकोट बेचने का कारोबार किया। इसके बाद पटाखों के मौसमी बिजनेस में भी हाथ आजमाया। लेकिन वह ऐसा व्यवसाय करना चाहते थे, जिसकी मांग पूरे साल बनी रहे। इसी तलाश ने उन्हें आइसक्रीम के कारोबार की ओर मोड़ दिया।
जब डीलर नहीं मिले तो खुद बनाने लगे आइसक्रीम
प्रभाकर कामथ ने शुरुआत में आइसक्रीम बेचने के लिए फ्रीजर खरीदे, लेकिन तैयार आइसक्रीम की सप्लाई करने वाले डीलर नहीं मिले। इसके बाद उन्होंने खुद आइसक्रीम बनाने का फैसला किया। घर पर कई प्रयोग किए और अपने बनाए फ्लेवर पड़ोसियों को चखाए। धीरे-धीरे उनके प्रयोग सफल होने लगे और उन्होंने अपने उत्पादों को बाजार में उतारने की तैयारी की।
1975 में खुला पहला पार्लर
1 मई 1975 को प्रभाकर कामथ ने कर्नाटक के मंगलुरु में मार्केट रोड पर आइडियल आइसक्रीम का पहला पार्लर खोला। शुरुआत में यहां करीब 14 फ्लेवर उपलब्ध थे। स्वाद, गुणवत्ता और किफायती कीमतों के कारण ग्राहकों के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी। कुछ ही वर्षों में पार्लर पर ग्राहकों की कतारें लगने लगीं। ब्रांड से जुड़ा Pabbas नाम भी मंगलुरु में आइसक्रीम प्रेमियों के बीच खास पहचान बनाने लगा।
बेटे ने कारोबार को पहुंचाया नई ऊंचाई पर
प्रभाकर कामथ ने व्यवसाय की नींव रखी, जबकि उनके बेटे मुकुंद कामथ ने इसके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी ने 2001 में रिटेल बाजार में अपने उत्पादों की सप्लाई शुरू की। इससे कारोबार को पार्लर से आगे बढ़कर दूसरे बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिला।
कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, आइडियल आइसक्रीम का नेटवर्क कर्नाटक, केरल और गोवा में 8,500 से अधिक रिटेल दुकानों तक फैला है। इसके पोर्टफोलियो में 150 से अधिक उत्पाद हैं, जिनमें पैकेट वाली आइसक्रीम, कैंडी, कोन और संडे शामिल हैं।
153 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंचा रेवेन्यू
Tracxn के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का रेवेन्यू 153.2 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 16.7 करोड़ रुपये रहा। यह आंकड़ा दिखाता है कि एक छोटे पार्लर से शुरू हुआ कारोबार किस तरह बड़े क्षेत्रीय ब्रांड में बदल गया।
प्रभाकर कामथ का 2021 में मंगलुरु में स्कूटर दुर्घटना के बाद सिर में चोट लगने से निधन हो गया था। उन्हें प्यार से ‘Ideal Pabba’ भी कहा जाता था। उन्होंने जिस कारोबार की शुरुआत सीमित संसाधनों के साथ की थी, उसे उनके परिवार ने आगे बढ़ाया। आज आइडियल आइसक्रीम की कहानी मेहनत, नए प्रयोग और पीढ़ियों तक आगे बढ़ने वाले पारिवारिक कारोबार की मिसाल बन चुकी है।