Jaypee Infratech: उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ा एक बड़ा मामला बीते गुरुवार को सामने आया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL) के प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ को गिरफ्तार कर लिया। यह कदम 12 हजार करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग और फंड डायवर्जन मामले में उठाया गया है। इस केस का सीधा असर हज़ारों उन घर खरीदारों पर पड़ा है, जो आज भी अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं।
घर खरीदारों की रकम का कथित दुरुपयोग
साल 2017 में जेपी ग्रुप के खिलाफ घर खरीदारों का गुस्सा फूटा था। कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद पुलिस में कई FIR दर्ज हुईं। इनमें समूह पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और घर खरीदारों के पैसों का गलत इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगे। ED की जांच में सामने आया कि जेपी इंफ्राटेक और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) ने हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से मिली रकम को निर्माण पर खर्च करने के बजाय अन्य ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर किया, जिससे हज़ारों परिवारों को अब तक अपने घर नहीं मिले।
जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स प्रोजेक्ट सबसे ज्यादा विवादों में
जांच एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि कई प्रमुख प्रोजेक्ट्स जैसे जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स में हजारों लोगों ने 2010-11 के दौरान फ्लैट बुक कराए थे। उन्हें वादा किया गया था कि निर्माण समय पर पूरा हो जाएगा, लेकिन आज तक बड़ी संख्या में खरीदारों को पजेशन नहीं दिया गया। ED का आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स में बुकिंग से जुटाई गई राशि को निर्माण कार्य की बजाय दूसरे बिज़नेस खर्चों और ग्रुप कंपनियों में डायवर्ट किया गया।
क्यों गिरफ़्तार किए गए मनोज गौड़?
जांच एजेंसी का कहना है कि मनोज गौड़ बतौर एमडी वित्तीय लेनदेन और कंपनी की नीतियों में प्रमुख भूमिका निभाते थे। ED के अनुसार, उन्होंने फंड डायवर्जन को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए और कई निर्णय उन्हीं की मंजूरी से लिए गए। इस आधार पर ED ने उन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है।
दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में ED की छापेमारी
ED ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई में करीब 15 स्थानों पर छापे मारे। इन कार्रवाइयों के दौरान 1.7 करोड़ रुपये नकद, महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और कई प्रॉपर्टी पेपर जब्त किए गए। ED ने उन रियल एस्टेट कंपनियों के दफ्तरों पर भी तलाशी की जिनके जेपी ग्रुप से वित्तीय लेनदेन थे, जिनमें शामिल हैं – गौरसंस इंडिया प्राइवेट, गुलशन होम्ज प्राइवेट और महागुन रियल एस्टेट प्राइवेट। एजेंसी का कहना है कि जब्त दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच चल रही है, जिससे पूरी मनी ट्रेल और फंड के दुरुपयोग की वास्तविक सीमा का पता लगाया जा सके।
हज़ारों घर खरीदारों की उम्मीदें दोबारा जागीं
इस मामले में ED की बड़ी कार्रवाई से उन हजारों लोगों को उम्मीद मिली है, जिन्होंने सालों पहले अपना सपना पूरा करने के लिए घर बुक किया था लेकिन आर्थिक अनियमितताओं की वजह से आज तक इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद अब यह जांच और तेज होगी और आगे और भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
ED अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि ग्रुप कंपनियों के बीच फंड का वास्तविक प्रवाह कैसे हुआ और किन-किन अधिकारियों ने इसमें भूमिका निभाई। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि क्या फंड को विदेशों में भी डायवर्ट किया गया था। अगले चरण में ED आरोप-पत्र दाखिल कर सकती है और कोर्ट में घर खरीदारों की हक की लड़ाई को मजबूत करने के लिए अधिक सबूत पेश कर सकती है।