भारत में स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है, और अब इस दिशा में Adani Group ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। समूह ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) में एंट्री करते हुए गुजरात के खावड़ा में 1,126 मेगावाट/3,530 मेगावाट-घंटा क्षमता वाली विशाल परियोजना की घोषणा की है। यह परियोजना न केवल भारत की सबसे बड़ी होगी, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी एकल-स्थान ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।
क्या है यह BESS प्रोजेक्ट?
BESS यानी “Battery Energy Storage System” ऐसी तकनीक है जो बिजली को संग्रहित कर जरूरत पड़ने पर ग्रिड को वापस सप्लाई करती है। खावड़ा में बनने वाली यह प्रणाली 700 से अधिक कंटेनरों से बनेगी, जो बिजली को 3 घंटे से भी अधिक समय तक स्टोर रख सकेगी। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा – खासकर सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाना है।
यह परियोजना खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क का हिस्सा है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र कहा जा रहा है। इस प्लांट की विद्युत क्षमता 1,126 मेगावाट और ऊर्जा क्षमता 3,530 मेगावाट-घंटा होगी। इसका अर्थ है कि यह सिस्टम न केवल बिजली उत्पन्न करेगा बल्कि ऊर्जा को सुरक्षित रखकर पीक डिमांड के समय पर आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगा।
ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में ऐतिहासिक कदम
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने इस प्रोजेक्ट को भारत की ऊर्जा यात्रा में “मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा – “ऊर्जा भंडारण, अक्षय ऊर्जा आधारित भविष्य की नींव है। इस ऐतिहासिक परियोजना के माध्यम से हम न केवल वैश्विक मानक स्थापित कर रहे हैं, बल्कि भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी मजबूत कर रहे हैं।” अडानी ने यह भी कहा कि यह पहल समूह को बड़े पैमाने पर विश्वसनीय, स्वच्छ और किफायती ऊर्जा समाधान प्रदान करने में सक्षम बनाएगी।
पांच साल में 50 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
अडानी समूह ने अपने दीर्घकालिक विज़न के तहत यह भी घोषणा की है कि वह वित्त वर्ष 2026–27 तक अपनी ऊर्जा भंडारण क्षमता को 15 GWh (गीगावाट-घंटा) और अगले पांच वर्षों में 50 GWh तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। यह लक्ष्य समूह की “क्लीन एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर” में गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, यह भारत की नेट-ज़ीरो (Net-Zero) महत्वाकांक्षा और सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों के अनुरूप भी है।
भारत को मिलेगा वैश्विक लीडरशिप का अवसर
इस रणनीतिक पहल के साथ, अडानी ग्रुप अब उन वैश्विक कंपनियों की कतार में शामिल हो गया है जो ऊर्जा भंडारण तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। दुनिया भर में अक्षय ऊर्जा का सबसे बड़ा चैलेंज “स्टोरेज” ही रहा है और इस प्रोजेक्ट के ज़रिए भारत उस समस्या का समाधान पेश कर सकता है। यह कदम न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की दौड़ में आगे बढ़ाएगा। इससे देश की बिजली व्यवस्था अधिक स्थिर, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य-उन्मुख बनेगी।
स्वच्छ ऊर्जा से सस्टेनेबल भविष्य
अहमदाबाद स्थित अडानी समूह पहले से ही ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, मेटल्स और उपभोक्ता क्षेत्रों में सक्रिय है। अब कंपनी स्वच्छ ऊर्जा को अपने व्यवसाय का केंद्र बना रही है। खावड़ा की यह BESS परियोजना इसी दिशा में सबसे बड़ा कदम है जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास तीनों को एक साथ आगे बढ़ाएगी।
अडानी ग्रुप की 1,126 मेगावाट क्षमता वाली यह BESS परियोजना इंफ्रास्ट्रक्चर इनिशिएटिव होने के साथ भारत के ऊर्जा भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है। मार्च 2026 तक इसे चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, और इसके बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जो बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज को अपनी ऊर्जा नीति का हिस्सा बना चुके हैं। यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारत की “ग्रीन एनर्जी रेवोल्यूशन” को नई गति देगी और यह साबित करेगी कि भविष्य उन्हीं का है जो आज ऊर्जा में निवेश कर रहे हैं।